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Yamuna Nagar News: मैदान के बाद कोर्ट में लड़ी लड़ाई, सीएएस ने दिलवाई ट्रॉफी
Sun, 18 Jan 2026 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 18 Jan 2026 12:45 AM IST
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ट्रॉफी के साथ अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर सुमित जय पासी। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। भारतीय फुटबॉल के इतिहास में आई-लीग 2024-25 सीजन एक बड़े कानूनी विवाद के रूप में दर्ज हो गया है। लीग का विवाद ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के बाद स्विट्जरलैंड की इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कोर्ट (सीएएस) तक पहुंचा। इंटर काशी टीम ने स्विट्जरलैंड कोर्ट में याचिका दायर की थी और सीएएस ने फैसला देते हुए इंटर काशी को विजेता घोषित किया।
यह आई-लीग देश के विभिन्न खेल मैदानों में करवाई जाती है, जिसमें देशभर से कुल 12 टीमों ने भाग लिया था। जिले के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सुमित जय पासी इंटर काशी की तरफ से खेल रहे थे। खिलाड़ी सुमित ने बताया कि आई-लीग 2024-25 में इंटर काशी एफसी खिताबी दौड़ में मजबूती से आगे बढ़ रही थी, तभी दो मामलों ने पूरे सीजन को विवादों में डाल दिया।
पहला मामला 13 जनवरी 2025 को नामधारी एफसी के खिलाफ खेले मुकाबले से जुड़ा था। इसमें आरोप लगा कि नामधारी ने एक ऐसे खिलाड़ी को मैदान में उतारा, जो पीले कार्डों के चलते निलंबित था। दूसरा मामला इंटर काशी के विदेशी खिलाड़ी मार्को बार्को (स्पेनिश फॉरवर्ड) के पुन: पंजीकरण से जुड़ा था। विरोधी क्लबों ने आरोप लगाया कि इंटर काशी ने सीजन के बीच विदेशी खिलाड़ियों के नियमों का उल्लंघन किया।
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नामधारी मैच के बाद एआईएफएफ की अनुशासन समिति ने इंटर काशी को सही ठहराते हुए तीन अंक दे दिए। परंतु अपील के बाद एआईएफएफ समिति ने यह फैसला पलट दिया और इंटर काशी के तीन अंक छिन गए। इसके बाद मार्को बार्को मामले में भी अपील समिति ने इंटर काशी के खिलाफ फैसला सुनाया। इन फैसलों के आधार पर एआईएफएफ ने चर्चिल ब्रदर्स एफसी गोवा को चैंपियन घोषित कर दिया।
एआईएफएफ के फैसलों से असंतुष्ट इंटर काशी एफसी ने स्विट्जरलैंड स्थित कोर्ट ऑफ ऑबिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स (सीएएस) का दरवाजा खटखटाया। इंटर काशी ने सीएएस में अपील दायर की। पहली अपील में सीएएस ने नामधारी मैच पर एआईएफएफ अपील समिति का फैसला रद्द कर दिया और इंटर काशी के तीन अंक बहाल कर दिए।
दूसरी अपील में सीएएस ने मार्को बार्को पंजीकरण मामले में भी इंटर काशी के पक्ष में फैसला सुनाया और एआईएफएफ को अपना निर्णय वापस लेने के आदेश दिए। इस मामले में 18 जुलाई 2025 को सीएएस ने अंतिम फैसला सुनाया और इंटर काशी एफसी को आई-लीग का 2024-25 का आधिकारिक चैंपियन घोषित कर दिया। इस दौरान इंटर काशी के 42 अंक, चर्चिल ब्रदर्स के 40 अंक और रियल कश्मीर के 37 अंक पाए गए। सीएएस ने ने एआईएफएफ को दस्तावेजों में संशोधन और इंटर काशी को चैंपियन घोषित करने के आदेश दिए।
फुटबॉल से जुड़े जिले के खिलाड़ियों ने खुशी जाहिर की है। इस दौरान वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पंकज चुघ, नरेंद्र चुघ, नरेन थापा, रणविजय सिंह ने कहा कि इस विवाद ने भारतीय फुटबॉल प्रशासन की कमजोरियों को उजागर किया है। इससे खिलाड़ियों को भारी दिक्कत झेलनी पड़ती है। वहीं, विदेशी खिलाड़ी पंजीकरण और नियमों की अस्पष्टता सामने आई है। यह स्पष्ट हुआ कि सीएएस का फैसला राष्ट्रीय महासंघ से ऊपर होता है। वहीं, यह भविष्य के लिए एक मजबूत कानूनी मिसाल बनी है।
आईएसएल में प्रमोशन और आर्थिक राहत
सुमित जय पासी ने बताया कि चैंपियन बनने के साथ ही इंटर काशी को आईएसएल 2025-26 में प्रमोशन की मंजूरी मिल गई है। सीएएस ने एआईएफएफ को मध्यस्थता खर्च का एक हिस्सा और इंटर काशी के कानूनी खर्च की आंशिक भरपाई करने का आदेश भी दिया। सुमित ने बताया कि चर्चिल ब्रदर्स ने सीएएस फैसले को चुनौती देने की कोशिश की और ट्रॉफी सौंपने से भी इन्कार कर दिया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि, स्विस फेडरल सुप्रीम कोर्ट ने चर्चिल ब्रदर्स की अंतरिम अपील खारिज कर दी, जिससे सीएएस का फैसला अंतिम और बाध्यकारी हो गया।
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जगाधरी। भारतीय फुटबॉल के इतिहास में आई-लीग 2024-25 सीजन एक बड़े कानूनी विवाद के रूप में दर्ज हो गया है। लीग का विवाद ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के बाद स्विट्जरलैंड की इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कोर्ट (सीएएस) तक पहुंचा। इंटर काशी टीम ने स्विट्जरलैंड कोर्ट में याचिका दायर की थी और सीएएस ने फैसला देते हुए इंटर काशी को विजेता घोषित किया।
यह आई-लीग देश के विभिन्न खेल मैदानों में करवाई जाती है, जिसमें देशभर से कुल 12 टीमों ने भाग लिया था। जिले के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सुमित जय पासी इंटर काशी की तरफ से खेल रहे थे। खिलाड़ी सुमित ने बताया कि आई-लीग 2024-25 में इंटर काशी एफसी खिताबी दौड़ में मजबूती से आगे बढ़ रही थी, तभी दो मामलों ने पूरे सीजन को विवादों में डाल दिया।
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पहला मामला 13 जनवरी 2025 को नामधारी एफसी के खिलाफ खेले मुकाबले से जुड़ा था। इसमें आरोप लगा कि नामधारी ने एक ऐसे खिलाड़ी को मैदान में उतारा, जो पीले कार्डों के चलते निलंबित था। दूसरा मामला इंटर काशी के विदेशी खिलाड़ी मार्को बार्को (स्पेनिश फॉरवर्ड) के पुन: पंजीकरण से जुड़ा था। विरोधी क्लबों ने आरोप लगाया कि इंटर काशी ने सीजन के बीच विदेशी खिलाड़ियों के नियमों का उल्लंघन किया।
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नामधारी मैच के बाद एआईएफएफ की अनुशासन समिति ने इंटर काशी को सही ठहराते हुए तीन अंक दे दिए। परंतु अपील के बाद एआईएफएफ समिति ने यह फैसला पलट दिया और इंटर काशी के तीन अंक छिन गए। इसके बाद मार्को बार्को मामले में भी अपील समिति ने इंटर काशी के खिलाफ फैसला सुनाया। इन फैसलों के आधार पर एआईएफएफ ने चर्चिल ब्रदर्स एफसी गोवा को चैंपियन घोषित कर दिया।
एआईएफएफ के फैसलों से असंतुष्ट इंटर काशी एफसी ने स्विट्जरलैंड स्थित कोर्ट ऑफ ऑबिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स (सीएएस) का दरवाजा खटखटाया। इंटर काशी ने सीएएस में अपील दायर की। पहली अपील में सीएएस ने नामधारी मैच पर एआईएफएफ अपील समिति का फैसला रद्द कर दिया और इंटर काशी के तीन अंक बहाल कर दिए।
दूसरी अपील में सीएएस ने मार्को बार्को पंजीकरण मामले में भी इंटर काशी के पक्ष में फैसला सुनाया और एआईएफएफ को अपना निर्णय वापस लेने के आदेश दिए। इस मामले में 18 जुलाई 2025 को सीएएस ने अंतिम फैसला सुनाया और इंटर काशी एफसी को आई-लीग का 2024-25 का आधिकारिक चैंपियन घोषित कर दिया। इस दौरान इंटर काशी के 42 अंक, चर्चिल ब्रदर्स के 40 अंक और रियल कश्मीर के 37 अंक पाए गए। सीएएस ने ने एआईएफएफ को दस्तावेजों में संशोधन और इंटर काशी को चैंपियन घोषित करने के आदेश दिए।
फुटबॉल से जुड़े जिले के खिलाड़ियों ने खुशी जाहिर की है। इस दौरान वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पंकज चुघ, नरेंद्र चुघ, नरेन थापा, रणविजय सिंह ने कहा कि इस विवाद ने भारतीय फुटबॉल प्रशासन की कमजोरियों को उजागर किया है। इससे खिलाड़ियों को भारी दिक्कत झेलनी पड़ती है। वहीं, विदेशी खिलाड़ी पंजीकरण और नियमों की अस्पष्टता सामने आई है। यह स्पष्ट हुआ कि सीएएस का फैसला राष्ट्रीय महासंघ से ऊपर होता है। वहीं, यह भविष्य के लिए एक मजबूत कानूनी मिसाल बनी है।
आईएसएल में प्रमोशन और आर्थिक राहत
सुमित जय पासी ने बताया कि चैंपियन बनने के साथ ही इंटर काशी को आईएसएल 2025-26 में प्रमोशन की मंजूरी मिल गई है। सीएएस ने एआईएफएफ को मध्यस्थता खर्च का एक हिस्सा और इंटर काशी के कानूनी खर्च की आंशिक भरपाई करने का आदेश भी दिया। सुमित ने बताया कि चर्चिल ब्रदर्स ने सीएएस फैसले को चुनौती देने की कोशिश की और ट्रॉफी सौंपने से भी इन्कार कर दिया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि, स्विस फेडरल सुप्रीम कोर्ट ने चर्चिल ब्रदर्स की अंतरिम अपील खारिज कर दी, जिससे सीएएस का फैसला अंतिम और बाध्यकारी हो गया।