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Yamuna Nagar News: तत्कालीन जेल अधीक्षक छिब्बर की गिरफ्तारी पर तीन अगस्त तक रोक
Fri, 26 Jun 2026 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 26 Jun 2026 12:40 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। खेड़ी लक्खा सिंह तिहरे हत्याकांड से जुड़े मामले में तत्कालीन जेल अधीक्षक विशाल छिब्बर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।
न्यायमूर्ति विकास बहल की अदालत में विशाल छिब्बर की याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आकाश सिंगला ने विस्तृत स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश की, जिसे रिकॉर्ड का हिस्सा बना लिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि जांच के दौरान विशाल छिब्बर को कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया।
अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि मामले में पांच जून को चालान दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद उनकी गिरफ्तारी का कोई औचित्य नहीं बनता। बचाव पक्ष ने अपने तर्कों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के अमन प्रीत सिंह बनाम सीबीआई और मुशीर आलम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामलों में दिए गए निर्णयों का हवाला दिया।
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वकीलों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई आरोपी जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया गया और उसने जांच में सहयोग किया है तो केवल आरोपपत्र दाखिल होने के आधार पर उसे जेल भेजना जमानत संबंधी स्थापित सिद्धांतों के विपरीत होगा। इससे पहले यमुनानगर की अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने विशाल छिब्बर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
कोर्ट ने अपने आदेश में एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे और मामले की जांच को लेकर गंभीर टिप्पणियां की थीं। अब हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाए जाने से विशाल छिब्बर को अस्थायी राहत मिल गई है। हालांकि मामले में अंतिम फैसला अभी बाकी है और सभी पक्षों की दलीलों पर विचार के बाद हाईकोर्ट अगली सुनवाई में आगे का निर्णय करेगा।
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यमुनानगर। खेड़ी लक्खा सिंह तिहरे हत्याकांड से जुड़े मामले में तत्कालीन जेल अधीक्षक विशाल छिब्बर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।
न्यायमूर्ति विकास बहल की अदालत में विशाल छिब्बर की याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आकाश सिंगला ने विस्तृत स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश की, जिसे रिकॉर्ड का हिस्सा बना लिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि जांच के दौरान विशाल छिब्बर को कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया।
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अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि मामले में पांच जून को चालान दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद उनकी गिरफ्तारी का कोई औचित्य नहीं बनता। बचाव पक्ष ने अपने तर्कों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के अमन प्रीत सिंह बनाम सीबीआई और मुशीर आलम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामलों में दिए गए निर्णयों का हवाला दिया।
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वकीलों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई आरोपी जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया गया और उसने जांच में सहयोग किया है तो केवल आरोपपत्र दाखिल होने के आधार पर उसे जेल भेजना जमानत संबंधी स्थापित सिद्धांतों के विपरीत होगा। इससे पहले यमुनानगर की अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने विशाल छिब्बर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
कोर्ट ने अपने आदेश में एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे और मामले की जांच को लेकर गंभीर टिप्पणियां की थीं। अब हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाए जाने से विशाल छिब्बर को अस्थायी राहत मिल गई है। हालांकि मामले में अंतिम फैसला अभी बाकी है और सभी पक्षों की दलीलों पर विचार के बाद हाईकोर्ट अगली सुनवाई में आगे का निर्णय करेगा।