फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Temples decorated on Mahashivratri, devotees enthusiastic, markets full of hustle bustle

Yamuna Nagar News: महाशिवरात्रि पर सजे मंदिर, भक्तों में उत्साह, बाजार में रही खूब रौनक

Wed, 26 Feb 2025 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 26 Feb 2025 12:39 AM IST
विज्ञापन
Temples decorated on Mahashivratri, devotees enthusiastic, markets full of hustle bustle
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


जगाधरी। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर लोगों में उत्साह पूर्व संध्या से ही देखने को मिला। पर्व को लेकर मंदिरों में चल रही तैयारियां देर रात तक जारी रही। वहीं, पर्व को लेकर बाजार में भी खूब रौनक देखने को मिली। इस दौरान देर शाम तक बाजार गुलजार रहे और लोगों ने पूजन संबंधी सामग्री की खरीदारी की।
पर्व के चलते बाजारों में बेल, बेर, गन्ना, जेनेऊ, फल, फूल, इत्र इत्यादि की लोगों ने जमकर खरीदारी की। अन्य वर्षों की अपेक्षा यह महाशिवरात्रि विशेष है। चूंकि इस बार महाशिवरात्रि पर महासंयोग बन रहा है। चूंकि बुधादित्य योग, त्रिग्रही योग बन रहा है। शिवरात्रि पर तीन ग्रह एक ही राशि में होंगे। यह राशि भगवान शिव की है, जिससे कारण यह संयोग दुर्लभ बन रहा है। यह संयोग करीब 50 साल बाद बन रहा है।
विज्ञापन

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दुर्लभ संयोग में भगवान शिव की उपासना भक्तों को मनोवांच्छित फल देगी। इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, दही, शक्कर, गन्ना, धतूरा इत्यादि चढ़ाने से सभी कष्टों का निवारण होगा। ऐसे में भक्त महाशिवरात्रि का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसे लेकर जिले के तमाम मंदिरों में तैयारियां चल रहीे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

बुधवार को सुबह पांच बजे से जलाभिषेक शुरू होगा। पूरा दिन महादेव की पूजा व जलाभिषेक किया जा सकता है। महाशिवरात्रि को लेकर शहर के सभी मंदिरों में विशेष कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। वहीं, स्वयं-भू शिवलिंग व पौराणिक मंदिरों में इसे लेकर कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं।

इन मंदिरों में जलाभिषेक से पूर्ण होंगे मनोरथ

जिले में स्थित पौराणिक मंदिरों में महादेव का जलाभिषेक करने से भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण होंगे। इन मंदिरों का इतिहास महाभारत काल से भी पहले का बताया जाता है। इन मंदिरों में पांड़वों सहित कई ऋषि-मुनियों ने घोर तपस्या भी की है। बूड़िया स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर में स्वयं-भू शिवलिंग स्थित है। बताया जाता है कि सन् 1985 में यहां जगन्नाथपुरी गोवर्धन पीठ जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ महाराज भी आए थे। उन्होंने यहां पर तप किया था और इस मंदिर को सिद्धपीठ बताया था। भाटली शिव मंदिर में स्वयं-भू शिवलिंग स्थित है। यहां शिवलिंग का जलाभिषक करने के लिए भक्तों की मीलों लंबी लाइन लगती है। यहां पर पांड़वों ने तपस्या की थी। जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए थे। जिसके बाद भगवान शिव यहां ज्योतिरूप में विराजमान हो गए।

इसी तरह कलेसर स्थित कालेश्वर महादेव मठ में भी भगवान स्वयं-भू शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। यहां पर माता पार्वती व भगवान शिव के प्राचीन मंदिर व गुफा हैं। मान्यता है कि यहां पर पांड़वों ने शिव आराधना की थी।अमादलपुर सूर्यकुंड मंदिर में भी भगवान शिव ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हैं। यहां मंदिर में स्वयं-भू शिवलिंग है। महाभारत युद्ध के बाद पांड़वों ने यहां समय बिताया था और भगवान शिव की पूजा की थी। यह उत्तर भारत का एकमात्र सूर्य मंदिर है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed