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138 बच्चों को पढ़ा रहे सिर्फ दो अध्यापक
ब्ूयरो/अमर उजाला, यमुनानगर
Updated Thu, 09 Jul 2015 12:22 AM IST
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स्कूलों की दीवाराें पर लिखा ‘सब पढे़-सब बढ़ें’ का नारा अंदर स्टाफ की कमी में प्रभावित होती पढ़ाई के हालात के मद्देनजर सटीक बैठता नहीं नजर आ रहा है। हाल ही में सरप्लस गेस्ट टीचरों को हटाने के बाद ऐसे कई स्कूल हैं, जहां एक-दो अध्यापकाें पर बच्चाें की पढ़ाई समेत स्कूल के कामकाज का बोझ आ गया है। जिले के गांव जयरामपुर स्थित राजकीय मिडिल स्कूल में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। इधर, हेड सहित दो टीचर ही 138 बच्चों की पढ़ाई और स्कूल का सारे कामकाज का जिम्मा संभाल रहे हैं।
बता दें कि गांव जयरामपुर स्थित सरकारी स्कूल में प्राइमरी में पहले दो गेस्ट टीचर थे, जिन्हें हाल ही में हटा दिया गया। इसके बाद अकेला एक रेगुलर टीचर ही पांच कक्षाओं के 83 बच्चाें को पढ़ाने व स्कूल के अन्य कामकाज का जिम्मा संभाले हुए है। इसी तरह छठी से आठवीं तक के 55 विद्यार्थियाें पर एक ही टीचर है, जो स्कूल के हेड मास्टर का कार्यभार भी संभाल रहे हैं। हेड मास्टर व प्राइमरी कक्षाओं को संभाल रहे रेगुलर टीचर को स्कूल संबंधी कामकाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। इसके अलावा उन्हें स्कूल में भी बिल बनाने के अलावा डाक आदि भी देखनी पड़ती है। ऐसे में स्कूल में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
स्कूल के हेड मास्टर महावीर ने कहा कि छठी से 8वीं तक की कक्षाओं के लिए केवल वे खुद ही एक टीचर है। इसके अलावा बाकी सभी सब्जेक्ट की पोस्ट खाली हैं। उन्हें ऑफिस का काम भी करना पड़ता है, इसके लिए वह कई बार क्लास भी छोड़नी पड़ती है। जबकि पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं के लिए तीन टीचर थे, इनमें दो गेस्ट टीचर थे, जिन्हें हटा दिया गया है। केवल एक रेगुलर टीचर है। कैशबुक लिखने सहित डाक लाने व पहुंचाना भी उनका काम है। अधिकारियों ने कई बार उनके स्कूल की खाली पोस्ट के बारे में जानकारी ली है, लेकिन स्टाफ पूरा नहीं हो पाया।
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सिर्फ मैथ वाले टीचर पढ़ाते, अन्य विषयों की पढ़ाई बाधित
स्कूल की छात्रा रश्मी और सलीना ने कहा कि उन्हें केवल मैथ वाले टीचर ही पढ़ाते हैं। अध्यापकों की कमी में उनकी पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है। स्कूल में सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, अंग्रेजी और हिंदी का कोई अध्यापक नहीं है। इस कारण इन विषयाें की पढ़ाई बाधित हो गई है। छठी से आठवीं तक तीनों क्लासों के बच्चों को एक साथ बैठाकर मैथ वाले मास्टर ही पढ़ाते हैं।
यमुनानगर में 611 प्राइमरी, 349 मिडिल, 58 हाई स्कूल और 53 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इनमें स्टाफ की कमी की समस्या को लेकर सरकार प्रयासरत हैं। जल्द ही रेशनेलाइजेशन के बाद सभी स्कूलों में टीचर तैनात होंगे।
उदय प्रताप, डीईओ, यमुनानगर।
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बता दें कि गांव जयरामपुर स्थित सरकारी स्कूल में प्राइमरी में पहले दो गेस्ट टीचर थे, जिन्हें हाल ही में हटा दिया गया। इसके बाद अकेला एक रेगुलर टीचर ही पांच कक्षाओं के 83 बच्चाें को पढ़ाने व स्कूल के अन्य कामकाज का जिम्मा संभाले हुए है। इसी तरह छठी से आठवीं तक के 55 विद्यार्थियाें पर एक ही टीचर है, जो स्कूल के हेड मास्टर का कार्यभार भी संभाल रहे हैं। हेड मास्टर व प्राइमरी कक्षाओं को संभाल रहे रेगुलर टीचर को स्कूल संबंधी कामकाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। इसके अलावा उन्हें स्कूल में भी बिल बनाने के अलावा डाक आदि भी देखनी पड़ती है। ऐसे में स्कूल में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
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स्कूल के हेड मास्टर महावीर ने कहा कि छठी से 8वीं तक की कक्षाओं के लिए केवल वे खुद ही एक टीचर है। इसके अलावा बाकी सभी सब्जेक्ट की पोस्ट खाली हैं। उन्हें ऑफिस का काम भी करना पड़ता है, इसके लिए वह कई बार क्लास भी छोड़नी पड़ती है। जबकि पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं के लिए तीन टीचर थे, इनमें दो गेस्ट टीचर थे, जिन्हें हटा दिया गया है। केवल एक रेगुलर टीचर है। कैशबुक लिखने सहित डाक लाने व पहुंचाना भी उनका काम है। अधिकारियों ने कई बार उनके स्कूल की खाली पोस्ट के बारे में जानकारी ली है, लेकिन स्टाफ पूरा नहीं हो पाया।
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सिर्फ मैथ वाले टीचर पढ़ाते, अन्य विषयों की पढ़ाई बाधित
स्कूल की छात्रा रश्मी और सलीना ने कहा कि उन्हें केवल मैथ वाले टीचर ही पढ़ाते हैं। अध्यापकों की कमी में उनकी पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है। स्कूल में सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, अंग्रेजी और हिंदी का कोई अध्यापक नहीं है। इस कारण इन विषयाें की पढ़ाई बाधित हो गई है। छठी से आठवीं तक तीनों क्लासों के बच्चों को एक साथ बैठाकर मैथ वाले मास्टर ही पढ़ाते हैं।
यमुनानगर में 611 प्राइमरी, 349 मिडिल, 58 हाई स्कूल और 53 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इनमें स्टाफ की कमी की समस्या को लेकर सरकार प्रयासरत हैं। जल्द ही रेशनेलाइजेशन के बाद सभी स्कूलों में टीचर तैनात होंगे।
उदय प्रताप, डीईओ, यमुनानगर।