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Yamuna Nagar News: शत प्रतिशत परिणाम वाले स्कूलों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य

Tue, 27 Oct 2026 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 27 Oct 2026 01:35 AM IST
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Target to double the number of schools with a 100% pass rate
जिला ​शिक्षा विभाग का दफ्तर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में कमजोर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों के परिणाम सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने नई कार्ययोजना तैयार की है। योजना के तहत शत-प्रतिशत परिणाम वाले स्कूलों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
योजना में स्कूलों के प्रदर्शन की मध्यावधि परीक्षा के परिणामों के आधार पर समीक्षा की जाएगी। स्कूलों को परिणाम के अनुसार लाल, पीली और हरी, तीन श्रेणियों में बांटकर उनकी निगरानी की जाएगी। विभाग ने इस बार शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले स्कूलों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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वहीं विद्यार्थियों के औसत अंकों में बढ़ोतरी करने और शून्य परिणाम वाले स्कूलों की स्थिति सुधारने पर भी जोर दिया जाएगा। योजना के तहत 50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले स्कूल लाल श्रेणी में रखे जाएंगे। इन स्कूलों में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। 50 से 80 प्रतिशत तक परिणाम वाले स्कूल पीली श्रेणी में शामिल होंगे।
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इनके प्रदर्शन की हर महीने समीक्षा की जाएगी। वहीं, 80 प्रतिशत से अधिक परिणाम वाले स्कूल हरी श्रेणी में रखे जाएंगे। इन स्कूलों में अपनाए जा रहे बेहतर शिक्षण तरीकों को दूसरे स्कूलों से साझा किया जाएगा, ताकि कमजोर परिणाम वाले स्कूल भी उनसे सीख लेकर अपनी स्थिति में सुधार कर सकें।
कार्ययोजना में मध्यावधि परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की पहचान कर उनकी विषयवार सूची तैयार करने पर जोर दिया गया है। शिक्षक विद्यार्थियों से बातचीत कर यह पता लगाएंगे कि उन्हें किस विषय को समझने और सवाल हल करने में परेशानी आ रही है।
इसके बाद उनकी जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पढ़ाई करवाई जाएगी। कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं के साथ गर्मियों में विशेष सुधार शिविर लगाने की भी योजना है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के दौरान अभ्यास और विषयों की समझ पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
एक जनवरी से गैर-शैक्षणिक कार्यों से छूट
योजना के अनुसार एक जनवरी से बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने तक 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों तथा उनके शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक गतिविधियों से मुक्त रखने का प्रावधान किया गया है। इस अवधि में शिक्षक मुख्य रूप से अध्यापन और परीक्षा की तैयारी पर ध्यान देंगे। इससे विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम दोहराने, सवालों का अभ्यास करने और अपनी कमजोरियों को दूर करने के लिए अधिक समय मिल सकेगा।

कार्ययोजना का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणाम बढ़ाना ही नहीं, बल्कि कमजोर विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार करना भी है। स्कूलों की नियमित समीक्षा और विषयवार तैयारी के माध्यम से बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। - प्रेमलता बक्शी, जिला शिक्षा अधिकारी।
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