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Yamuna Nagar News: भाटली क्षेत्र में खेत जोतते समय स्वयंभू शिवलिंग के हुए थे दर्शन

Thu, 12 Feb 2026 03:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Thu, 12 Feb 2026 03:26 AM IST
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Swayambhu Shivalinga was seen while plowing the fields in Bhatli area.
स्वयंभू प्राचीन शिव मंदिर भाटली का मुख्य द्वार। संवाद
अशोक कुमार
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यमुनानगर। भाटली स्थित स्वयंभू प्राचीन शिव मंदिर क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है, जो धरती से स्वतः प्रकट हुआ था। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है और समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार कराया जाता रहा है। प्राचीन कथाओं के अनुसार एक किसान को खेत जोतते समय यहां शिवलिंग के दर्शन हुए थे। इसके बाद गांववासियों ने मिलकर इस स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया। उन्होंने बताया कि सावन माह, महाशिवरात्रि और श्रावणी सोमवार को यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
पंडित जितेंद्र शास्त्री ने बताया कि यहां पर शिवरात्रि के दिन कई राज्यों के श्रद्धालु भी पहुंचते हैं और जिसके लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। शिवरात्रि के दिन यहां पर पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल मुख्य अतिथि रहेंगे। यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लाइट, पानी, भंडारे व विश्राम करने की भी व्यवस्था की जा रही है। सोमवार को मंदिर परिसर में सुबह नौ बजे हवन, 12 बजे भोग के बाद भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा। यहां पर स्थित वट वृक्ष को आने वाले श्रद्धालु मन्नत का धागा भी बांधते हैं और मन्नत पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में भंडारे का भी आयोजन करवाते हैं। यहां पर लगने वाली दुकानों से श्रद्धालु प्रसाद आदि लेकर मंदिर परिसर में दर्शन करेंगे। मंदिर कमेटी में 11 सदस्य प्रतिदिन साफ सफाई में अपनी अहम भूमिका अदा करते हैं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस प्रशासन की तरफ से भी यहां पर होमगार्ड के जवानों की तैनाती की जाएगी। संवाद
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मंदिर में पांडवों ने किया था जलाभिषेक
पंडित जितेंद्र शास्त्री ने बताया कि यह मंदिर महाभारत कालीन है और जो कि साढ़े पांच हजार साल पुराना मंदिर है, यहां पर पांडव आए थे जिन्होंने यहां पर बह रही राक्षी नदी से सुबह के समय जलाभिषेक किया था और यहां पर मौजूद वट वृक्ष के नीचे विश्राम किया था। यह स्थान पहले सिंधुवन क्षेत्र के नाम से जाना जाता था, जो प्राचीन काल में धार्मिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता था। यहां पर स्थापित शिवलिंग ज्योति से प्रकट हुआ था । यहां भगवान शिव ने पांडवों को विजय का वरदान दिया था और अंतर्ध्यान हुए तो उनकी ज्योति से शिला बन गई थी। मंदिर परिसर में नियमित रूप से रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और भंडारे का आयोजन होता है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यहां पूजा-अर्चना करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। प्रशासन और स्थानीय समिति मिलकर मंदिर के विकास और सुविधाओं के विस्तार के प्रयास कर रहे हैं।

स्वयंभू प्राचीन शिव मंदिर भाटली का मुख्य द्वार। संवाद

स्वयंभू प्राचीन शिव मंदिर भाटली का मुख्य द्वार। संवाद

स्वयंभू प्राचीन शिव मंदिर भाटली का मुख्य द्वार। संवाद

स्वयंभू प्राचीन शिव मंदिर भाटली का मुख्य द्वार। संवाद

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