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शुगर मिल को किसानों की पेमेंट के लिए सरकार से 45 करोड़ की मदद का इंतजार

Mon, 04 Apr 2016 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर। Updated Mon, 04 Apr 2016 12:41 AM IST
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शुगर मिल - फोटो : yamunanagar
यमुनानगर। देश की सबसे बड़ी शुगर मिलों में शुमार सरस्वती शुगर मिल से जुड़े किसानों को इस बार भी गन्ने की पेमेंट में ब्रेक लग सकता है। मिल में गन्ना की पिराई खत्म होने वाली है, लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार ने मिल को तय फार्मूले के तहत पेमेंट के लिए अपना करीब 42 करोड़ का शेयर नहीं दिया है। इस पेमेंट में देरी का खामियाजा करीब 22 हजार किसानों को भुगतान पड़ सकता है।
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सरस्वती शुगर मिल में गन्ने की पिराई अपने अंतिम चरण में है। मिल क्षेत्र में गन्ना लगभग समाप्त होने की कगार है। इस कारण प्रशासन ने पांच अप्रैल को मिल में गन्ना पिराई बंद करने का फैसला लिया है। इस बार भी किसानों को गन्ने की पेमेंट के लिए मिल प्रशासन प्रदेश सरकार से मिलने वाली रकम का इंतजार कर रहा है। लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी अब तक सरकार की ओर से मिल को एक पैसा भी नहीं मिला है। इससे मिल के किसानों को समय पर गन्ने की पेमेंट मिलना मुश्किल हो गया है। मिल अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश सरकार द्वारा अपना शेयर समय पर न देने के बावजूद मिल प्रशासन अपने संसाधनों से किसानों को समय पर पेमेंट करता रहा है। अब तक सरकार का शेयर न मिलने से आगे किसानों को गन्ने की पेमेंट में देरी हो सकती है। पांच अप्रैल को मिल बंद होने तक यह शेयर करीब 45 करोड़ रुपये हो जाएगा। मिल अधिकारियों के मुताबिक 12 मार्च को इस बारे में उनकी कृषि मंत्री के साथ मीटिंग भी हुई थी, लेकिन अभी तक केवल आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला है।
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- पेमेंट में देरी होने पर पिछले साल भी सरकार ने की थी आर्थिक मदद
चीनी के दामों में आई गिरावट व बदहाल आर्थिक स्थिति के चलते शुगर मिलों द्वारा किसानों को गन्ने की पेमेंट में पिछले सीजन में भी दिक्कत आई थी। तब सरस्वती शुगर मिल प्रशासन ने बिना सरकारी मदद के किसानों को भुगतान कर पाने में असमर्थता जता दी थी। गन्ने का भुगतान न होने पर किसान सड़कों पर उतर आए थे। किसानों ने शुगर मिल परिसर में भी धरना-प्रदर्शन किया था। शुगर मिल प्रशासन व प्रदेश सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद प्रदेश सरकार मिल को तय शर्तों पर कुछ रकम लोन के रूप में देने पर तैयार हुई थी। बीते सीजन में बनाए गए फार्मले के तहत इस बार भी प्रदेश सरकार की ओर से मिल को रकम मुहैया करवाई जानी थी, लेकिन मिल में गन्ना पिराई शुरू होने के बाद अभी तक सरकार ने मिल को अपना शेयर उपलब्ध नहीं करवाया है।
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- मिल से जुड़े हैं तीन जिलों के 25 हजार किसान
सरस्वती शुगर मिल के साथ यमुनानगर के अलावा अंबाला और कुरुक्षेत्र जिलों के करीब 25 हजार किसान जुड़े हुए हैं। यह मिल एशिया की सबसे बड़ी मिलों में एक है। मिल में प्रतिदिन एक लाख क्विटंल गन्न पिराई की क्षमता है।


वर्जन :::::::
अब तक हम अपने स्तर पर किसानों को गन्ने की पेमेंट करते रहे है। तय फार्मूले के तहत प्रदेश सरकार का श्ेायर अभी तक नहीं मिल पाया है। मिल में गन्ने की पिराई समाप्त होने तक यह शेयर करीब 45 करोड़ रुपये हो जाएगा। यदि ये पेमेंट न हुई तो किसानों को समय पर पेमेंट करना मुश्किल हो जाएगा।
डीपी सिंह, सीनियर वाइस प्रेजीडेंट, सरस्वती शुगर मिल।
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