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मिड डे मिल बनना शुरू : विद्यार्थियों ने दलिया, कढ़ी-चावल और खाई खीर
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अब घर नहीं स्कूल की ही रसोई में पका मिड डे मिल विद्यार्थियों को खाने के लिए मिलने लगा है। इसकी शुरूआत शुक्रवार को हो चुकी। ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के एक माह बाद खुले स्कूल में पहले दिन पहली से आठवीं तक विद्यार्थियों को दलिया, कढ़ी व नमकीन चावल और खीर खाने को मिली। दरअसल, कोरोना काल के चलते स्कूल में मिड डे मिल बनाने पर रोक लगा दी गई थी। परंतु जब स्थिति दुरुस्त हुई तो सरकार ने भी जिले के लिए 54 हजार बच्चों के लिए दो करोड़ का बजट मिड डे मिल के लिए जारी कर दिया है। ऐसे में अब रोजाना विद्यार्थियों को मेन्यू के अनुसार ही खाने को पकवान मिलेगा।
बता दें दो साल पूर्व कोरोना के बढ़ते केसों को देखते हुए स्कूल की रसोई में बनने वाले मिड डे मिल पर रोक लगा दी थी। इसकी जगह पर बच्चों के हिस्से की खाद्य सामग्री घरों पर सप्लाई शुरू कर दी थी। 20 प्रकार की मेन्यू के अनुसार ही अब मिड डे मिल स्कूल में दोबारा शुरू किया गया। वहीं सरकार की ओर से विभाग को पाक लागत जारी कर दी है। सरकार की ओर दो श्रेणियों में लागत विभाजित की है। मिड-डे-मील पकाने के लिए प्राइमरी व मिडल दो श्रेणियों में विद्यार्थियों को बांटा गया है। पहली से पांचवीं तक प्राइमरी के बच्चों को प्रतिदिन सौ ग्राम और छठी से आठवीं के बच्चों को डेढ़ सौ ग्राम पौष्टिक भोजन दिया जाना है। इसके हिसाब से प्राइमरी के एक बच्चे का खाना बनाने के लिए 4.97 रुपये और मिडल के लिए 7.45 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
मिड डे मिल का बजट जारी होते ही स्कूल की रसोई में राशन बनाना शुरू हो गया है। पहले दिन बच्चों को दलिया, कढ़ी व नमकीन चावल के अलावा खीर व अन्य सामग्री बनाई गई है। मिड डे मिल के लिए 20 प्रकार का मेन्यू है जिसे मौसम के अनुसार बनाया जा सकता है।
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-पिरथी सैनी, उप जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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बता दें दो साल पूर्व कोरोना के बढ़ते केसों को देखते हुए स्कूल की रसोई में बनने वाले मिड डे मिल पर रोक लगा दी थी। इसकी जगह पर बच्चों के हिस्से की खाद्य सामग्री घरों पर सप्लाई शुरू कर दी थी। 20 प्रकार की मेन्यू के अनुसार ही अब मिड डे मिल स्कूल में दोबारा शुरू किया गया। वहीं सरकार की ओर से विभाग को पाक लागत जारी कर दी है। सरकार की ओर दो श्रेणियों में लागत विभाजित की है। मिड-डे-मील पकाने के लिए प्राइमरी व मिडल दो श्रेणियों में विद्यार्थियों को बांटा गया है। पहली से पांचवीं तक प्राइमरी के बच्चों को प्रतिदिन सौ ग्राम और छठी से आठवीं के बच्चों को डेढ़ सौ ग्राम पौष्टिक भोजन दिया जाना है। इसके हिसाब से प्राइमरी के एक बच्चे का खाना बनाने के लिए 4.97 रुपये और मिडल के लिए 7.45 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
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मिड डे मिल का बजट जारी होते ही स्कूल की रसोई में राशन बनाना शुरू हो गया है। पहले दिन बच्चों को दलिया, कढ़ी व नमकीन चावल के अलावा खीर व अन्य सामग्री बनाई गई है। मिड डे मिल के लिए 20 प्रकार का मेन्यू है जिसे मौसम के अनुसार बनाया जा सकता है।
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-पिरथी सैनी, उप जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।