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हड़ताली बैंक कर्मियों ने निकाला जुलूस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Dec 2021 01:18 AM IST
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Striking bank workers took out procession, Yamunanagar
निजीकरण की नीति के विरोध में जुलूस निकालते बैंक कर्मचारी। संवाद - फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर दूसरे दिन शुक्रवार को भी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। हड़ताल के कारण जिले के सभी सरकारी बैंक बंद रहे। इससे जिले का करीब छह सौ करोड़ रुपये का कारोबार ठप रहा। हड़ताली बैंक कर्मियों ने शहर में जुलूस निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
कर्मचारियों ने रेलवे रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक और वर्कशॉप रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया के सामने रोष प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बैंकों का निजीकरण नीति रद्द करने की मांग की। फोरम के नेता और पदाधिकारी सुबह दस बजे ही बैंक के बाहर पहुंच गए। सुबह 11 बजे तक धरना स्थल पर सैकड़ों कर्मचारी एकत्र हो गए। हाथ में बैनर, पोस्टर, स्लोगन लेकर कर्मचारियों ने धरना स्थल से शहीद भगत सिंह चौक तक जुलूस निकाला।
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भारतीय स्टेट बैंक के बाहर कर्मचारियों को संबोधित करते हुए प्रधान निरोत्तम अग्रवाल ने कहा कि सरकार बैंकों का निजीकरण करना चाहती है। ऐसा करने से देश की 90 प्रतिशत पूंजी पर एक ही वर्ग का अधिकार हो जाएगा। 52 साल पहले जुलाई 1969 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश के 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था। बैंकों का राष्ट्रीयकरण होने के बाद देश की विकास का पहिया तेजी से दौड़ने लगा। बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद देश धन और धान्य के मामले में आत्मनिर्भर हो गया।
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राजीव शर्मा ने कहा कि सभी बैंक मुनाफे में है। इससे सरकार को भारी राजस्व मिल रहा है। सरकार ने अपना निर्णय नहीं बदला तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जा सकते हैं। कर्मचारियों का यह विरोध निर्णय वापस लिए जाने तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संसद में लाए जा रहे बैंक संशोधन बिल 2021 का वे पुरजोर विरोध करेंगे।

कारोबार ठप, एटीएम हुए खाली
दो दिन की हड़ताल से शहर के 60 प्रतिशत एटीएम में नकदी खत्म होने के कारण लोगों परेशानी झेलनी पड़ी। जिले के कुल 179 एटीएम में से करीब एक सौ पर नकदी खत्म हो गई। रुपये निकलवाने के लिए लोगों को एक से दूसरे एटीएम तक दौड़ लगानी पड़ी। ऐसे में लोगों को निजी बैंकों के एटीएम का सहारा लेना पड़ा। इसके अलावा सबसे ज्यादा परेशानी थोक कारोबारियों को हुई। बाजार से उगाही तो हुई पर बैंक में रुपये जमा न होने के कारण उन्हें नकदी की सुरक्षा की चिंता सताने लगी। इसके अलावा अन्य बैंकिंग सेवाओं के लिए लोगों को परेशान होना पड़ा।
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