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Yamuna Nagar News: डगमगाते उद्योग, उद्यमियों को बजट से राहत की आस
Sun, 21 Jul 2024 03:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 21 Jul 2024 03:17 AM IST
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अभय सिंह
जगाधरी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को केंद्र का पूर्णकालिक बजट पेश करेंगी। इस बजट से जहां हर वर्ग की नजर है, वहीं ट्विन सिटी के डगमगाते उद्योग को बड़ी उम्मीद की आस है। शहर की विश्व विख्यात बर्तन व प्लाईवुड उद्योगों को भी सरकार से राहत की आस है।
इन दिनों दोनों उद्योग मंदी के संकट से जूझ रहे हैं। टैक्स के कारण उत्पादन महंगा होगा है, जिससे मैटल उत्पादों के दाम बढ़ गए हैं। जगाधरी शहर का बर्तन उद्योग विश्व भर में मशहूर है। यहां पर एक्सपोर्ट क्वालिटी के बर्तन बनते हैं और विश्व के विभिन्न देशों में सप्लाई किए जाते हैं। वहीं देशभर में स्टील के बर्तन के लिए जगाधरी का विशेष नाम है।
कुछ साल से इसमें काफी मंदी आई है। जगाधरी शहर में बर्तन उद्योग की छोटी बड़ी करीब 1200 इकाइयां हैं। जिसमें करीब 800 से 850 इकाइयां छोटी और सामान्य स्तर की हैं। जबकि करीब 350 से 400 इकाइयां बड़े स्तर पर बर्तन उत्पादन करती हैं। इन ईकाइयों में प्रतिदिन करीब दो सौ टन बर्तन बनता है।
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यहां पर बने दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, बंगाल, उड़ीसा, कर्नाटक, चेन्नई सहित देश के लगभग सभी राज्यों में जाता है। इसके अलावा अफ्रीका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, आस्ट्रिया, दुबई, कुवैत सहित कई देशों में माल जाता है। परंतु सरकार के नियमों व कर से जगाधरी के बर्तनों की चमक फीकी हो रही है।
कच्चे के साथ तैयार माल पर जीएसटी के कारण इसके दामों में भारी वृद्धि हुई हैं। महंगे होने के कारण लोग स्टील, पीतल, एल्युमीनियम इत्यादि धातु के बर्तन खरीदने से परहेज कर रहे हैं। जिससे बर्तन उद्योग मंदी का झेल रहा है। इसके चलते यहां पर उत्पादन में करीब 20 से 25 फीसदी की कमी आई है।
बर्तन उद्योगपति अनिल अरोड़ा, सुभाष अरोड़ा, देवेंद्र सिंह सहित अन्यों ने बताया कि कच्चे माल पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। जबकि तैयार बर्तन पर 12 प्रतिशत जीएसटी है। दोनों मिलाकर 30 प्रतिशत जीएसटी लग रही है। इस बार बजट से व्यापारियों को भारी उम्मीद है। व्यापारियों की मांग है कि बर्तन पर पांच प्रतिशत तक जीएसटी निर्धारित की जाए। वहीं उद्योगों को बूस्ट देने के लिए नियमों में ढिलाई की जाए। संवाद
बजट में सरकार दे राहत
दी जगाधरी मेटल मैन्युफेक्चर्स एंड सप्लायर एसोसिएशन के महासचिव सुंदर लाल बतरा ने कहा कि सरकार कर में उद्योगों को राहत दे। कई प्रदेशों की सरकार ने बर्तन उद्योग के लिए विशेष योजनाएं बनाई है। इस बार उम्मीद है कि सरकार बजट में उनके राहत पैकेज दे। विशेष प्रावधान कर बर्तन उद्योगों के साथ उद्यमियों को राहत पहुंचाए। सरकार की राहत के बिना जगाधरी का मेटल उद्योग उठ नहीं सकता है।
जीएसटी में की जाए कमी
व्यापारी विभोर पहुजा ने कहा कि जगाधरी की पहचान बर्तन कारोबार के कारण है। परंतु कुछ सालों से शहर का विश्व प्रसिद्ध उद्योग मंदी की मार झेल रहा है। इसका कारण नियमों में सख्ती व जीएसटी है। व्यापारी बर्तन पर जीएसटी कम करने की मांग कई बार कर चुके हैं। इस बजट में भी व्यापारियों को मेटल उद्योग पर एसजीएस में राहत की आस है। वहीं जीएसटी नियमों को भी सरल बनाया जाए।
प्लाईवुड उद्योग को संजीवनी की दरकार
हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रधान जेके बिहानी ने कहा कि बजट में सरकार को प्लाईवुड उद्योग के लिए विशेष प्रावधान करना चाहिए। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत जीएसटी की है। सरकार को जीएसटी की प्रक्रिया सरल बनानी चाहिए। वहीं जीएसटी कम कर उद्योगों को राहत देनी चाहिए। एमएसएमई में विशेष प्रावधान कर उद्यमियों व उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए।
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जगाधरी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को केंद्र का पूर्णकालिक बजट पेश करेंगी। इस बजट से जहां हर वर्ग की नजर है, वहीं ट्विन सिटी के डगमगाते उद्योग को बड़ी उम्मीद की आस है। शहर की विश्व विख्यात बर्तन व प्लाईवुड उद्योगों को भी सरकार से राहत की आस है।
इन दिनों दोनों उद्योग मंदी के संकट से जूझ रहे हैं। टैक्स के कारण उत्पादन महंगा होगा है, जिससे मैटल उत्पादों के दाम बढ़ गए हैं। जगाधरी शहर का बर्तन उद्योग विश्व भर में मशहूर है। यहां पर एक्सपोर्ट क्वालिटी के बर्तन बनते हैं और विश्व के विभिन्न देशों में सप्लाई किए जाते हैं। वहीं देशभर में स्टील के बर्तन के लिए जगाधरी का विशेष नाम है।
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कुछ साल से इसमें काफी मंदी आई है। जगाधरी शहर में बर्तन उद्योग की छोटी बड़ी करीब 1200 इकाइयां हैं। जिसमें करीब 800 से 850 इकाइयां छोटी और सामान्य स्तर की हैं। जबकि करीब 350 से 400 इकाइयां बड़े स्तर पर बर्तन उत्पादन करती हैं। इन ईकाइयों में प्रतिदिन करीब दो सौ टन बर्तन बनता है।
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यहां पर बने दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, बंगाल, उड़ीसा, कर्नाटक, चेन्नई सहित देश के लगभग सभी राज्यों में जाता है। इसके अलावा अफ्रीका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, आस्ट्रिया, दुबई, कुवैत सहित कई देशों में माल जाता है। परंतु सरकार के नियमों व कर से जगाधरी के बर्तनों की चमक फीकी हो रही है।
कच्चे के साथ तैयार माल पर जीएसटी के कारण इसके दामों में भारी वृद्धि हुई हैं। महंगे होने के कारण लोग स्टील, पीतल, एल्युमीनियम इत्यादि धातु के बर्तन खरीदने से परहेज कर रहे हैं। जिससे बर्तन उद्योग मंदी का झेल रहा है। इसके चलते यहां पर उत्पादन में करीब 20 से 25 फीसदी की कमी आई है।
बर्तन उद्योगपति अनिल अरोड़ा, सुभाष अरोड़ा, देवेंद्र सिंह सहित अन्यों ने बताया कि कच्चे माल पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। जबकि तैयार बर्तन पर 12 प्रतिशत जीएसटी है। दोनों मिलाकर 30 प्रतिशत जीएसटी लग रही है। इस बार बजट से व्यापारियों को भारी उम्मीद है। व्यापारियों की मांग है कि बर्तन पर पांच प्रतिशत तक जीएसटी निर्धारित की जाए। वहीं उद्योगों को बूस्ट देने के लिए नियमों में ढिलाई की जाए। संवाद
बजट में सरकार दे राहत
दी जगाधरी मेटल मैन्युफेक्चर्स एंड सप्लायर एसोसिएशन के महासचिव सुंदर लाल बतरा ने कहा कि सरकार कर में उद्योगों को राहत दे। कई प्रदेशों की सरकार ने बर्तन उद्योग के लिए विशेष योजनाएं बनाई है। इस बार उम्मीद है कि सरकार बजट में उनके राहत पैकेज दे। विशेष प्रावधान कर बर्तन उद्योगों के साथ उद्यमियों को राहत पहुंचाए। सरकार की राहत के बिना जगाधरी का मेटल उद्योग उठ नहीं सकता है।
जीएसटी में की जाए कमी
व्यापारी विभोर पहुजा ने कहा कि जगाधरी की पहचान बर्तन कारोबार के कारण है। परंतु कुछ सालों से शहर का विश्व प्रसिद्ध उद्योग मंदी की मार झेल रहा है। इसका कारण नियमों में सख्ती व जीएसटी है। व्यापारी बर्तन पर जीएसटी कम करने की मांग कई बार कर चुके हैं। इस बजट में भी व्यापारियों को मेटल उद्योग पर एसजीएस में राहत की आस है। वहीं जीएसटी नियमों को भी सरल बनाया जाए।
प्लाईवुड उद्योग को संजीवनी की दरकार
हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रधान जेके बिहानी ने कहा कि बजट में सरकार को प्लाईवुड उद्योग के लिए विशेष प्रावधान करना चाहिए। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत जीएसटी की है। सरकार को जीएसटी की प्रक्रिया सरल बनानी चाहिए। वहीं जीएसटी कम कर उद्योगों को राहत देनी चाहिए। एमएसएमई में विशेष प्रावधान कर उद्यमियों व उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए।