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प्रवचन से नहीं शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने से होगा समाज का भला : निर्मल दास
Wed, 13 May 2026 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 13 May 2026 12:20 AM IST
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संत सम्मेलन में पहुंचे अतिथियों का स्वागत करते आयोजक। प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
सरस्वतीनगर। श्री गुरु रविदास आश्रम सुखनगरी में ब्रह्मलीन संत रामदास महाराज की पुण्य स्मृति में 13वां संत सम्मेलन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि संत निर्मल दास ने कहा कि केवल प्रवचन देने से समाज का भला नहीं होगा, बल्कि समाज और बच्चों की शिक्षा के लिए कार्य करने वालों को ही बोलने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज देशभर में गुरु रविदास जी महाराज की वाणी का प्रचार-प्रसार हो रहा है, लेकिन फिर भी कुछ लोग अपने गुरुओं और रहबरों को छोड़ अन्य मार्गों की ओर जा रहे हैं, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संतों और वक्ताओं को मंच की गरिमा बनाए रखते हुए निर्धारित समय में अपने विचार रखने चाहिए।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गुरु रविदास जी और बाबा साहेब के विचारों पर वही व्यक्ति बोले, जो स्वयं उनके बताए मार्ग पर चलता हो।
कार्यक्रम का आयोजन गद्दीनशीन संत रामकृष्ण दास बलाना की अगुवाई में किया गया। कार्यक्रम महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञाननाथ महाराज की देखरेख में हुआ। कार्यक्रम में ज्योति प्रचंड आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. गीता बेनीवाल ने की। उन्होंने उपस्थित संगत को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु रविदास महाराज और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की बदौलत समाज को शिक्षा और सम्मान का मार्ग मिला है।
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उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को शिक्षित करने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि मन चंगा तो कठौती में गंगा का संदेश जीवन में अपनाने की जरूरत है। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रहने और समाज की गरिमा बनाए रखने की प्रेरणा दी।
संत रामकृष्ण दास बलाना ने कार्यक्रम में पहुंचे संतों, अतिथियों को सम्मानित किया। संगत के लिए भंडारे का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर संत राम सिंह झरमड़ी, संत सतपाल दास चाहड़वाला, संत बलबीर दास, संत अशोकानंद,आश्रम सभा के प्रधान संजीव कुमार, उपप्रधान अमर सिंह फौजी, कोषाध्यक्ष कर्म चंद सुखनगरी, सचिव संजीव छछरौली मौजूद रहे।
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सरस्वतीनगर। श्री गुरु रविदास आश्रम सुखनगरी में ब्रह्मलीन संत रामदास महाराज की पुण्य स्मृति में 13वां संत सम्मेलन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि संत निर्मल दास ने कहा कि केवल प्रवचन देने से समाज का भला नहीं होगा, बल्कि समाज और बच्चों की शिक्षा के लिए कार्य करने वालों को ही बोलने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज देशभर में गुरु रविदास जी महाराज की वाणी का प्रचार-प्रसार हो रहा है, लेकिन फिर भी कुछ लोग अपने गुरुओं और रहबरों को छोड़ अन्य मार्गों की ओर जा रहे हैं, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संतों और वक्ताओं को मंच की गरिमा बनाए रखते हुए निर्धारित समय में अपने विचार रखने चाहिए।
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उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गुरु रविदास जी और बाबा साहेब के विचारों पर वही व्यक्ति बोले, जो स्वयं उनके बताए मार्ग पर चलता हो।
कार्यक्रम का आयोजन गद्दीनशीन संत रामकृष्ण दास बलाना की अगुवाई में किया गया। कार्यक्रम महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञाननाथ महाराज की देखरेख में हुआ। कार्यक्रम में ज्योति प्रचंड आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. गीता बेनीवाल ने की। उन्होंने उपस्थित संगत को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु रविदास महाराज और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की बदौलत समाज को शिक्षा और सम्मान का मार्ग मिला है।
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उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को शिक्षित करने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि मन चंगा तो कठौती में गंगा का संदेश जीवन में अपनाने की जरूरत है। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रहने और समाज की गरिमा बनाए रखने की प्रेरणा दी।
संत रामकृष्ण दास बलाना ने कार्यक्रम में पहुंचे संतों, अतिथियों को सम्मानित किया। संगत के लिए भंडारे का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर संत राम सिंह झरमड़ी, संत सतपाल दास चाहड़वाला, संत बलबीर दास, संत अशोकानंद,आश्रम सभा के प्रधान संजीव कुमार, उपप्रधान अमर सिंह फौजी, कोषाध्यक्ष कर्म चंद सुखनगरी, सचिव संजीव छछरौली मौजूद रहे।