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Yamuna Nagar News: रघुकुल रीत निभाने को सीता ने लांघी लक्ष्मण रेखा
Tue, 08 Oct 2024 04:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 08 Oct 2024 04:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री रामलीला ड्रामेटिक क्लब छलौर की ओर से आयोजित रामलीला में कलाकारों ने सीता हरण का प्रसंग दर्शाया गया। रामलीला का शुभारंभ विरेंद्र गुर्जर ने पूजन के साथ किया। वहीं हनुमान जी की झांकी का शुभारंभ अमेरिका में पीआर हुए गांव के रविपाल की माता बबली देवी व उनकी त्नी रेखा देवी ने परिवार सहित संयुक्त रूप से किया। आयोजकों की ओर से उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
रामलीला के पहले सीन में दिखाया गया कि रावण अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए मारीच को पंचवटी के समीप एक स्वर्ण मृग का भेष बदल कर भेजता है। माता सीता जब स्वर्ण मृग को देखतीं हैं तो वह उसे पकड़ने के लिए श्रीराम को भेजती हैं। राम मायावी मृग के पीछे दौड़ते हैं। तभी सीता को राम की आवाज सुनाई दी की भैया लक्ष्मण मुझे बचाओ, मेरी जान खतरे में हैं।
चिंतित सीता ने लक्ष्मण को श्रीराम की रक्षा के लिए जाने को कहा। जाने से पहले लक्ष्मण ने पंचवटी के आगे सीता माता की सुरक्षा को लेकर एक लक्ष्मण रेखा खींच दी और सीता माता से कहा कि आप इसका उल्लंघन नहीं करेंगी। लक्ष्मण श्रीराम की रक्षा के लिए वन की ओर चले जाते है। लक्ष्मण के जाने के बाद रावण साधु का भेष रखकर पंचवटी में भिक्षा लेने के लिए पहुंच जाता है।
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सीता माता अंदर से ही भिक्षा देना चाहती हैं। साधु बना रावण अंदर से भिक्षा लेने से मना कर देता है। बिना भिक्षा लिए ही जाने लगता है। तभी सीता रघुकुल की रीत को निभाते हुए साधु को अपने दरवाजे से खाली हाथ नहीं जाने देना चाहती। उन्होंने लक्ष्मण रेखा को पार कर भिक्षा देने का निर्णय लिया और पंचवटी से बाहर निकल गई।
सीता के लक्ष्मण रेखा पार करते ही रावण ने सीता का हरण कर लिया। जंगलों में जब रावण सीता का हरण कर ले जा रहे थे तो रास्ते में सीता की चीख पुकार सुनकर जटायु सीता को छुड़ाने की कोशिश करता है। रावण जटायु के पंख काट उसे जख्मी कर देता है। जब राम लक्ष्मण पंचवटी में पहुंचे तो वहां सीता को न देख वह विलाप करते हैं।
यह दृश्य देख कर दर्शकों की आंखें नम हो गई। राम- लक्ष्मण सीता की खोज करते हुए वनों में विचरण कर रहे थे जंगलों में उनकी मुलाकात जटायु से होती है। वे श्री राम, लक्ष्मण को आपबीती सुनाते हैं। जटायु उन्हें बताता है कि रावण सीता का हरण कर ले गया है और अपने प्राण त्याग देता हैं। इस मौके पर शिवदत्त कांबोज, रविंद्र कश्यप, वंश कश्यप, कृष्ण, यश, प्रवीण कश्यप, जयप्रकाश, संजय कश्यप, शिवकुमार, रिंकू, सतीश, कुलवंत, रोणकी राम, रामपाल, कंवरपाल, मदनपाल मौजूद रहे।
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बिलासपुर। श्री रामलीला ड्रामेटिक क्लब छलौर की ओर से आयोजित रामलीला में कलाकारों ने सीता हरण का प्रसंग दर्शाया गया। रामलीला का शुभारंभ विरेंद्र गुर्जर ने पूजन के साथ किया। वहीं हनुमान जी की झांकी का शुभारंभ अमेरिका में पीआर हुए गांव के रविपाल की माता बबली देवी व उनकी त्नी रेखा देवी ने परिवार सहित संयुक्त रूप से किया। आयोजकों की ओर से उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
रामलीला के पहले सीन में दिखाया गया कि रावण अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए मारीच को पंचवटी के समीप एक स्वर्ण मृग का भेष बदल कर भेजता है। माता सीता जब स्वर्ण मृग को देखतीं हैं तो वह उसे पकड़ने के लिए श्रीराम को भेजती हैं। राम मायावी मृग के पीछे दौड़ते हैं। तभी सीता को राम की आवाज सुनाई दी की भैया लक्ष्मण मुझे बचाओ, मेरी जान खतरे में हैं।
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चिंतित सीता ने लक्ष्मण को श्रीराम की रक्षा के लिए जाने को कहा। जाने से पहले लक्ष्मण ने पंचवटी के आगे सीता माता की सुरक्षा को लेकर एक लक्ष्मण रेखा खींच दी और सीता माता से कहा कि आप इसका उल्लंघन नहीं करेंगी। लक्ष्मण श्रीराम की रक्षा के लिए वन की ओर चले जाते है। लक्ष्मण के जाने के बाद रावण साधु का भेष रखकर पंचवटी में भिक्षा लेने के लिए पहुंच जाता है।
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सीता माता अंदर से ही भिक्षा देना चाहती हैं। साधु बना रावण अंदर से भिक्षा लेने से मना कर देता है। बिना भिक्षा लिए ही जाने लगता है। तभी सीता रघुकुल की रीत को निभाते हुए साधु को अपने दरवाजे से खाली हाथ नहीं जाने देना चाहती। उन्होंने लक्ष्मण रेखा को पार कर भिक्षा देने का निर्णय लिया और पंचवटी से बाहर निकल गई।
सीता के लक्ष्मण रेखा पार करते ही रावण ने सीता का हरण कर लिया। जंगलों में जब रावण सीता का हरण कर ले जा रहे थे तो रास्ते में सीता की चीख पुकार सुनकर जटायु सीता को छुड़ाने की कोशिश करता है। रावण जटायु के पंख काट उसे जख्मी कर देता है। जब राम लक्ष्मण पंचवटी में पहुंचे तो वहां सीता को न देख वह विलाप करते हैं।
यह दृश्य देख कर दर्शकों की आंखें नम हो गई। राम- लक्ष्मण सीता की खोज करते हुए वनों में विचरण कर रहे थे जंगलों में उनकी मुलाकात जटायु से होती है। वे श्री राम, लक्ष्मण को आपबीती सुनाते हैं। जटायु उन्हें बताता है कि रावण सीता का हरण कर ले गया है और अपने प्राण त्याग देता हैं। इस मौके पर शिवदत्त कांबोज, रविंद्र कश्यप, वंश कश्यप, कृष्ण, यश, प्रवीण कश्यप, जयप्रकाश, संजय कश्यप, शिवकुमार, रिंकू, सतीश, कुलवंत, रोणकी राम, रामपाल, कंवरपाल, मदनपाल मौजूद रहे।