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Yamuna Nagar News: कर्मचारियों की कमी, कैसे लड़ेंगे मलेरिया, डेंगू से जंग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Apr 2024 06:13 AM IST
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Shortage of staff, how to fight malaria and dengue?
यमुनानगर। हर साल जिले में डेंगू के केस मिलते हैं। डेंगू पर काबू पाने के लिए लोगों से तो सहयोग की अपील की जाती है लेकिन खुद स्वास्थ्य विभाग के पास इससे निपटने के लिए संसाधन नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के जिन कर्मचारियों को डेंगू व मलेरिया से जंग लड़ते हुए इन पर शिकंजा कसना है वह खुद ही मैदान छोड़ कर जा चुके हैं।
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दरअसल जिले में भर्ती होकर जो मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर (एमपीएचडब्ल्यू) और मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर (एमपीएचएस) आए थे वह खुद की ट्रांसफर करवा कर अपने गृह जिलों में लौट गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना कर्मचारियों के स्वास्थ्य विभाग डेंगू से कैसे निपटेगा।
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जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास एमपीएचडब्ल्यू के कुल 123 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 100 पद खाली हैं। इसी तरह एमपीएचएस के 26 में से 24 पद खाली हैं। एमपीएचएस में केवल दो कर्मचारी ही बचे हैं। इनमें से भी एक की ड्यूटी अन्य कार्यों में लगा रखी है। एमपीएचडब्ल्यू व एमपीएचएस के पदों पर ज्यादातर कर्मचारी रोहतक, भिवानी, सिरसा समेत अन्य जिलों के भर्ती हुए थे। अब यह कर्मचारी यहां वहां से सिफारिशें लगवा कर अपने-अपने गृह जिलों में वापस लौट गए।
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मुख्यालय ने इनकी ट्रांसफर तो कर दी लेकिन इसका खामियाजा अब जिले के लोग भुगत रहे हैं। एमपीएचडब्ल्यू फील्ड में रह कर डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए कार्य करते हैं। यहां तक की लोगों को जागरूक करना, चेकिंग व तालाबों में गंबूसिया मछली छोड़ने समेत अन्य कार्य इन्हीं को करना होता है। इसी तरह एमपीएचएस द्वारा एमपीएचडब्ल्यू के कार्यों पर निगरानी रखी जाती है की वह अपना काम ठीक से कर रहे हैं या नहीं।
वर्ष 2023 में जिले में डेंगू के 735 केस मिले थे। जबकि 2022 में 932 केस मिले थे। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीजन में डेंगू किस तरह से पांव पसारता है। मलेरिया के मामलों में राहत की बात यह है कि दो साल से केवल एक-एक केस ही मिल रहा है।


डेंगू से निपटने को करनी होगी ज्यादा मशक्कत:
स्वास्थ्य विभाग को इस बार जिले में डेंगू से निपटने के लिए ज्यादा मशक्कत करनी होगी, क्योंकि लोकसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगी हुई है। इतनी जल्दी उक्त पदों पर कोई भर्ती हो नहीं सकती और न ही इतनी जल्दी ट्रांसफर करवा कर लौटे कर्मचारी वापस लौटने वाले हैं। इन पदों के रिक्त होने पर मुख्यालय को अवगत भी कराया गया, लेकिन वहां से अभी तक राहत वाला कोई आश्वासन नहीं मिला है। ऐसे में जो है, जैसा है उसी से काम चलाना पड़ेगा।


कर्मचारी वापस लौट गए हैं : सुशीला सैनी
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि जिले में एमपीएचडब्ल्यू के 100 व एमपीएचएस के 24 पद खाली हैं। ज्यादातर कर्मचारी दूसरे जिलों के थे जो ट्रांसफर करवा कर या डेपुटेशन पर लौट गए हैं। इन पदों के रिक्त होने बारे मुख्यालय को अवगत कराया हुआ है।


यमुनानगर में आठ साल में डेंगू व मलेरिया के केस:

साल डेंगू मलेरिया
2016 65 508
2017 70 266
2018 42 97
2019 51 21
2020 36 03
2021 241 04
2022 932 01
2023 735 01
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