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Yamuna Nagar News: शुभ योगों में होगा शनिवार को सावन शिवरात्रि पर्व

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jul 2023 01:04 AM IST
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Sawan Shivratri festival will be held in auspicious yogas on Saturday
श्रावण कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला सावन शिवरात्रि का पर्व इस बार 15 जुलाई को शुभ योगों में मनाया जाएगा। इस साल अधिक मास होने के कारण सावन की दो शिवरात्रि मनाई जाएगी। इस बार सावन शिवरात्रि के दिन भद्रा लगी है। भगवान शिव का प्रिय माह सावन चल रहा है और श्रावण मास का हर दिन शिव पूजा के लिए समर्पित है, लेकिन श्रावण शिवरात्रि की प्रतीक्षा सभी लोगों को होती है।
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गायत्री ज्योतिष संस्थान के संचालक डॉ. रामराज कौशिक ने बताया की सावन शिवरात्रि के दिन व्रत रखकर भगवान भोले नाथ की पूजा की जाती है। शिवरात्रि की पूजा दिन में कभी भी हो सकती है, लेकिन निशिता मुहूर्त की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार सावन शिवरात्रि के दिन भद्रा भी लगी है और शनिवार के दिन व्रत रखने से शनि देव के प्रकोप से भी रक्षा होगी।
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इस बार सावन शिवरात्रि पर दो शुभ योग वृद्धि और ध्रुव योग बने हैं। वृद्धि योग प्रात:काल से सुबह 08 बजकर 22 मिनट तक है। इस योग में पूजा पाठ करने से पुण्य फल में वृद्धि होती है। इसके बाद से ध्रुव योग प्रारंभ होगा, जो पूरी रात रहेगा। सावन शिवरात्रि के दिन मृगशिरा नक्षत्र सुबह से लेकर रात 12.23 बजे तक है। शनिवार को शिव पूजन और गन्ने के रस से अभिषेक करने से शनि देव की कृपा बनी रहेगी।
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व्रत वाले दिन शुभ मुहूर्त में शिवजी की पूजा की जाती है। भांग, बेलपत्र, अक्षत, गंगाजल, दूध, शहद, शमी के पत्ते, फूल, धतूरा आदि से विधिपूर्वक शिव पूजा करें। शिव चालीसा पढ़ें, ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें और शिव जी की आरती करें। दिन में आपको फलाहार करना चाहिए और शिव पुराण की कथा पढ़ सकते हैं। व्रत के अगले दिन पारण करते हैं।



प्रात:काल से दोपहर तक का समय जलाभिषेक के लिए अनुकूल एवं शुभ रहेगा। इसके अतिरिक्त प्रदोष काल समय संपूर्ण रात्रि के समय भी जलाभिषेक के लिए उत्तम रहेगा।
प्रात: 05.40 से 08.25 तक,
शाम 19.28 से 21.30 तक,
निशिथकाल समय: शाम 21.30 से 23.33 तक,
महानिशिकाल समय: रात्रि 23.33 से 24.10 तक


अगर आप सावन के सोमवार को भोले को खुश करना चाहते हैं, तो भूलकर भी उन्हें कुछ चीजें अर्पित न करें। सावन के सोमवार की पूजा के दौरान आपको भूलकर भी केवड़े और केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। भोलेनाथ की पूजा करने के दौरान कभी भी तुलसी का पत्ता, काले तिल शामिल न करें। सावन के सोमवार पर शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम व सिंदूर चढ़ाने की गलती बिल्कुल भी न करें। ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि शिवलिंग पर नारियल पानी को नहीं चढ़ाना चाहिए।
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