{"_id":"688283298c8ea5926607013a","slug":"sadhvi-sucheta-told-four-reasons-for-conflict-in-the-house-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-141291-2025-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: साध्वी सुचेता ने बताए घर में क्लेश के चार कारण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: साध्वी सुचेता ने बताए घर में क्लेश के चार कारण
Fri, 25 Jul 2025 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 25 Jul 2025 12:32 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा माडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 15वें दिन महा साध्वी सुचेता महाराज ने घर में क्लेश क्यों आता है, इस विषय पर चर्चा की। उन्होंने विस्तारपूर्वक समझाया कि घर में क्लेश आने के मुख्यतः चार कारण हैं।
उन्होंने बताया कि पहला अहंकार है। जब घर के किसी प्राणी के मन में यह आ जाए जो मैं कह रहा हूं सही है बाकी सब गलत हैं। मेरा ही हुकुम चलना चाहिए। इस भावना के आते ही घर में क्लेश का वातावरण तैयार हो जाता है। दूसरा कारण है छोटी सोच। तीसरा कारण है संयुक्त परिवार में एक व्यक्ति को मुखिया होना चाहिए जो न्याय करने की और तर्कसंगत बात करने की ताकत रखता हो। यदि घर में हर व्यक्ति अपनी-अपनी डफली और अपना राग गाएगा तो क्लेश निश्चित है।
चौथा और अंतिम क्लेश का कारण है छोटी-छोटी बातों को तूल देना। आजकल देखा गया है परिवारों में एक छोटी सी बात इतनी बढ़ती चली जाती है कि वह अंत में घर में फूट का कारण बनती है। उसका परिणाम बंटवारे के रूप में होता है। तो महा साध्वी ने इन चारों उपायों पर विचार करने और उनका हल निकालने पर जोर दिया।
विज्ञापन
साध्वी ने फरमाया कि आज के युग में हम एक ही दिन में कितने चेहरे अपने चेहरे पर चढ़ा लेते हैं। एक प्रेरक प्रसंग के द्वारा उन्होंने बताया कि एक आदमी एक पहुंचे हुए संत के पास गया, उनके घर पहुंचा तो देखा एक माली पौधों को पानी दे रहा है। उन्होंने पूछा कि संत जी कहां है तो उन्होंने कहा कि वह आधे घंटे तक आएंगे। वह आदमी अंदर चला गया।
आधे घंटे बाद वही व्यक्ति जो पौधों को पानी दे रहा था आ गया तो उसने कहा यदि आप ही संत थे आप मुझे पहले बता सकते थे। आप साधना कैसे करते हैं, मुझे बताइए। इस पर संत ने कहा कि मैं साधना नहीं करता हूं। उस आदमी को बड़ी निराशा हुई कि मैं इतनी उम्मीदें लेकर उनके पास आया था और इन्होंने तो मुझे निराश कर दिया।
उन्होंने कहा फिर भी आपकी इतनी ख्याति है आप कुछ तो करते होंगे। संत ने कहा मैं केवल जो करता हूं वही करता हूं। जिस समय मैं सोता हूं केवल सोता हूं। जिस समय मैं बोलता हूं केवल बोलता हूं। जिस समय मैं खाता हूं मेरा सारा ध्यान खाने की तरफ होता है, यही कारण है कि जब आप मुझसे मिले मैं उसे समय माली के वश में था, उस समय मेरा कर्तव्य केवल पौधों को पानी देना था।
विज्ञापन
यमुनानगर। एसएस जैन सभा माडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 15वें दिन महा साध्वी सुचेता महाराज ने घर में क्लेश क्यों आता है, इस विषय पर चर्चा की। उन्होंने विस्तारपूर्वक समझाया कि घर में क्लेश आने के मुख्यतः चार कारण हैं।
उन्होंने बताया कि पहला अहंकार है। जब घर के किसी प्राणी के मन में यह आ जाए जो मैं कह रहा हूं सही है बाकी सब गलत हैं। मेरा ही हुकुम चलना चाहिए। इस भावना के आते ही घर में क्लेश का वातावरण तैयार हो जाता है। दूसरा कारण है छोटी सोच। तीसरा कारण है संयुक्त परिवार में एक व्यक्ति को मुखिया होना चाहिए जो न्याय करने की और तर्कसंगत बात करने की ताकत रखता हो। यदि घर में हर व्यक्ति अपनी-अपनी डफली और अपना राग गाएगा तो क्लेश निश्चित है।
विज्ञापन
चौथा और अंतिम क्लेश का कारण है छोटी-छोटी बातों को तूल देना। आजकल देखा गया है परिवारों में एक छोटी सी बात इतनी बढ़ती चली जाती है कि वह अंत में घर में फूट का कारण बनती है। उसका परिणाम बंटवारे के रूप में होता है। तो महा साध्वी ने इन चारों उपायों पर विचार करने और उनका हल निकालने पर जोर दिया।
विज्ञापन
साध्वी ने फरमाया कि आज के युग में हम एक ही दिन में कितने चेहरे अपने चेहरे पर चढ़ा लेते हैं। एक प्रेरक प्रसंग के द्वारा उन्होंने बताया कि एक आदमी एक पहुंचे हुए संत के पास गया, उनके घर पहुंचा तो देखा एक माली पौधों को पानी दे रहा है। उन्होंने पूछा कि संत जी कहां है तो उन्होंने कहा कि वह आधे घंटे तक आएंगे। वह आदमी अंदर चला गया।
आधे घंटे बाद वही व्यक्ति जो पौधों को पानी दे रहा था आ गया तो उसने कहा यदि आप ही संत थे आप मुझे पहले बता सकते थे। आप साधना कैसे करते हैं, मुझे बताइए। इस पर संत ने कहा कि मैं साधना नहीं करता हूं। उस आदमी को बड़ी निराशा हुई कि मैं इतनी उम्मीदें लेकर उनके पास आया था और इन्होंने तो मुझे निराश कर दिया।
उन्होंने कहा फिर भी आपकी इतनी ख्याति है आप कुछ तो करते होंगे। संत ने कहा मैं केवल जो करता हूं वही करता हूं। जिस समय मैं सोता हूं केवल सोता हूं। जिस समय मैं बोलता हूं केवल बोलता हूं। जिस समय मैं खाता हूं मेरा सारा ध्यान खाने की तरफ होता है, यही कारण है कि जब आप मुझसे मिले मैं उसे समय माली के वश में था, उस समय मेरा कर्तव्य केवल पौधों को पानी देना था।