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Yamuna Nagar News: राइस मिलर मांगों पर अड़े, धान का उठान अटका

Sat, 27 Sep 2025 09:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sat, 27 Sep 2025 09:50 PM IST
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Rice millers stuck to their demands, paddy lifting stalled
धान साफ करने के काम में जुटे मजदूर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। अनाज मंडियों में धान की सरकारी खरीद शुरू होने बाद भी किसानों की परेशानी अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रही। मंडियों से अभी तक धान की एक बोरी का भी उठान नहीं है। अनाज मंडियां धीरे-धीरे धान की बोरियों से अटने लगी हैं। धान को बोरियाें में ही रख कर मंडियों में ही स्टॉक किया जा रहा है।
उठान न होने की प्रमुख वजह राइस मिलरों द्वारा अभी तक धान की कुटाई के लिए रजिस्ट्रेशन व एग्रीमेंट नहीं कराया गया है। राइस मिलर अपनी मांगों को मनवाने की जिद पर अड़े हैं। जब तक रजिस्ट्रेशन नहीं होगा तब तक कोई भी राइस मिलर मंडियों से धान का उठान नहीं कर पाएगा।वहीं मंडियों में धान की आवक दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।
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जिले में 185 राइस मिलर हैं। मिलर मंडियों से धान उठाकर अपनी मिलों में कुटाई करते हैं। इसके बदले में चावल एफसीआई को लौटाया जाता है। मिलर को मंडियों से धान उठाने से पहले खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में रजिस्ट्रेशन व एग्रीमेंट कराना होता है। परंतु खरीद होने के बाद भी किसी भी राइस मिलर ने अभी तक विभाग में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है।
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अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए शुक्रवार को राइस मिलर जिला सचिवालय में डीसी पार्थ गुप्ता से मिलने पहुंचे। डीसी से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इस ुर डीएफएससी जतिन मित्तल व हैफेड डीएम के साथ उनकी लंबी बातचीत हुई। डीएफएससी ने जल्द ही मांगों का समाधान कराने का आश्वासन दिया। इस पर राइस मिलरों ने कहा कि जैसे ही मांगों को लेकर कोई बात बनेगी वह रजिस्ट्रेशन शुरू करवा देंगे।
जिला राइस मिलर्स एंड डीलर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मनीष बंसल ने बताया कि सरकार की पॉलिसी के अनुसार उन्हें हर महीने की रेशो के हिसाब से चावल देना होता है। यमुनानगर के राइस मिलर पिछले वर्षों में भी जिले से बाहर चावल का भुगतान उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, करनाल, पानीपत में करते आ रहे हैं, क्योंकि जिले में चावल लगाने के लिए जगह नहीं मिलती।
उनका सारा कार्य लेबर पर निर्भर करता है। जब चावल जिला में जगह न होने के कारण नहीं लगता तो लेबर खाली नहीं बैठती और वह अपने घरों को पलायन कर जाती है। जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें करनाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश आदि स्टेशनों पर चावल के भुगतान के लिए जाना पड़ता है।
उस दौरान भारतीय खाद्य निगम राइस मिलरों से जबरदस्ती लिखवा कर लेती है कि वह किराया क्लेम नहीं करेंगें। उस समय लेबर के दबाव में मजबूरन लिख कर देना होता है। इसलिए मिलरों को गृह जिला में ही चावल रखने के लिए जगह उपलब्ध करवाई जाए। यदि उन्हें जिले में ही चावल के लिए जगह उपलब्ध होती है तभी वह सीएमआर का कार्य कर पाएंगें अन्यथा नहीं।

राइस मिलरों से बातचीत हुई है। बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई। राइस मिलर की मांगों के बारे में मुख्यालय में अवगत करवा दिया है। राइस मिलर जल्द ही रजिस्ट्रेशन शुरू करवा देंगे। - जतिन मित्तल, डीएफएससी, यमुनानगर।

धान साफ करने के काम में जुटे मजदूर। संवाद

धान साफ करने के काम में जुटे मजदूर। संवाद

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