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Yamuna Nagar News: ट्रक बीमा क्लेम खारिज करना पड़ा महंगा, कंपनी को 5.60 लाख चुकाने के आदेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 07 May 2026 03:34 AM IST
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Rejecting truck insurance claim proved costly, company ordered to pay Rs 5.60 lakh
यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा ट्रक दुर्घटना के क्लेम को खारिज करने के मामले में अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता मैसर्स लक्ष्मी नारायण टिंबर जगाधरी को 5,60,000 रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 21,000 रुपये अलग से देने होंगे।
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आयोग के सहायक रजिस्ट्रार नीरज वालिया ने बताया कि मामले के अनुसार, नीलम पेट्रोल पंप के पास स्थित मैसर्स लक्ष्मी नारायण टिंबर के मालिक तेजपाल के उत्तराधिकारियों गांव कनालसी निवासी मां बिमला देवी, पत्नी सोनिका, नाबालिग पुत्री वंशिका और नाबालिग पुत्र कर्णवीर ने शिकायत दायर की थी। शिकायत में बताया गया कि उन्होंने ट्रक का बीमा 26 सितंबर 2024 से 25 सितंबर 2025 तक कराया था। वाहन का बीमित मूल्य 39,60,000 रुपये था और इसके लिए 75,025 रुपये का प्रीमियम अदा किया गया था। ट्रक एचडीएफसी बैंक से ऋण लेकर खरीदा गया था, जिसकी मासिक किस्त 83,020 रुपये थी। सात नवंबर 2024 को ट्रक जगाधरी से प्लाईवुड लेकर अहमदाबाद जा रहा था।
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कैथल जिले के ढांड क्षेत्र में अचानक एक गाय सामने आने पर चालक ने ब्रेक लगाया, जिससे ट्रक चौक की दीवार से टकराकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना की सूचना तुरंत बीमा कंपनी को दी गई और सर्वे कराया गया। बीमा कंपनी के निर्देश पर वाहन को क्रेन के जरिए यमुनानगर लाकर अशोक लेलैंड के अधिकृत डीलर यशोदा ट्रांसमोबिलिटी एलएलपी दामला में खड़ा किया गया, जहां मरम्मत का अनुमानित मूल्य करीब 14 लाख रुपये लगाया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि सभी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद बीमा कंपनी ने क्लेम निपटाने में देरी की और अंततः 24 फरवरी 2025 को दावा खारिज कर दिया। वहीं, बीमा कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि दुर्घटना के समय चालक मोहम्मद सवेज का ड्राइविंग लाइसेंस चार नवंबर 2024 को समाप्त हो चुका था और उसने 16 नवंबर 2024 को नवीनीकरण के लिए आवेदन किया। कंपनी के अनुसार, वैध लाइसेंस न होने के कारण दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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नीरज वालिया ने बताया कि आयोग ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि चालक ने 14 नवंबर 2024 को समय सीमा के भीतर लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन कर दिया था और मोटर वाहन अधिनियम के तहत एक वर्ष की छूट अवधि उपलब्ध है। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था या वह वाहन चलाने में अक्षम था। आयोग ने यह भी पाया कि बीमा कंपनी के सर्वेक्षक ने अपनी रिपोर्ट में चालक की किसी लापरवाही का उल्लेख नहीं किया। साथ ही, कंपनी ने पहले सर्वेक्षण के दौरान दस्तावेज प्राप्त करने के बावजूद बाद में उसी आधार पर दावा खारिज किया, जो अनुचित और मनमाना है।

साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने सर्वेक्षक द्वारा आंकी गई 5,60,000 रुपये की क्षति को सही माना और उसी राशि का भुगतान करने का आदेश दिया। प्रतिवादी यशोदा ट्रांसमोबिलिटी एलएलपी के संबंध में आयोग ने कहा कि वह केवल अधिकृत सर्विस स्टेशन है और उसके खिलाफ कोई ठोस आरोप नहीं है, इसलिए उसके विरुद्ध शिकायत खारिज की जाती है। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया तो पूरी राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
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