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नहीं चली बसें, यात्री रहे परेशान
यमुनानगर
Updated Wed, 13 Nov 2013 04:36 PM IST
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रोडवेज यूनियनों की दो दिवसीय हड़ताल का असर शहर में एक दिन पहले ही मंगलवार शाम को ही देखने को मिला। छह बजे के बाद लांग रूट की ज्यादातर बसों के पहिये जाम हो गए।
दिल्ली, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, चंडीगढ़, पौंटासाहिब और न जाने कितने रूटों पर रोडवेज की बसें नहीं चल पाई। बसें न चलने से यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
यात्री बस स्टैंड पर बसों की वेट करते रहे, लेकिन कोई भी न तो बस स्टैंड पर पहुंची और न ही वहां से चली। बस स्टैंड स्थित पूछताछ कक्ष में बैठे कर्मचारी भी किस रूट की बस कब आएगी, यह बताने में असमर्थता जताते रहे।
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उल्लेखनीय है कि रोडवेज यूनियनों ने मांगों के लिए 13 और 14 नवंबर को चक्का जाम करने की घोषणा की थी। चक्का जाम का प्रभाव मंगलवार को शहर में दिखा।
ये बसें नहीं गई
बस स्टैंड से दिल्ली के लिए शाम छह बजे अंतिम बस गई। इसके बाद सात, आठ और रात नौ बजे की अंतिम बस नहीं गई। करनाल के लिए शाम साढे़ सात बजे की अंतिम बस नहीं चल पाई। कुरुक्षेत्र के लिए शाम आठ बजे जाने वाली बस भी बस स्टैंड पर खड़ी रही।
इस दौरान यात्री बसें चलने का इंतजार करते रहे। सात और साढ़े सात बजे अंबाला जाने वाली बस और शाम छह बजे के बाद चंडीगढ़ के लिए कोई बस नहीं चली।
इसके अलावा रात साढ़े सात बजे दिल्ली से पौंटा साहिब जाने वाली बस भी यहां से रवाना नहीं हुई। वहीं बिलासपुर और अन्य कई रूट पर शाम छह-सात बजे के बाद कोई बस सर्विस यमुनानगर डिपो से नहीं हुई।
मेले में जाने वाले करते रहे वेट
बुधवार से राज्यस्तरीय कपाल मोचन मेला शुरू हो रहा है। मंगलवार को काफी संख्या में श्रद्धालु मेले में जाने के लिए यमुनानगर बस स्टैंड पर बस की वेट करते रहे, लेकिन बस स्टैंड पर मेले में जाने की तो बाद दूर अन्य किसी भी रूट की कोई बस न ही गई न ही आई।
शाम सात बजे ज्यादातर रूट पर बसें चलती हैं, लेकिन इस दौरान पूरे बस स्टैंड में एक भी बस नहीं थी और सैकड़ों यात्री बसों का इंतजार कर रहे।
यूनियनों को नहीं मना पाया प्रशासन
इस बार रोडवेज का चक्का जाम प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। क्योंकि बुधवार से जहां रोडवेज यूनियनें दो दिन के लिए चक्का जाम करेंगी, वहीं बुधवार से ही ऐतिहासिक कपाल मोचन मेला शुरू हो रहा है।
जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं बसों के सहारे मेले में पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मेले के पहले दो दिन श्रद्धालु बसों से मेले में नहीं पहुंच पाएंगे।
हालांकि रोडवेज अधिकारियों और प्रशासन के अन्य अधिकारी रोडवेज यूनियनों के नेताओं पर डोरे डालते रहे, लेकिन मंगलवार रात तक किसी भी यूनियन नेता ने अधिकारियों की बात नहीं मानी।
कर्मचारी नहीं ले जा रहे बसें
ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन प्रधान कंवलजीत जोशी ने बताया कि इस बार की हड़ताल पूरी तरह से सफल रहेगी। सभी कर्मचारी इस बार लामबंद हैं।
मंगलवार शाम से ही कर्मचारियों में हड़ताल को जोश देखने को मिला। शाम को ही लांग रूट पर कोई बस नहीं गई। बुधवार सुबह चार बजे से ही चक्का जाम के लिए यूनियन पदाधिकारी और सदस्य बस स्टैंड पर पहुंचेंगे।
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दिल्ली, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, चंडीगढ़, पौंटासाहिब और न जाने कितने रूटों पर रोडवेज की बसें नहीं चल पाई। बसें न चलने से यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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यात्री बस स्टैंड पर बसों की वेट करते रहे, लेकिन कोई भी न तो बस स्टैंड पर पहुंची और न ही वहां से चली। बस स्टैंड स्थित पूछताछ कक्ष में बैठे कर्मचारी भी किस रूट की बस कब आएगी, यह बताने में असमर्थता जताते रहे।
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उल्लेखनीय है कि रोडवेज यूनियनों ने मांगों के लिए 13 और 14 नवंबर को चक्का जाम करने की घोषणा की थी। चक्का जाम का प्रभाव मंगलवार को शहर में दिखा।
ये बसें नहीं गई
बस स्टैंड से दिल्ली के लिए शाम छह बजे अंतिम बस गई। इसके बाद सात, आठ और रात नौ बजे की अंतिम बस नहीं गई। करनाल के लिए शाम साढे़ सात बजे की अंतिम बस नहीं चल पाई। कुरुक्षेत्र के लिए शाम आठ बजे जाने वाली बस भी बस स्टैंड पर खड़ी रही।
इस दौरान यात्री बसें चलने का इंतजार करते रहे। सात और साढ़े सात बजे अंबाला जाने वाली बस और शाम छह बजे के बाद चंडीगढ़ के लिए कोई बस नहीं चली।
इसके अलावा रात साढ़े सात बजे दिल्ली से पौंटा साहिब जाने वाली बस भी यहां से रवाना नहीं हुई। वहीं बिलासपुर और अन्य कई रूट पर शाम छह-सात बजे के बाद कोई बस सर्विस यमुनानगर डिपो से नहीं हुई।
मेले में जाने वाले करते रहे वेट
बुधवार से राज्यस्तरीय कपाल मोचन मेला शुरू हो रहा है। मंगलवार को काफी संख्या में श्रद्धालु मेले में जाने के लिए यमुनानगर बस स्टैंड पर बस की वेट करते रहे, लेकिन बस स्टैंड पर मेले में जाने की तो बाद दूर अन्य किसी भी रूट की कोई बस न ही गई न ही आई।
शाम सात बजे ज्यादातर रूट पर बसें चलती हैं, लेकिन इस दौरान पूरे बस स्टैंड में एक भी बस नहीं थी और सैकड़ों यात्री बसों का इंतजार कर रहे।
यूनियनों को नहीं मना पाया प्रशासन
इस बार रोडवेज का चक्का जाम प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। क्योंकि बुधवार से जहां रोडवेज यूनियनें दो दिन के लिए चक्का जाम करेंगी, वहीं बुधवार से ही ऐतिहासिक कपाल मोचन मेला शुरू हो रहा है।
जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं बसों के सहारे मेले में पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मेले के पहले दो दिन श्रद्धालु बसों से मेले में नहीं पहुंच पाएंगे।
हालांकि रोडवेज अधिकारियों और प्रशासन के अन्य अधिकारी रोडवेज यूनियनों के नेताओं पर डोरे डालते रहे, लेकिन मंगलवार रात तक किसी भी यूनियन नेता ने अधिकारियों की बात नहीं मानी।
कर्मचारी नहीं ले जा रहे बसें
ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन प्रधान कंवलजीत जोशी ने बताया कि इस बार की हड़ताल पूरी तरह से सफल रहेगी। सभी कर्मचारी इस बार लामबंद हैं।
मंगलवार शाम से ही कर्मचारियों में हड़ताल को जोश देखने को मिला। शाम को ही लांग रूट पर कोई बस नहीं गई। बुधवार सुबह चार बजे से ही चक्का जाम के लिए यूनियन पदाधिकारी और सदस्य बस स्टैंड पर पहुंचेंगे।