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दंगा पीड़ितों की मदद के लिए आगे आई शहर की दो बेटियां
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
Updated Mon, 21 Mar 2016 12:28 AM IST
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दान
- फोटो : yamunanagar
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जगाधरी वर्कशाप। फरवरी महीने में प्रदेश में हुए जाट आंदोलन के दाौरान कुछ उपद्रवियों ने कइयों के घर फूंक कर उन्हें बेघर कर दिया और कइयों को बेरोजगार कर दिया। ऐसे में आंदोलन पीड़ितों की मदद के लिए शिवपुरी की दो बेटियां आगे आई हैं। दोनों बेटिंयों ने खुद की पॉकेट मनी को बचा कर 860 रुपये एकत्रित हुए और इस रकम को बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से पीड़ितों की मदद के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में भेज दिया। भले ही दोनों बहनों द्वारा दी गई मदद छोटी है, लेकिन उन्होंने समाज को बड़ा संदेश दिया है।
शिवपुरी निवासी रमाकांत व पूजा डंगवाल की बेटी आयुषी व अंशिका डंगवाल कहती है कि आंदोलन में कुछ असामाजिक तत्वों ने कइयों के घरों व प्रतिष्ठानों को जला दिया। उनकी आंखे नम हैं और उनके लिए आगे की राह बहुत कठिन हैं। ऐसे में आज पूरे समाज को प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आना चाहिए और उनका सहयोग करना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार अपना काम कर रही है, लेकिन हमें भी अपने स्तर पर सहयोग करना चाहिए। उनका कहना है कि अपनी पाकेट मनी को बचा कर दूसरों की मदद करना उन्हें अच्छा लगता है। घर में शुरू से ही सिखाया गया है कि मुश्किल समय में दूसरों की मदद करनी चाहिए। बस, इसी सबक को लेकर वह दूसरों की मदद करती हैं। जिसमें उनके परिवार के सदस्य भी सहयोग करते हैं। आयुषि के पिता रमाकांत डंगवाल शिक्षा विभाग में नॉन टीचिंग स्टॉफ में हैं, जबकि मां पूजा गृहणि हैं।
पहले भी कर चुकी हैं मदद :
10वीं कक्षा की छात्रा आयुषी व सातवीं कक्षा की छात्रा अंशिका पहले भी अपनी पॉकेट मनी से दूसरों की मदद कर चुकी हैं। जून 2013 में आई भयंकर उत्तराखंड बाढ़ में लाखों लोग प्रभावित हुए थे। तब भी दोनों बहनें बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए आगे आई थी। दोनों बहनों ने यमुनानगर, जगाधरी व मुस्ताफाबाद में जाकर लोगों की मदद से चंदा एकत्रित किया और कुल 33 हजार सात सौ रुपये का बैंक ड्राफ्ट बना कर प्रधानमंत्री राहत कोष में भेजा था। इसमें उन्होंने पॉकेट मनी से बचा कर करीब एक हजार रुपये की सहायता दी थी। इसी तरह 2015 की दीपवाली में पटाखे खरीदने की बजाए पॉकेट मनी से मिठाइयां खरीदी। इन मिठाइयों को उन्होंने जरूरतमंदों में बांटी और उनके साथ ही दीपवाली मनाई। उन्होंने कहा कि पटाखे जलाने से प्रदूषण फैलता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है। इसलिए पटाखे जलाने की बजाए दूसरों की मदद में पैसे खर्च करने चाहिए।
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शिवपुरी निवासी रमाकांत व पूजा डंगवाल की बेटी आयुषी व अंशिका डंगवाल कहती है कि आंदोलन में कुछ असामाजिक तत्वों ने कइयों के घरों व प्रतिष्ठानों को जला दिया। उनकी आंखे नम हैं और उनके लिए आगे की राह बहुत कठिन हैं। ऐसे में आज पूरे समाज को प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आना चाहिए और उनका सहयोग करना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार अपना काम कर रही है, लेकिन हमें भी अपने स्तर पर सहयोग करना चाहिए। उनका कहना है कि अपनी पाकेट मनी को बचा कर दूसरों की मदद करना उन्हें अच्छा लगता है। घर में शुरू से ही सिखाया गया है कि मुश्किल समय में दूसरों की मदद करनी चाहिए। बस, इसी सबक को लेकर वह दूसरों की मदद करती हैं। जिसमें उनके परिवार के सदस्य भी सहयोग करते हैं। आयुषि के पिता रमाकांत डंगवाल शिक्षा विभाग में नॉन टीचिंग स्टॉफ में हैं, जबकि मां पूजा गृहणि हैं।
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पहले भी कर चुकी हैं मदद :
10वीं कक्षा की छात्रा आयुषी व सातवीं कक्षा की छात्रा अंशिका पहले भी अपनी पॉकेट मनी से दूसरों की मदद कर चुकी हैं। जून 2013 में आई भयंकर उत्तराखंड बाढ़ में लाखों लोग प्रभावित हुए थे। तब भी दोनों बहनें बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए आगे आई थी। दोनों बहनों ने यमुनानगर, जगाधरी व मुस्ताफाबाद में जाकर लोगों की मदद से चंदा एकत्रित किया और कुल 33 हजार सात सौ रुपये का बैंक ड्राफ्ट बना कर प्रधानमंत्री राहत कोष में भेजा था। इसमें उन्होंने पॉकेट मनी से बचा कर करीब एक हजार रुपये की सहायता दी थी। इसी तरह 2015 की दीपवाली में पटाखे खरीदने की बजाए पॉकेट मनी से मिठाइयां खरीदी। इन मिठाइयों को उन्होंने जरूरतमंदों में बांटी और उनके साथ ही दीपवाली मनाई। उन्होंने कहा कि पटाखे जलाने से प्रदूषण फैलता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है। इसलिए पटाखे जलाने की बजाए दूसरों की मदद में पैसे खर्च करने चाहिए।
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