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बेशकीमती मूर्तियां और जेवरात चोरी
अमर उजाला ब्यूरो/यमुनानगर
Updated Mon, 13 Jan 2014 12:33 AM IST
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यमुनानगर। बुड़िया स्थित प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर से चोर शनिवार को 14 बहुमूल्य मूर्तियां और सोने-चांदी के जेवरात, बर्तन और पूजा का सामान चोरी करके ले गए। एक मूर्ति साढ़े पांच सौ साल से अधिक पुरानी थी। चोरी के सामान की कीमत 50 लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है। सूचना पर पहुंची पुलिस के आला अधिकारियों और सीन आफ क्राइम की टीम ने मौके पर आकर साक्ष्य एकत्र किए।
बुड़िया कस्बे में स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर को प्रतिदिन शाम सात बजे तक बंद कर दिया जाता है और अगले दिन सुबह 6 बजे मंदिर खोला जाता है। रविवार सुबह मंदिर खोलने आए पुजारी को दरवाजे पर लगे ताले टूटे मिले। मंदिर की तीन बेदियों में रखी मूर्तियां, सोने-चांदी का श्रृंगार का सामान और बर्तन गायब थे। वहीं एक अलमारी का ताला टूटा पाया गया, जिसमें चांदी के बर्तन और अन्य कीमती सामान रखा था। मंदिर में चोरी की सूचना मिलने पर बुड़िया थाने के एसएचओ मौके पर पहुंच गए। मंदिर में चोरी की खबर फैलने पर समाज के लोग भी यहां पहुंच गए। पुलिस अधीक्षक सिवास कविराज, डीएसपी अशोक सभरवाल और सीन आफ क्राइम की टीम ने वहां आकर जांच-पड़ताल की।
ये सामान हुआ चोरी
भगवान पार्श्वनाथ की धातु की नौ प्रतिमाएं, भगवान मल्लीनाथ की धातु की एक प्रतिमा, भगवान महावीर स्वामी की धातु की एक प्रतिमा, भगवान चंद्र प्रभु की एक प्रतिमा और अष्ट धातु के दो मंदिर। बेदी नंबर एक से चांदी के तीन बड़े छत्र, तीन छोटे छत्र, तीन बड़े चांदी के सिंहासन और तीन छोटे सिंहासन, चांदी के पांच आभामंडल और पांच पंचमेरु। बेदी नंबर दो से तीन चांदी के छत्र, चांदी के दो छोटे सिंहासन और दो बड़े सिंहासन, चांदी का एक आभामंडल, दो चंवर और धातु के तीन कलश। बेदी नंबर तीन से चांदी का छत्र, चांदी का आभामंडल और चांदी के तीन बड़े सिंहासन। अलमारी से चांदी की दो प्लेटें, दो लोटे, कांसी के दो थाल और धातु के अन्य छोटे बर्तन।
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मंदिर की स्थिति से वाकिफ थे चोर
मंदिर मेें जिस तरह चोरी को अंजाम दिया गया, उससे यह प्रतीत होता है कि चोरों को मंदिर के बारे में पूरी जानकारी थी। बेदियाें तक पहुंचने के लिए तीन दरवाजे और एक कैंची गेट लगा है। कैंची गेट और एक दरवाजे पर बाहर से ताला है। चोरों ने दरवाजे पर लगे ताले को काटा और भीतर तीनाें बेदियों तक पहुुंच गए। मंदिर के भीतरी हिस्से में लोहे की एक अलमारी और बाहर भी एक अलमारी और दो बड़ी पेटियां रखी हैं। चांदी का सामान भीतर रखी अलमारी में रखा जाता है। चोरों ने इसी अलमारी का ताला तोड़ा, जबकि बाहर रखी अलमारी और पेटियाें को छुआ तक नहीं।
नहीं काट पाए पदमावती मंदिर का ताला
चोरों ने मंदिर के भीतर बने देवी पदमावती के मंदिर के ताले को काटने का प्रयास किया, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाए। इस मंदिर के पास गुल्लक से निकाले गए 10-20 रुपये के कुछ नोट पड़े मिले। इस मंदिर में भी बहुमूल्य प्रतिमा और चांदी के जेवरात हैं।
जैन समाज की आस्था का प्रतीक है मंदिर
बुड़िया कस्बे में श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पूरे उत्तर भारत का सबसे प्राचीन जैन मंदिर है। इस मंदिर के प्रति जैन समाज की प्रगाढ़ आस्था है। पूरे भारत वर्ष से समाज के लोग इस मंदिर के दर्शन करते आते हैं। पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर की जांच-पड़ताल के बाद अपनी रिपोर्ट में मंदिर के भवन को 250 साल पुराना और मंदिर की प्रतिमाओं को प्राचीन काल का बताया था। मंदिर से चोरी हुई पीतल की एक प्रतिमा सन 1448 से पूर्व की बताई जा रही है। एनडीए शासन काल में केंद्र सरकार ने मंदिर के नवीनीकरण के लिए 14 लाख रुपये दिए थे।
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बुड़िया कस्बे में स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर को प्रतिदिन शाम सात बजे तक बंद कर दिया जाता है और अगले दिन सुबह 6 बजे मंदिर खोला जाता है। रविवार सुबह मंदिर खोलने आए पुजारी को दरवाजे पर लगे ताले टूटे मिले। मंदिर की तीन बेदियों में रखी मूर्तियां, सोने-चांदी का श्रृंगार का सामान और बर्तन गायब थे। वहीं एक अलमारी का ताला टूटा पाया गया, जिसमें चांदी के बर्तन और अन्य कीमती सामान रखा था। मंदिर में चोरी की सूचना मिलने पर बुड़िया थाने के एसएचओ मौके पर पहुंच गए। मंदिर में चोरी की खबर फैलने पर समाज के लोग भी यहां पहुंच गए। पुलिस अधीक्षक सिवास कविराज, डीएसपी अशोक सभरवाल और सीन आफ क्राइम की टीम ने वहां आकर जांच-पड़ताल की।
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ये सामान हुआ चोरी
भगवान पार्श्वनाथ की धातु की नौ प्रतिमाएं, भगवान मल्लीनाथ की धातु की एक प्रतिमा, भगवान महावीर स्वामी की धातु की एक प्रतिमा, भगवान चंद्र प्रभु की एक प्रतिमा और अष्ट धातु के दो मंदिर। बेदी नंबर एक से चांदी के तीन बड़े छत्र, तीन छोटे छत्र, तीन बड़े चांदी के सिंहासन और तीन छोटे सिंहासन, चांदी के पांच आभामंडल और पांच पंचमेरु। बेदी नंबर दो से तीन चांदी के छत्र, चांदी के दो छोटे सिंहासन और दो बड़े सिंहासन, चांदी का एक आभामंडल, दो चंवर और धातु के तीन कलश। बेदी नंबर तीन से चांदी का छत्र, चांदी का आभामंडल और चांदी के तीन बड़े सिंहासन। अलमारी से चांदी की दो प्लेटें, दो लोटे, कांसी के दो थाल और धातु के अन्य छोटे बर्तन।
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मंदिर की स्थिति से वाकिफ थे चोर
मंदिर मेें जिस तरह चोरी को अंजाम दिया गया, उससे यह प्रतीत होता है कि चोरों को मंदिर के बारे में पूरी जानकारी थी। बेदियाें तक पहुंचने के लिए तीन दरवाजे और एक कैंची गेट लगा है। कैंची गेट और एक दरवाजे पर बाहर से ताला है। चोरों ने दरवाजे पर लगे ताले को काटा और भीतर तीनाें बेदियों तक पहुुंच गए। मंदिर के भीतरी हिस्से में लोहे की एक अलमारी और बाहर भी एक अलमारी और दो बड़ी पेटियां रखी हैं। चांदी का सामान भीतर रखी अलमारी में रखा जाता है। चोरों ने इसी अलमारी का ताला तोड़ा, जबकि बाहर रखी अलमारी और पेटियाें को छुआ तक नहीं।
नहीं काट पाए पदमावती मंदिर का ताला
चोरों ने मंदिर के भीतर बने देवी पदमावती के मंदिर के ताले को काटने का प्रयास किया, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाए। इस मंदिर के पास गुल्लक से निकाले गए 10-20 रुपये के कुछ नोट पड़े मिले। इस मंदिर में भी बहुमूल्य प्रतिमा और चांदी के जेवरात हैं।
जैन समाज की आस्था का प्रतीक है मंदिर
बुड़िया कस्बे में श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पूरे उत्तर भारत का सबसे प्राचीन जैन मंदिर है। इस मंदिर के प्रति जैन समाज की प्रगाढ़ आस्था है। पूरे भारत वर्ष से समाज के लोग इस मंदिर के दर्शन करते आते हैं। पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर की जांच-पड़ताल के बाद अपनी रिपोर्ट में मंदिर के भवन को 250 साल पुराना और मंदिर की प्रतिमाओं को प्राचीन काल का बताया था। मंदिर से चोरी हुई पीतल की एक प्रतिमा सन 1448 से पूर्व की बताई जा रही है। एनडीए शासन काल में केंद्र सरकार ने मंदिर के नवीनीकरण के लिए 14 लाख रुपये दिए थे।