गर्व की बात : यमुनानगर के मधुमक्खी पालक को मोदी से मिली तारीफ, इतना है सालाना टर्नओवर
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की रादौर के मधुमक्खी पालक किसान सुभाष कांबोज की सराहना
- मन की बात में कहा, पूर्व अध्यापक की व्यवसाय की शैली अपने आप में एक उदाहरण
- प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम का हिस्सा बनने पर उत्साहित हैं सुभाष कांबोज
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में रादौर खंड के गांव हाफिजपुर निवासी 53 वर्षीय मधुमक्खी पालक किसान सुभाष कांबोज की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्म निर्भरता के क्षेत्र में पूर्व अध्यापक की व्यवसाय की शैली अपने आप में एक उदाहरण है। देशवासी उनके व्यवसाय को अपनाकर आत्म निर्भर बने। वहीं सुभाष कांबोज प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम का हिस्सा बनने पर काफी उत्साहित है।
कांबोज ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा की गई प्रशंसा से उन्हें जीवन में और आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा। वह स्नातक पास है और उन्होंने डीपीएड का डिप्लोमा भी किया हुआ है। 1996 से पहले उन्होंने निजी विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्य किया है।
उन्होंने बताया कि वह 10 एकड़ में खेती करते हैं। 1996 में खादी ग्राम उद्योग से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मधुमक्खी पालन के 6 बॉक्स से उन्होंने काम शुरू किया था। 2006 से लेकर अब तक उनके पास लगभग 2 हजार मधुमक्खी के बॉक्स हैं। यह सभी बॉक्स भी पारंपरिक 6 बक्सों से ही विकसित किए हैं। इन बॉक्स को वे मौसम व फूलों की उपलब्धता के आधार पर अन्य राज्य महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश व जम्मू कश्मीर आदि में स्थानांतरित करते हैं।
सुभाष कांबोज ने बताया कि वह पूरे भारत में खुद शहद की बिक्री करते हैं। उनका शहद तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल आदि में बिकता है। वहीं दूसरी ओर सरसों के फूलों का शहद अमेरिका समेत कई अन्य देशों में जाता है। सरसों के फूलों से मधुमक्खियों द्वारा तैयार किए गए शहद की बाहर के देशों में ज्यादा मांग है।
उनका शहर के कारोबार में 35 से 40 लाख रुपये का टर्न ओवर है। जिसमें से लगभग 15 लाख रुपये की सालाना शुद्ध आमदनी होती है। उन्होंने बताया कि अब तक वह हजार से ज्यादा लोगों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देकर आत्म निर्भर बना चुके हैं। उन्होंने अपने खेतों में पारंपरिक फसलों के अलावा एक बाग भी लगाया हुआ है जहां पर मधुमक्खियों के बॉक्स रखे जाते हैं।
उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद के अतिरिक्त 6 उत्पाद- मोम, कोम्ब हनी, बी प्रोपोलिश, बी पोलन, वीवनम व रायल जैली भी तैयार करते हैं।
आईबीडीसी कुरुक्षेत्र में उनको मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हरियाणा के पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, उदयपुर विश्वविद्यालय व यमुनानगर के उपायुक्त रोहतास खर्ब द्वारा मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में सम्मानित किया गया है।
प्रगतिशील मधुमक्खी पालक किसान सुभाष कांबोज ने युवाओं एवं किसानों के लिए अपने संदेश में कहा है कि वे किसी भी व्यवसाय को मेहनत व लगन से करें। सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने बताया कि किसान पारंपरिक खेती को नुकसान का धंधा समझने लगे हैं। इसलिए वे खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन, बागवानी, पशु डेयरी, दलहन व तिलहन की खेती से जोड़कर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पारंपरिक खेती में किसान के पास वर्ष में केवल 2 या 3 महीने का ही कार्य होता है।
शेष समय खेती से जुड़े अन्य व्यवसायों को आधुनिक मांग के अनुसार वैज्ञानिक दृष्टि से इन कार्यों को अपनाने से किसानों के लिए आय बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यमुनानगर के जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाल सैनी, आईबीडीसी कुरुक्षेत्र के डॉ. बिल्लू यादव व कृषि विज्ञान केन्द्र दामला के डॉ. नरेन्द्र गोयल ने उनके मधुमक्खी पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने में अपना विशेष योगदान दिया है।