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Yamuna Nagar News: वाद विवाद में प्रीत कौर को मिला पहला स्थान
Tue, 06 Oct 2026 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 06 Oct 2026 12:43 AM IST
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महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय मे कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विद्यार्थी। संस्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग ने वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की। स्मार्टर डिवाइस, डंबर मानव विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में बीसीए तृतीय वर्ष की प्रीत कौर ने पहला, बीसीए प्रथम वर्ष की नैना बक्शी ने दूसरा और बीकॉम तृतीय वर्ष कंप्यूटर एप्लीकेशन की रेनू ने तीसरा स्थान हासिल किया।
बीसीए और बीकॉम (कंप्यूटर एप्लीकेशन) के विद्यार्थियों ने डिजिटल तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के मानवीय सोच पर पड़ने वाले प्रभावों पर अपने विचार रखे। प्रतिभागियों ने बताया कि स्मार्टफोन, इंटरनेट और एआई ने रोजमर्रा के कामों को आसान बनाया है, लेकिन इनके अत्यधिक इस्तेमाल से व्यक्ति की खुद सोचने, समस्याओं का समाधान खोजने और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
प्राचार्या डॉ. करुणा ने कहा कि मशीनें इंसानी जज्बे और बुद्धिमत्ता का विकल्प नहीं बन सकतीं। तकनीक का उपयोग अपनी क्षमता को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी सुविधाओं का इस्तेमाल करते समय अपनी मौलिक सोच और विवेक को प्राथमिकता देने की बात कही।
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कंप्यूटर विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर रणदीप ने कहा कि तकनीक उपयोगी साधन है, लेकिन यदि उस पर निर्भरता बढ़ जाए तो वही नुकसानदायक हो सकती है। तार्किक सोच, नए विचार विकसित करने और सही-गलत का निर्णय लेने की क्षमता का महत्व पहले से अधिक है। विद्यार्थियों को अपनी बुद्धिमत्ता को इस तरह विकसित करना चाहिए कि तकनीक उनके नियंत्रण में रहे।
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जगाधरी। महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग ने वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की। स्मार्टर डिवाइस, डंबर मानव विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में बीसीए तृतीय वर्ष की प्रीत कौर ने पहला, बीसीए प्रथम वर्ष की नैना बक्शी ने दूसरा और बीकॉम तृतीय वर्ष कंप्यूटर एप्लीकेशन की रेनू ने तीसरा स्थान हासिल किया।
बीसीए और बीकॉम (कंप्यूटर एप्लीकेशन) के विद्यार्थियों ने डिजिटल तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के मानवीय सोच पर पड़ने वाले प्रभावों पर अपने विचार रखे। प्रतिभागियों ने बताया कि स्मार्टफोन, इंटरनेट और एआई ने रोजमर्रा के कामों को आसान बनाया है, लेकिन इनके अत्यधिक इस्तेमाल से व्यक्ति की खुद सोचने, समस्याओं का समाधान खोजने और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
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प्राचार्या डॉ. करुणा ने कहा कि मशीनें इंसानी जज्बे और बुद्धिमत्ता का विकल्प नहीं बन सकतीं। तकनीक का उपयोग अपनी क्षमता को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी सुविधाओं का इस्तेमाल करते समय अपनी मौलिक सोच और विवेक को प्राथमिकता देने की बात कही।
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कंप्यूटर विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर रणदीप ने कहा कि तकनीक उपयोगी साधन है, लेकिन यदि उस पर निर्भरता बढ़ जाए तो वही नुकसानदायक हो सकती है। तार्किक सोच, नए विचार विकसित करने और सही-गलत का निर्णय लेने की क्षमता का महत्व पहले से अधिक है। विद्यार्थियों को अपनी बुद्धिमत्ता को इस तरह विकसित करना चाहिए कि तकनीक उनके नियंत्रण में रहे।