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आरएसएस के इशारे पर जाति और धर्म के नाम पर भेदभाव का बीज बो रही है बीजेपी : चंद्रशेखर
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- फोटो : Yamuna Nagar
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सीएए, एनपीआर और एनआरसी के विरोध में देश बचाओ और संविधान बचाओ के विषय पर मजलिस अहरार इस्लाम के बैनर तले छछरौली में धरना प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि संविधान भारत के नागरिकों के लिए सर्वोपरि है, इसकी रक्षा हम सबको मिलकर करनी है। संविधान की मूल भावना यह है कि यहां किसी धर्म और जाति के नाम पर लोगों को नहीं बांटा जा सकता है।उन्होंने कहा कि मुसलमानों के साथ धर्म के नाम पर और दलितों के साथ जाति के नाम पर जो भेदभाव का बीज आरएसएस के इशारे पर भारतीय जनता पार्टी बो रही है हमें इसको समझते हुए कदम बढ़ाना होगा, ताकि संविधान पर टिकी हुई ग़लत निगाहों को मोड़ा जा सके। चंद्र शेखर आजाद ने कहा कि बाबा भीमराव अंबेडकर पर जो संविधान सभा में बिठा कर मुस्लमानों का और मौलाना आजाद जैसे योद्धाओं का एहसान है। यह समय केंद्र सरकार की मुस्लिमों और दलितों के खिलाफ जारी जनविरोधी नीतियों पर एकजुट होकर आगे बढ़ने का है। देश को हमारे बलिदान की जरूरत है, हमें संविधान बचाने की और भाईचारा बनाए रखने की कोशिश करनी है। याद रखना यह काम किसी राजनीतिक दल के भरोसे मत छोड़ना।
पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष चौधरी अकरम खान ने कहा कि सरकार लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रही है। भारत महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर आगे बढ़ेगा, ना कि नफ़रत और फूट डालो और राज करो की नीति पर।
पीरजी हाफ़िज हुसैन अहमद बूडिया ने कहा कि भारत में यूनिफार्म सिविल कोड और समाज के बीच दीवार खींचने वाले कानून मंजूर नहीं हैं। हम भारत के लोग हैं हमें आपसी सहयोग और समर्थन के साथ यहां रहना है।
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इस मौके पर जरनैल सिंह सांगवान, कमल बराडा, महबूब चौधरी, सम्राट, वलियुदीन नदवी, जब्बार पोसवाल, कारी सईदुज्जमां, संजीव वालिया, मुंशी मेंहदी हसन, राव मजीद, लियाकत अली, हाजी अब्दुल रशीद, उमरदीन, हाफ़िज मुस्तकीम, असलम, मंदीप सिंह, पंचतीर्थी गुरुद्वारा से स्वर्ण सिंह, सोहिल, मुस्तकीम, यासीन, सालिम, अरशद, शमीम, दिलीप, अली हिदायती, फुरकान, असद बागपत, नाजिम करीमी, कारी इसलाम, सरदार बलबीर सिंह, हाफ़िज लालदीन तेवर, मुफ्ती अताउर्रहमान, अफजल अली, अब्दुल सत्तार, रोशन सरपंच, नूर मोहम्मद नगली, इसरान, मोईन अंसारी, परवेज आदि उपस्थित रहे।
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पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष चौधरी अकरम खान ने कहा कि सरकार लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रही है। भारत महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर आगे बढ़ेगा, ना कि नफ़रत और फूट डालो और राज करो की नीति पर।
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पीरजी हाफ़िज हुसैन अहमद बूडिया ने कहा कि भारत में यूनिफार्म सिविल कोड और समाज के बीच दीवार खींचने वाले कानून मंजूर नहीं हैं। हम भारत के लोग हैं हमें आपसी सहयोग और समर्थन के साथ यहां रहना है।
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इस मौके पर जरनैल सिंह सांगवान, कमल बराडा, महबूब चौधरी, सम्राट, वलियुदीन नदवी, जब्बार पोसवाल, कारी सईदुज्जमां, संजीव वालिया, मुंशी मेंहदी हसन, राव मजीद, लियाकत अली, हाजी अब्दुल रशीद, उमरदीन, हाफ़िज मुस्तकीम, असलम, मंदीप सिंह, पंचतीर्थी गुरुद्वारा से स्वर्ण सिंह, सोहिल, मुस्तकीम, यासीन, सालिम, अरशद, शमीम, दिलीप, अली हिदायती, फुरकान, असद बागपत, नाजिम करीमी, कारी इसलाम, सरदार बलबीर सिंह, हाफ़िज लालदीन तेवर, मुफ्ती अताउर्रहमान, अफजल अली, अब्दुल सत्तार, रोशन सरपंच, नूर मोहम्मद नगली, इसरान, मोईन अंसारी, परवेज आदि उपस्थित रहे।