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बिना जांच बन रहे वाहनों के प्रदूषण जांच सर्टिफिकेट
ब्यूरो/अमर उजाला/यमुनानगर
Updated Mon, 28 Dec 2015 12:24 AM IST
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ट्विनसिटी में वाहनों को चेक किए बिना ही मान्यता प्राप्त प्रदूषण जांच केंद्रों द्वारा सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं। संबंधित विभाग की नाक तले इस गोरखधंधे को प्रदूषण जांच केंद्र संचालक धड़ल्ले से अंजाम दे रहे हैं। वाहनों से निकलने वाले धुएं की वजह से शहर में जहां दिन-प्रतिदिन प्रदूषण के स्तर में इजाफा हो रहा है, वहीं चालक भी इस बात से अनभिज्ञ है कि उनके वाहन द्वारा छोड़े जाने वाले धुएं में प्रदूषण का स्तर क्या है। ऐसे में आमजन को ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
इस तरह से पकड़ में आया मामला
अमर उजाला की टीम ने रेलवे रोड स्थित एक पेट्रोल पंप पर प्रदूषण जांच केंद्र से अपने वाहन की जांच कराई। केंद्र संचालक ने वाहन का प्रदूषण चेक किए बिना ही सर्टिफिकेट थमा दिया। जिसकी एवज में 40 रुपये शुल्क लिया। केंद्र द्वारा जारी सर्टिफिकेट में कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) की मात्रा 0.6 तथा हाइड्रो कार्बन की मात्रा 3811 दर्शायी गई। कुछ समय बाद ही अमर उजाला टीम ने इसी रोड स्थित दूसरे पेट्रोल पंप स्थित प्रदूषण जांच केंद्र से 5 बजकर 41 मिनट पर फिर से अपने वाहन के पोल्यूशन की जांच कराई, तो यहां पर भी केंद्र ऑपरेटर ने बिना जांच किए सर्टिफिकेट जारी कर दिया।
इस केंद्र द्वारा जारी किए गए सर्टिफिकेट में कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) की मात्रा 1.9 तथा हाइड्रो कार्बन की मात्रा 1167 दर्शाई गई है। प्रदूषण जांच केंद्रों द्वारा जारी दोनों सर्टिफिकेट देखकर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदूषण जांच के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है।
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यह है प्रदूषण के मानक
वाहन से निकलने वाले धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड की अधिकतम मात्रा 3.5 पीपीएम (पार्टस पर मिलियन) और हाइड्रो कार्बन की अधिकतम मात्रा 4500 पीपीएम तक होनी चाहिए। अगर धुएं में कार्बन मोनो ऑक्साइड तथा हाइड्रो कार्बन की मात्रा निर्धारित मापदंड से ज्यादा है, तो उस वाहन को सड़क पर चलने लायक नहीं माना जाता। सूत्रों के मुताबिक प्रदूषण जांच केंद्र के संचालक, चालक से उसके वाहन का मॉडल नंबर पूछकर स्वयं ही कार्बन मोनो ऑक्साइड तथा हाइड्रो कार्बन की मात्रा को सर्टिफिकेट में भर देते हैं।
रिकार्ड भी नहीं रखते मेंटेन
ट्विनसिटी में वाहनों के प्रदूषण जांच के लिए स्थापित सेंटर्स द्वारा रिकार्ड भी मेंटेन नहीं किया जा रहा है। जगाधरी रोड पर अमर उजाला की टीम ने पहले जिस सेंटर से प्रदूषण की जांच कराई, उसे बाइक के मॉडल के अलावा अन्य जानकारी नहीं मांगी। चंद सेकेंड में बाइक का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र निकालकर थमा दिया। जब उससे इस संदर्भ में पूछा गया कि उसने ठीक प्रकार से प्रदूषण की जांच क्यों नहीं की, तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसके अलावा उसने अपने सेंटर पर लगाए गए रजिस्टर में वाहन की एंट्री इत्यादि भी नहीं की।
कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को शिकायत का इंतजार
यमुनानगर में जितने भी प्रदूषण जांच केंद्र हैं, उन्हें आरटीए विभाग द्वारा वाहनों के प्रदूषण जांच के लिए अधिकृत किया गया है। विभाग की जिम्मेदारी होती है कि वह नियमित रूप से चेक करें कि प्रदूषण जांच केंद्र सही प्रकार से अपना काम कर रहे हैं या नहीं। लेकिन शहर में न तो विभाग और न ही प्रदूषण जांच केंद्र सही प्रकार से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। प्रदूषण जांच केंद्र जहां बिना चेकिंग के सर्टिफिकेट जारी कर रहे हैं वहीं, संबंधित विभाग के अधिकारियों को उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शिकायत का इंतजार है।
वर्जन ::::::::
जिस प्रदूषण जांच केंद्र ने बिना पोल्युशन चेक किए सर्टिफिकेट जारी किया है, उसके खिलाफ लिखित में शिकायत दो, साथ में उस सर्टिफिकेट की कॉपी भी दी जाए, जो उसके द्वारा जारी किया गया है, उसके उपरांत ही उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
कुशल कटारिया, सचिव, आरटीए विभाग, यमुनानगर।
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इस तरह से पकड़ में आया मामला
अमर उजाला की टीम ने रेलवे रोड स्थित एक पेट्रोल पंप पर प्रदूषण जांच केंद्र से अपने वाहन की जांच कराई। केंद्र संचालक ने वाहन का प्रदूषण चेक किए बिना ही सर्टिफिकेट थमा दिया। जिसकी एवज में 40 रुपये शुल्क लिया। केंद्र द्वारा जारी सर्टिफिकेट में कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) की मात्रा 0.6 तथा हाइड्रो कार्बन की मात्रा 3811 दर्शायी गई। कुछ समय बाद ही अमर उजाला टीम ने इसी रोड स्थित दूसरे पेट्रोल पंप स्थित प्रदूषण जांच केंद्र से 5 बजकर 41 मिनट पर फिर से अपने वाहन के पोल्यूशन की जांच कराई, तो यहां पर भी केंद्र ऑपरेटर ने बिना जांच किए सर्टिफिकेट जारी कर दिया।
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इस केंद्र द्वारा जारी किए गए सर्टिफिकेट में कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) की मात्रा 1.9 तथा हाइड्रो कार्बन की मात्रा 1167 दर्शाई गई है। प्रदूषण जांच केंद्रों द्वारा जारी दोनों सर्टिफिकेट देखकर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदूषण जांच के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है।
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यह है प्रदूषण के मानक
वाहन से निकलने वाले धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड की अधिकतम मात्रा 3.5 पीपीएम (पार्टस पर मिलियन) और हाइड्रो कार्बन की अधिकतम मात्रा 4500 पीपीएम तक होनी चाहिए। अगर धुएं में कार्बन मोनो ऑक्साइड तथा हाइड्रो कार्बन की मात्रा निर्धारित मापदंड से ज्यादा है, तो उस वाहन को सड़क पर चलने लायक नहीं माना जाता। सूत्रों के मुताबिक प्रदूषण जांच केंद्र के संचालक, चालक से उसके वाहन का मॉडल नंबर पूछकर स्वयं ही कार्बन मोनो ऑक्साइड तथा हाइड्रो कार्बन की मात्रा को सर्टिफिकेट में भर देते हैं।
रिकार्ड भी नहीं रखते मेंटेन
ट्विनसिटी में वाहनों के प्रदूषण जांच के लिए स्थापित सेंटर्स द्वारा रिकार्ड भी मेंटेन नहीं किया जा रहा है। जगाधरी रोड पर अमर उजाला की टीम ने पहले जिस सेंटर से प्रदूषण की जांच कराई, उसे बाइक के मॉडल के अलावा अन्य जानकारी नहीं मांगी। चंद सेकेंड में बाइक का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र निकालकर थमा दिया। जब उससे इस संदर्भ में पूछा गया कि उसने ठीक प्रकार से प्रदूषण की जांच क्यों नहीं की, तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसके अलावा उसने अपने सेंटर पर लगाए गए रजिस्टर में वाहन की एंट्री इत्यादि भी नहीं की।
कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को शिकायत का इंतजार
यमुनानगर में जितने भी प्रदूषण जांच केंद्र हैं, उन्हें आरटीए विभाग द्वारा वाहनों के प्रदूषण जांच के लिए अधिकृत किया गया है। विभाग की जिम्मेदारी होती है कि वह नियमित रूप से चेक करें कि प्रदूषण जांच केंद्र सही प्रकार से अपना काम कर रहे हैं या नहीं। लेकिन शहर में न तो विभाग और न ही प्रदूषण जांच केंद्र सही प्रकार से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। प्रदूषण जांच केंद्र जहां बिना चेकिंग के सर्टिफिकेट जारी कर रहे हैं वहीं, संबंधित विभाग के अधिकारियों को उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शिकायत का इंतजार है।
वर्जन ::::::::
जिस प्रदूषण जांच केंद्र ने बिना पोल्युशन चेक किए सर्टिफिकेट जारी किया है, उसके खिलाफ लिखित में शिकायत दो, साथ में उस सर्टिफिकेट की कॉपी भी दी जाए, जो उसके द्वारा जारी किया गया है, उसके उपरांत ही उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
कुशल कटारिया, सचिव, आरटीए विभाग, यमुनानगर।