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फैक्ट्री मालिक प्रवासी मजदूरों को नहीं दे रहे फरवरी व मार्च का वेतन, जताया रोष

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2020 07:37 PM IST
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Plywood factory owners are not giving salary to migrant laborers for February and March, expressed anger
जानकारी देते प्रवासी मजदूर। - फोटो : AMAR UJALA
यमुनानगर
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कोरोना वायरस की महामारी के बीच एक ओर जहां गरीब और असहाय लोगों को मदद पहुंचाने के लिए तमाम समाजिक संगठन तन-मन-धन से जुटे हुए हैं। वही प्रवासी मजदूरों को प्लाईवुड फैक्ट्री मालिकों द्वारा उनको पिछले दो माह से मजदूरी नहीं दी गई है। जागरूक मजदूर संगठन के संस्थापक सीताराम ने बताया कि जिन फैक्ट्रियों में वह काम करते थे वहां के मालिक उन्हें फरवरी और मार्च माह की भी मजदूरी नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस एवं लॉकडाउन में सबसे ज्यादा समस्या प्रवासी मजदूर के लिए उत्पन हुई है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के 40 दिन बीतने के बाद भी प्रवासी मजदूरों का फरवरी और मार्च महीने का वेतन मालिकों द्वारा नहीं दिया गया है। जिसके चलते प्रवासी मजदूरों के लिए भुखमरी की समस्या बन गई हैं, आवागमन की व्यवस्था बंद रहने के कारण भुखमरी से तड़पते प्रवासी मजदूर अपने-अपने गंतव्य तक पैदल ही जाने को मजबूर हैं। प्रवासी मजदूरों पर दिन-प्रतिदिन राशन का पैसा, मकान किराए का बोझ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। जो गहरी चिंता का विषय है। एक तरफ मजदूरों का काम बंद है, दूसरी तरफ मजदूरों पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। उन्होंने सरकार एवं प्रशासन से अनुरोध करते हुए कहा कि जिन प्रवासी मजदूरों का फरवरी व मार्च महीने का वेतन रुका हुआ है प्लाईवुड कंपनी मालिकों से दिलाने की व्यवस्था करें, ताकि प्रवासी मजदूर अपना व अपने परिवार का पोषण कर सके। चंदन, केदार, मुन्ना, राजेंद्र, प्रमोद, गुरुदली, रमेश, दिनेश, ओम मजदूरों ने प्लाईवुड मालिकों पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर मालिक से वेतन की मांग की जाती है तो वह सीधे कहते हैं कि प्लाई ले जाओ और उसको बेच करके अपनी मजदूरी पूरी कर लो। ऐसे में वे प्लाई लेकर कहां जाए। हमारे सामने तो भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो गई है। अब तो हमारे पास राशन भी नहीं बचा और ना हीं पैसे है ऐसे में कहां जाए।
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