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खतरों के साये में खेल रहे नौनिहाल
यमुनानगर
Updated Sat, 24 May 2014 11:56 PM IST
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विभाग की लापरवाही कभी भी हादसे के रूप में नौनिहालों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
विभाग ने रामपुरा कॉलोनी के राजकीय स्कूल में जर्जर भवन को कंडम घोषित कर बच्चाें को नए भवन में शिफ्ट तो कर दिया, किंतु कंडम भवन को गिराना भूल गया। तीन वर्ष बाद भी कंडम भवन को गिराया नहीं जा सकता है, जो अब कभी भी ढह सकता है।
इसके आसपास रोजाना आधी छुट्टी के समय खेलते बच्चे हादसे का शिकार हो सकते हैं।
बता दें कि रामपुरा कॉलोनी में राजकीय माध्यमिक स्कूल में जर्जर भवन को 2011 में कंडम घोषित कर विभाग ने स्कूल प्रांगण में ही नए भवन का निर्माण कर बच्चों को उसमें शिफ्ट कर दिया था। इसके बाद कंडम भवन को गिराने के लिए टेंडर और वर्क अलॉट की प्रक्रिया में दो वर्ष का समय लग गया।
इसके एक वर्ष बाद भी कंडम भवन को गिराया नहीं जा सका है। हालात यूं है कि कंडम भवन के आसपास रोजाना बच्चे खेलते और मंडारते रहते हैं। ऐसे में कभी भी कंडम भवन ढहने से बड़ा हादसा हो सकता है।
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दीवारों में आईं दरारें, सीलन से छत हुई कमजोर
और ऊपर से सीमेंट उखड़ कर गिरने लगा है। भवन के कभी भी ढहने की आशंका के चलते स्कूल स्टाफ द्वारा बार-बार बच्चाें को भवन के पास जाने से रोका जाता है, किंतु आधी छुट्टी के समय बच्चे स्कूल प्रांगण में लगे झूलों तक पहुंचने व खेलकूद में जर्जर भवन के आसपास मंडराते रहते हैं।
स्कूल में पढ़ रहे 90 बच्चे
स्कूल में मौजूदा समय में 90 बच्चे पढ़ रहे हैं। जो टीचर्स के बार-बार मना करने पर भी कंडम घोषित भवन के आसपास खेलते हैं। चूंकि जिस नए भवन में बच्चाें को शिफ्ट किया गया है, वहां से स्कूल प्रांगण में लगे झूलों तक पहुंचने के लिए बच्चों को कंडम घोषित भवन के पास से गुजरना पड़ता है। इसके अलावा कंडम भवन के साथ ही मिड-डे मील बनता है, जहां खाना खाने और बर्तन रखने को बच्चों को आना-जाना पड़ता है।
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विभाग ने रामपुरा कॉलोनी के राजकीय स्कूल में जर्जर भवन को कंडम घोषित कर बच्चाें को नए भवन में शिफ्ट तो कर दिया, किंतु कंडम भवन को गिराना भूल गया। तीन वर्ष बाद भी कंडम भवन को गिराया नहीं जा सकता है, जो अब कभी भी ढह सकता है।
इसके आसपास रोजाना आधी छुट्टी के समय खेलते बच्चे हादसे का शिकार हो सकते हैं।
बता दें कि रामपुरा कॉलोनी में राजकीय माध्यमिक स्कूल में जर्जर भवन को 2011 में कंडम घोषित कर विभाग ने स्कूल प्रांगण में ही नए भवन का निर्माण कर बच्चों को उसमें शिफ्ट कर दिया था। इसके बाद कंडम भवन को गिराने के लिए टेंडर और वर्क अलॉट की प्रक्रिया में दो वर्ष का समय लग गया।
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इसके एक वर्ष बाद भी कंडम भवन को गिराया नहीं जा सका है। हालात यूं है कि कंडम भवन के आसपास रोजाना बच्चे खेलते और मंडारते रहते हैं। ऐसे में कभी भी कंडम भवन ढहने से बड़ा हादसा हो सकता है।
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दीवारों में आईं दरारें, सीलन से छत हुई कमजोर
और ऊपर से सीमेंट उखड़ कर गिरने लगा है। भवन के कभी भी ढहने की आशंका के चलते स्कूल स्टाफ द्वारा बार-बार बच्चाें को भवन के पास जाने से रोका जाता है, किंतु आधी छुट्टी के समय बच्चे स्कूल प्रांगण में लगे झूलों तक पहुंचने व खेलकूद में जर्जर भवन के आसपास मंडराते रहते हैं।
स्कूल में पढ़ रहे 90 बच्चे
स्कूल में मौजूदा समय में 90 बच्चे पढ़ रहे हैं। जो टीचर्स के बार-बार मना करने पर भी कंडम घोषित भवन के आसपास खेलते हैं। चूंकि जिस नए भवन में बच्चाें को शिफ्ट किया गया है, वहां से स्कूल प्रांगण में लगे झूलों तक पहुंचने के लिए बच्चों को कंडम घोषित भवन के पास से गुजरना पड़ता है। इसके अलावा कंडम भवन के साथ ही मिड-डे मील बनता है, जहां खाना खाने और बर्तन रखने को बच्चों को आना-जाना पड़ता है।