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Yamuna Nagar News: तेज बुखार के साथ बच्चों में घट रहे प्लेटलेट्स
Mon, 19 Oct 2026 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 19 Oct 2026 01:46 AM IST
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जिला अस्पताल में बच्चे की जांच करते डॉ. हरिंद्र सिंह संधू। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बच्चों में तेज बुखार के साथ प्लेटलेट्स तेजी से घटने के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे लक्षणों वाले कई बच्चों में शुरुआती डेंगू जांच में संक्रमण की पुष्टि नहीं हो पा रही है। इसके बाद एनएस-1 और आईजीएम टेस्ट कराने पर कुछ मामलों की पहचान हो रही है। ऐसे में बच्चों की सेहत को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
जिला नागरिक अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ हैं। चिकित्सकों के पास रोजाना औसतन 150 से 160 बच्चों की ओपीडी होती है। इनमें से 80 प्रतिशत तो वायरल की चपेट में आने वाले बच्चे हैं। वहीं 10 से 12 बच्चे ऐसे पहुंच रहे हैं, जिन्हें तेज बुखार की शिकायत है और उनके प्लेटलेट्स भी तेजी से कम हो रहे हैं।
हालांकि शुरुआती डेंगू जांच में इन बच्चों में संक्रमण की पुष्टि नहीं हो पा रही है। ऐसे मामलों में चिकित्सक लक्षणों और बीमारी की अवधि के अनुसार आगे की जांच कराने की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हरिंद्र सिंह संधू का कहना है कि कई मामलों में डेंगू की जांच कराने के बावजूद संक्रमण पकड़ में नहीं आ रहा है।
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उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों की सेहत को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। यदि बच्चे को तेज बुखार है या उसकी तबीयत में लगातार गिरावट आ रही है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार जरूरी जांच करानी चाहिए, ताकि बीमारी का समय पर पता लगाकर उचित उपचार किया जा सके। बच्चों में बुखार लंबे समय तक बने रहने, अत्यधिक कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
एनएस-1 और आईजीएम टेस्ट करा रहे चिकित्सक
एनएस-1 और आईजीएम दोनों डेंगू की पहचान के लिए किए जाने वाले रक्त परीक्षण हैं। एनएस-1 टेस्ट डेंगू वायरस के एक विशेष प्रोटीन का पता लगाता है। यह बीमारी के शुरुआती दिनों में संक्रमण की पहचान करने में मददगार होता है। यह टेस्ट शुरुआती पांच दिनों में होता है। वहीं आईजीएम टेस्ट शरीर में डेंगू वायरस के खिलाफ बनने वाली एंटीबॉडी का पता लगाता है। यह आमतौर पर बीमारी शुरू होने के पांच दिन बाद सकारात्मक हो सकता है।
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यमुनानगर। बच्चों में तेज बुखार के साथ प्लेटलेट्स तेजी से घटने के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे लक्षणों वाले कई बच्चों में शुरुआती डेंगू जांच में संक्रमण की पुष्टि नहीं हो पा रही है। इसके बाद एनएस-1 और आईजीएम टेस्ट कराने पर कुछ मामलों की पहचान हो रही है। ऐसे में बच्चों की सेहत को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
जिला नागरिक अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ हैं। चिकित्सकों के पास रोजाना औसतन 150 से 160 बच्चों की ओपीडी होती है। इनमें से 80 प्रतिशत तो वायरल की चपेट में आने वाले बच्चे हैं। वहीं 10 से 12 बच्चे ऐसे पहुंच रहे हैं, जिन्हें तेज बुखार की शिकायत है और उनके प्लेटलेट्स भी तेजी से कम हो रहे हैं।
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हालांकि शुरुआती डेंगू जांच में इन बच्चों में संक्रमण की पुष्टि नहीं हो पा रही है। ऐसे मामलों में चिकित्सक लक्षणों और बीमारी की अवधि के अनुसार आगे की जांच कराने की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हरिंद्र सिंह संधू का कहना है कि कई मामलों में डेंगू की जांच कराने के बावजूद संक्रमण पकड़ में नहीं आ रहा है।
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उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों की सेहत को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। यदि बच्चे को तेज बुखार है या उसकी तबीयत में लगातार गिरावट आ रही है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार जरूरी जांच करानी चाहिए, ताकि बीमारी का समय पर पता लगाकर उचित उपचार किया जा सके। बच्चों में बुखार लंबे समय तक बने रहने, अत्यधिक कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
एनएस-1 और आईजीएम टेस्ट करा रहे चिकित्सक
एनएस-1 और आईजीएम दोनों डेंगू की पहचान के लिए किए जाने वाले रक्त परीक्षण हैं। एनएस-1 टेस्ट डेंगू वायरस के एक विशेष प्रोटीन का पता लगाता है। यह बीमारी के शुरुआती दिनों में संक्रमण की पहचान करने में मददगार होता है। यह टेस्ट शुरुआती पांच दिनों में होता है। वहीं आईजीएम टेस्ट शरीर में डेंगू वायरस के खिलाफ बनने वाली एंटीबॉडी का पता लगाता है। यह आमतौर पर बीमारी शुरू होने के पांच दिन बाद सकारात्मक हो सकता है।