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Yamuna Nagar News: अधर में प्लांट, मैली हो रही यमुना
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने के प्रयास अंजाम तक नहीं पहुंच रहे हैं। फैक्टरियों का प्रदूषित पानी सीधे यमुना नदी में बहाया जा रहा है। हालांकि, विभाग ने 19.50 एमएलडी क्षमता का सीईटी प्लांट लगाने का प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा था। लेकिन अभी तक प्रस्ताव को शासन से मंजूरी नहीं मिली है।
जगाधरी में काफी संख्या में छोटी-बड़ी फैक्टरियां हैं। जहां से प्रतिदिन कैमिकल युक्त प्रदूषित पानी निकलता है। यह पानी ड्रेन से होते हुए सीधा यमुना नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। कुछ समय पहले फैक्टरियों से निकलने वाले गंदे और केमिकल युक्त पानी को सीधे यमुना नदी में न बहाकर काॅमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के माध्यम से ट्रीट करने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसके लिए जगाधरी में 19.50 एमएलडी का एक प्लांट लगाया जाना है। यह है कि यह प्लांट जगाधरी में पहले से मौजूद सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पास ही लगाया जाना है। जिससे सभी फैक्टरियों का गंदा पानी एकत्र कर ट्रीटमेंट के बाद डिच ड्रेन के माध्यम से यमुना नदी तक पहुंचाया जाएगा।
जगाधरी में बनने वाले सीईटीपी प्लांट के लिए डीपीआर तैयार कर सरकार को भेजी जा चुकी है। करीब 65 एकड़ जमीन में लगने वाले इस प्लांट पर करीब 105 करोड़ रुपये खर्च आएगा। पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव को शासन को भेजा जा चुका है। अभी शासन स्तर पर फाइनल नहीं हुआ है।
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इस मामले में पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग के एसडीओ लाल सिंह ने बताया कि प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है। आगे की प्रक्रिया को शासन स्तर पर ही पूरा किया जाना है।
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यमुनानगर। यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने के प्रयास अंजाम तक नहीं पहुंच रहे हैं। फैक्टरियों का प्रदूषित पानी सीधे यमुना नदी में बहाया जा रहा है। हालांकि, विभाग ने 19.50 एमएलडी क्षमता का सीईटी प्लांट लगाने का प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा था। लेकिन अभी तक प्रस्ताव को शासन से मंजूरी नहीं मिली है।
जगाधरी में काफी संख्या में छोटी-बड़ी फैक्टरियां हैं। जहां से प्रतिदिन कैमिकल युक्त प्रदूषित पानी निकलता है। यह पानी ड्रेन से होते हुए सीधा यमुना नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। कुछ समय पहले फैक्टरियों से निकलने वाले गंदे और केमिकल युक्त पानी को सीधे यमुना नदी में न बहाकर काॅमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के माध्यम से ट्रीट करने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसके लिए जगाधरी में 19.50 एमएलडी का एक प्लांट लगाया जाना है। यह है कि यह प्लांट जगाधरी में पहले से मौजूद सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पास ही लगाया जाना है। जिससे सभी फैक्टरियों का गंदा पानी एकत्र कर ट्रीटमेंट के बाद डिच ड्रेन के माध्यम से यमुना नदी तक पहुंचाया जाएगा।
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जगाधरी में बनने वाले सीईटीपी प्लांट के लिए डीपीआर तैयार कर सरकार को भेजी जा चुकी है। करीब 65 एकड़ जमीन में लगने वाले इस प्लांट पर करीब 105 करोड़ रुपये खर्च आएगा। पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव को शासन को भेजा जा चुका है। अभी शासन स्तर पर फाइनल नहीं हुआ है।
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इस मामले में पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग के एसडीओ लाल सिंह ने बताया कि प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है। आगे की प्रक्रिया को शासन स्तर पर ही पूरा किया जाना है।