फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Now the dream will come true, Saraswati river will flow

अब साकार होगा सपना, बहेगी सरस्वती नदी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jan 2022 01:15 AM IST
विज्ञापन
Now the dream will come true, Saraswati river will flow
आदिबद्री स्थित सरस्वती उद्गम स्थल - फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। पंचकूला में एमओयू पर हस्ताक्षर होते ही अब सरस्वती नदी में भी जल्द ही धरा पर बहेगी। वहीं डैम व बैराज बनने से कई गांवों को बाढ़ से मुक्ति मिलेगी और सूखाग्रस्त क्षेत्रों को पानी मिलेगा।
विज्ञापन

बता दें यह नदी हरियाणा के यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, फतेहाबाद और सिरसा होते हुए राजस्थान में प्रवेश कर जाती है। यह राजस्थान के सात जिलों में होती हुई गुजरात में प्रवेश करती है। इस नदी के पुनर्जन्म के लिए दो स्तर पर काम हुआ। पहले वेद-पुराण समेत धार्मिक ग्रंथों से सरस्वती नदी के बारे में तमाम तथ्य जुटाए गए। इसके बाद उद्गम स्थल ढूंढने को हरियाणा का राजस्व रिकार्ड खंगाला गया था। सरस्वती नदी का उद्गम स्थल यमुनानगर जिले का आदिबद्री ही है।
विज्ञापन

फसलें खराब होने से बचेंगी
सरस्वती नदी, चतंग नदी, शाहबाद डिस्ट्रीब्यूटरी, मारकंडा नदी, राक्षी नदी समेत कई नदियां हर साल हरियाणा के विभिन्न इलाकों में बाढ़ से तबाही मचाती हैं। जिससे प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की फसलें नष्ट होती हैं। हर साल सरकार को उसका मुआवजा देना पड़ता है। सरस्वती नदी के धरा पर आने के बाद इस समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा। इन सभी नदियों का पानी सरस्वती नदी में लाया जाएगा। सरस्वती नदी में कई स्थानों पर पानी इकट्ठा करके उन्हें सिंचाई और अन्य कामों के लिए प्रयोग किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

आदिबद्री से लेकर पिहोवा तक बनेंगे 20 जलाशय
नदी किनारे सरोवर बनाए जाएंगे। इसके लिए कई पंचायतों ने जमीन देने की पेशकश की है। एक साल में सरस्वती के उद्गम स्थल आदिब्रदी से लेकर पिहोवा तक 20 बड़े जलाशय (सरोवर) बनाने का लक्ष्य है, ताकि इनमें बरसाती पानी का संचय कर नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके। सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की योजना के अंतर्गत रामपुरा हेरियां, रामपुरा कंबोयान, बोहली, मछरौली, संगौर, मुकुरपुर व स्योंसर में जलाशय बनाए जाएंगे। रामपुरा कंबोयान में 350 एकड़ भूमि पर बड़ा जलाशय बनाया जाएगा जिसमें 300 क्यूसेक पानी को इकट्ठा करने की क्षमता होगी। सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड के वाइस चेयरमैन धूमन सिंह किरमिच का कहना है कि फिलहाल जितनी खोदाई सरस्वती नदी के लिए हुई है, उसके दोनों तरफ 6 हजार से अधिक पेड़ लगाने की शुरुआत की जा रही है।

सात साल पहले खोदाई का कार्य शुरू हुआ था
बता दें सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रांत संघ चालक दर्शन लाल जैन ने दो दशकों तक काफी संघर्ष किया। उनके प्रयास से ही वर्ष 2014 में विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल गुर्जर के अध्यक्षता में बिलासपुर उपमंडल के गांव रूलाहेडी में सरस्वती नदी के लिए खोदाई का कार्य शुरू किया। उनकी इस कठिन मेहनत के कारण ही उनको सरकार ने पद्मभूषण के सम्मान से नवाजा था। खोदाई करते हुए गांव मुगलावाली में सरस्वती नदी की जल धारा फूट गई थी। जिसके बाद यहां पर राज्य व केंद्रीय सरकार के कई मंत्री पूजा अर्चना के लिए पहुंचे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed