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कोरोना का डर बरकरार, 520 दिन बाद स्कूल पहुंचे नौनिहाल
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स्कूल में पहले दिन पहुंचे बच्चे और पढ़ा रहीं अध्यापिका। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। अभिभावकों में कोरोना संक्रमण का डर अभी तक बरकरार है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित है। यही कारण है कि डेढ़ साल बाद स्कूल खुलने पर भी जिले के कई स्कूलों में कक्षा एक से तीन तक का एक भी विद्यार्थी नहीं पहुंचा। वहीं अन्य स्कूलों में पहले दिन उपस्थिति न के बराबर रही। कुछ स्कूल में संख्या दस तक भी नहीं पहुंच पाई। इस दौरान जिले में पहले दिन कक्षा एक से तीन के विद्यार्थियों की उपस्थिति कुल पांच प्रतिशत ही रही।
संक्रमण का प्रभाव कम होने पर सरकार की ओर से कक्षा एक से तीन के विद्यार्थियों को आधी और तिहाई संख्या के अनुसार बुलाने की अनुमति दी गई है। अभिभावकों में छोटे बच्चों को लेकर चिंता है। 520 बाद भी अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। गांव दौलतपुर में करीब 40, गांव रायपुर में करीब 15, जगाधरी के सांस्कृतिक स्कूल में शून्य, डीएवी स्कूल में लगभग 10, रतनपुरा स्कूल में शून्य, इंदिरा कॉलोनी स्कूल में शून्य, पांसरा स्कूल में लगभग 30 प्रतिशत हाजिरी रही। जिले में औसतन सरकारी स्कूलों में उपस्थिति पांच और निजी स्कूलों में दस प्रतिशत उपस्थिति रही।
जिले के विभिन्न स्कूलों में पहले दिन विद्यार्थी नहीं पहुंचे, उनकी जगह अभिभावक पहुंच गए। यहां अभिभावकों ने अध्यापकों व मुख्याध्यापक से बातचीत की। अभिभावकों ने प्रबंधकों से बच्चों की सुरक्षा संबंधी बंदोबस्त के बारे पूछा। वहीं कोरोना संक्रमण से बचाव संबंधी प्रबंधों के बारे में भी जानकारी ली। इस दौरान अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित दिखाई दिए। अध्यापकों ने अभिभावकों की शंकाएं दूर की।
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नाम पता नहीं सही, हो रही मुश्किल
अध्यापकों को विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने के लिए संदेश देने में परेशानी हो रही है। चूंकि अधिकांश विद्यार्थियों के नाम और पता सही नहीं है। विद्यार्थियों के दाखिला बिना किसी दस्तावेज के कर दिया था। उस समय दिया गया नंबर कॉल करने पर नहीं मिला। जिस कारण अभिभावकों को सूचना नहीं दी जा पाई है।
पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या कम रही। अधिकांश अभिभावकों तक संदेश नहीं पहुंच पाए। वहीं अभिभावक भी बच्चों को लेकर चिंतित है। अभिभावकों को प्रेरित किया जाएगा। एक दो दिन में बच्चों की उपस्थिति अपेक्षाकृत हो जाएगी। - रामदिया गागट, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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यमुनानगर। अभिभावकों में कोरोना संक्रमण का डर अभी तक बरकरार है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित है। यही कारण है कि डेढ़ साल बाद स्कूल खुलने पर भी जिले के कई स्कूलों में कक्षा एक से तीन तक का एक भी विद्यार्थी नहीं पहुंचा। वहीं अन्य स्कूलों में पहले दिन उपस्थिति न के बराबर रही। कुछ स्कूल में संख्या दस तक भी नहीं पहुंच पाई। इस दौरान जिले में पहले दिन कक्षा एक से तीन के विद्यार्थियों की उपस्थिति कुल पांच प्रतिशत ही रही।
संक्रमण का प्रभाव कम होने पर सरकार की ओर से कक्षा एक से तीन के विद्यार्थियों को आधी और तिहाई संख्या के अनुसार बुलाने की अनुमति दी गई है। अभिभावकों में छोटे बच्चों को लेकर चिंता है। 520 बाद भी अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। गांव दौलतपुर में करीब 40, गांव रायपुर में करीब 15, जगाधरी के सांस्कृतिक स्कूल में शून्य, डीएवी स्कूल में लगभग 10, रतनपुरा स्कूल में शून्य, इंदिरा कॉलोनी स्कूल में शून्य, पांसरा स्कूल में लगभग 30 प्रतिशत हाजिरी रही। जिले में औसतन सरकारी स्कूलों में उपस्थिति पांच और निजी स्कूलों में दस प्रतिशत उपस्थिति रही।
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जिले के विभिन्न स्कूलों में पहले दिन विद्यार्थी नहीं पहुंचे, उनकी जगह अभिभावक पहुंच गए। यहां अभिभावकों ने अध्यापकों व मुख्याध्यापक से बातचीत की। अभिभावकों ने प्रबंधकों से बच्चों की सुरक्षा संबंधी बंदोबस्त के बारे पूछा। वहीं कोरोना संक्रमण से बचाव संबंधी प्रबंधों के बारे में भी जानकारी ली। इस दौरान अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित दिखाई दिए। अध्यापकों ने अभिभावकों की शंकाएं दूर की।
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नाम पता नहीं सही, हो रही मुश्किल
अध्यापकों को विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने के लिए संदेश देने में परेशानी हो रही है। चूंकि अधिकांश विद्यार्थियों के नाम और पता सही नहीं है। विद्यार्थियों के दाखिला बिना किसी दस्तावेज के कर दिया था। उस समय दिया गया नंबर कॉल करने पर नहीं मिला। जिस कारण अभिभावकों को सूचना नहीं दी जा पाई है।
पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या कम रही। अधिकांश अभिभावकों तक संदेश नहीं पहुंच पाए। वहीं अभिभावक भी बच्चों को लेकर चिंतित है। अभिभावकों को प्रेरित किया जाएगा। एक दो दिन में बच्चों की उपस्थिति अपेक्षाकृत हो जाएगी। - रामदिया गागट, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।