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Yamuna Nagar News: बदलते गए तीर्थों के नाम, कुछ वजूद खो चुके
Wed, 31 Jan 2024 04:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 31 Jan 2024 04:07 AM IST
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साहिल घई
साढौरा। महर्षि वेद व्यास जी द्वारा रचित स्कंदपुराण के हिमाद्रि खंड में आदिबद्री क्षेत्र के महात्मय का जिक्र करते हुए यहां सरस्वती नदी व 108 तीर्थ मौजूद होने की बात कही गई है। इनमें से अधिकांश तीर्थों के नाम बदले जा चुके हैं। तो बाकी तीर्थ एक लंबा अरसा बीत जाने के कारण अपना वजूद खो चुके हैं।
इतिहासकारों का मानना है कि स्कंद पुराण में वर्णित तीर्थों की अगर अब खोज की जाए तो इस क्षेत्र को नई पहचान मिल जाएगी। हरियाणा साहित्य रत्न से सम्मानित स्वर्गीय सोमनाथ शांडिल्य ने स्कंद पुराण के आदिबद्री क्षेत्र महात्म्य का हिन्दी में सरल अनुवाद करके इन तीर्थों की पहचान करने का सफल प्रयास किया था। उनके अनुसार इस अध्याय में वर्णित तीर्थों का प्रदक्षिणा क्रम से सटीक वर्णन किया गया है।
स्कंद पुराण में लिखा गया है कि आदिबद्री क्षेत्र में 19 नदियां, 12 लिंग, 34 कुंड, 10 ऋषि सरोवर व ऋषि मुनियों के 25 आश्रम हैं। इसके अलावा 4 ऋषि कूप, दो वर्षा पूरित तालाब व दो देवपूरियां भी हैं। स्कंद पुराण के आदिबद्री क्षेत्र महात्म्य के संस्कृत में लिखे 12 वें श्लोक में इस क्षेत्र में पौराणिक सरस्वती नदी की मौजूदगी दिखाई गई है। इसी अध्याय के 23, 24, व 27 वें श्लोकों में बदरी व केदार लिंग के होने का भी वर्णन है।
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स्कंदपुराण के आदिबद्री क्षेत्र महात्म्य में व्यास कुंड वर्तमान में बिलासपुर, चंद्रकुंड वर्तमान में चंदाखेड़ी, मछोदरी वर्तमान में मछरौली, मखेश्वर वर्तमान में मखौर, सिद्धेश्वर वर्तमान मं संधाय, भद्रावती वर्तमान में बधावली सहित अनेक तीर्थों के बारे जानकारी दी गई है।
साढौरा कस्बे में वर्तमान में मौजूद गगड़वाला सरोवर को पौराणिक काल में महर्षि गर्ग का आश्रम व गर्ग सरोवर होने बारे लिखा गया है। इसके अलावा वर्तमान में साढौरा के नाम से प्रसिद्ध जगह को पौराणिक काल में सिद्धेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध होने बारे लिखा गया है। संवाद
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साढौरा। महर्षि वेद व्यास जी द्वारा रचित स्कंदपुराण के हिमाद्रि खंड में आदिबद्री क्षेत्र के महात्मय का जिक्र करते हुए यहां सरस्वती नदी व 108 तीर्थ मौजूद होने की बात कही गई है। इनमें से अधिकांश तीर्थों के नाम बदले जा चुके हैं। तो बाकी तीर्थ एक लंबा अरसा बीत जाने के कारण अपना वजूद खो चुके हैं।
इतिहासकारों का मानना है कि स्कंद पुराण में वर्णित तीर्थों की अगर अब खोज की जाए तो इस क्षेत्र को नई पहचान मिल जाएगी। हरियाणा साहित्य रत्न से सम्मानित स्वर्गीय सोमनाथ शांडिल्य ने स्कंद पुराण के आदिबद्री क्षेत्र महात्म्य का हिन्दी में सरल अनुवाद करके इन तीर्थों की पहचान करने का सफल प्रयास किया था। उनके अनुसार इस अध्याय में वर्णित तीर्थों का प्रदक्षिणा क्रम से सटीक वर्णन किया गया है।
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स्कंद पुराण में लिखा गया है कि आदिबद्री क्षेत्र में 19 नदियां, 12 लिंग, 34 कुंड, 10 ऋषि सरोवर व ऋषि मुनियों के 25 आश्रम हैं। इसके अलावा 4 ऋषि कूप, दो वर्षा पूरित तालाब व दो देवपूरियां भी हैं। स्कंद पुराण के आदिबद्री क्षेत्र महात्म्य के संस्कृत में लिखे 12 वें श्लोक में इस क्षेत्र में पौराणिक सरस्वती नदी की मौजूदगी दिखाई गई है। इसी अध्याय के 23, 24, व 27 वें श्लोकों में बदरी व केदार लिंग के होने का भी वर्णन है।
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स्कंदपुराण के आदिबद्री क्षेत्र महात्म्य में व्यास कुंड वर्तमान में बिलासपुर, चंद्रकुंड वर्तमान में चंदाखेड़ी, मछोदरी वर्तमान में मछरौली, मखेश्वर वर्तमान में मखौर, सिद्धेश्वर वर्तमान मं संधाय, भद्रावती वर्तमान में बधावली सहित अनेक तीर्थों के बारे जानकारी दी गई है।
साढौरा कस्बे में वर्तमान में मौजूद गगड़वाला सरोवर को पौराणिक काल में महर्षि गर्ग का आश्रम व गर्ग सरोवर होने बारे लिखा गया है। इसके अलावा वर्तमान में साढौरा के नाम से प्रसिद्ध जगह को पौराणिक काल में सिद्धेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध होने बारे लिखा गया है। संवाद