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Yamuna Nagar News: बलिदान दिवस पर नामधारी संतों को किया याद
Wed, 07 Aug 2024 02:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 07 Aug 2024 02:42 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कूका गोरक्षा आंदोलन में बलिदान नामधारी संतों की याद में हरिपुर में कार्यक्रम हुआ। आयोजन गोसंवर्धन न्यास की ओर से किया गया। संस्था के पदाधिकारियों व सदस्यों ने ग्रामीणों सहित मंगल सिंह, मस्तान सिंह व गुरमुख सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में तीनों संतों की आत्मा की शांति के लिए मौन रखा गया।
रोहित चौधरी ने कहा कि अंग्रेजों द्वारा किए घोर कृत्य को कभी भुलाया नहीं जा सकता। सन् 1870 में कूका आंदोलन ने जन-जन तक अपनी पहुंच बना ली थी। अंग्रेज आंदोलन को कुचलना चाहते थे। अंग्रेजों ने भारत भूमि पर सनातन संस्कृति को नष्ट करने के लिए पूजनीय पवित्र गोवंश को काटने के लिए अमृतसर व रायकोट में कत्लखाने खोले। उस समय गुरु रामसिंह के शिष्यों ने उन कत्लखानों को तोड़ डाला और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल बजा दिया।
मंगल सिंह, मस्तान सिंह व गुरमुख सिंह भी रायकोट का कत्लखाना तोड़ने में अग्रणी थे। अंग्रेजों ने इन तीनों को पांच अगस्त 1871 को रायकोट में फांसी पर लटका दिया था। जिला संयोजक विवेक बोहता ने कहा कि संस्था की ओर से संकल्प लिया गया कि गोमाता की सुरक्षा व संरक्षण के लिए और तेजी से कार्य किया जाएगा। इस मौके पर विजयानंद महाराज, पंंडित सुबोध कोठियाल, विवेक बोहता, हरीश शर्मा, जशदेव निवाजपुर, तनुज, हेमंत धीमान, टेकचंद, राजेश आदि मौजूद रहे।
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यमुनानगर। कूका गोरक्षा आंदोलन में बलिदान नामधारी संतों की याद में हरिपुर में कार्यक्रम हुआ। आयोजन गोसंवर्धन न्यास की ओर से किया गया। संस्था के पदाधिकारियों व सदस्यों ने ग्रामीणों सहित मंगल सिंह, मस्तान सिंह व गुरमुख सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में तीनों संतों की आत्मा की शांति के लिए मौन रखा गया।
रोहित चौधरी ने कहा कि अंग्रेजों द्वारा किए घोर कृत्य को कभी भुलाया नहीं जा सकता। सन् 1870 में कूका आंदोलन ने जन-जन तक अपनी पहुंच बना ली थी। अंग्रेज आंदोलन को कुचलना चाहते थे। अंग्रेजों ने भारत भूमि पर सनातन संस्कृति को नष्ट करने के लिए पूजनीय पवित्र गोवंश को काटने के लिए अमृतसर व रायकोट में कत्लखाने खोले। उस समय गुरु रामसिंह के शिष्यों ने उन कत्लखानों को तोड़ डाला और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल बजा दिया।
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मंगल सिंह, मस्तान सिंह व गुरमुख सिंह भी रायकोट का कत्लखाना तोड़ने में अग्रणी थे। अंग्रेजों ने इन तीनों को पांच अगस्त 1871 को रायकोट में फांसी पर लटका दिया था। जिला संयोजक विवेक बोहता ने कहा कि संस्था की ओर से संकल्प लिया गया कि गोमाता की सुरक्षा व संरक्षण के लिए और तेजी से कार्य किया जाएगा। इस मौके पर विजयानंद महाराज, पंंडित सुबोध कोठियाल, विवेक बोहता, हरीश शर्मा, जशदेव निवाजपुर, तनुज, हेमंत धीमान, टेकचंद, राजेश आदि मौजूद रहे।
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