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मारवाकलां में दिखा तेंदुआ, ग्रामीणों में दहशत
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बिलासपुर। मारवाकलां गांव के खेतों में तेंदुआ दिखाई देने से ग्रामीणों में दशहत है। तेंदुए की खबर मिलने के बाद लोगों ने गांव से बाहर जाना बंद कर दिया है। छोटे बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने दिन ढलते ही पालतू जानवरों को सुरक्षित स्थानों पर बांधना शुरू कर दिया। तेंदुए के खौफ के कारण खेतों के साथ लगते घरों पर लोग रात को पहरा दे रहे हैं। खेत में ग्रामीण चार-पांच लोगों का झुंड बनाकर जा रहे हैं, ताकि जानवर से बचा जा सके। गांव में तेंदुआ दिखने की खबर सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुई। इसमें लोगों को गांव के पास न आने के लिए सतर्क किया जा रहा था।
मारवा खुर्द के किसानों को जंगल के पास खेतों में मंगलवार देर रात करीब साढ़े नौ बजे तेंदुआ दिखाई दिया। तेंदुआ घूमता देख ग्रामीण सहम गए। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पूर्व भी कुछ किसानों को खेतों में तेंदुआ दिखाई दिया था। इसके कारण किसान खेतों की ओर जाने से बच रहे हैं। ग्रामीण सुभाष चंद और हरजिंद्र सिंह ने बताया कि रोज की तरह मंगलवार रात करीब साढ़े नौ बजे वह बाइक से खेत में पानी का नाका देखने के लिए निकले थे। इस दौरान भील छप्पर से बूटगढ़ जाने वाले पुराने मार्ग के पास एक खेत में जानवर चलता दिखाई दिया। उन्होंने फोन पर गांव के अन्य लोगों को सूचित किया। इस दौरान विक्की राणा ट्रैक्टर से घर वापस आ रहा था, वह भी मौके पहुंचा। सूचना मिलते ही गांव के अमर सिंह, प्रेम सिंह, अशोक राणा सहित अन्य ग्रामीण जमा हो गए। उन्होंने ट्रैक्टर की लाइट से जानवर के समीप जाकर देखा तो तेंदुआ दिखाई दिया। ट्रैक्टर की लाइट पड़ते ही तेंदुआ पास के खेत में लगी फसल में भाग गया। ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो माह पूर्व भी गांव के अमर सिंह और विनोद कुमार को रात को उनके खेत में तेंदुआ दिखाई दिया था। लेकिन, टार्च की रोशनी में तेंदुआ खेतों से होते हुए जंगल की ओर निकल गया था। करीब चार माह पहले भी एक व्यक्ति खेत में काम कर रहा था तो अचानक एक जानवर के बच्चे ने निकलकर उस पर हमला किया था। हमले में युवक के हाथ और पैर घायल हो गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि वन्य जीव प्राणी विभाग को जंगली जानवर के बचाव को लेकर समुचित व्यवस्था करनी चाहिए। वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक सुनील कुमार ने कहा कि गांव के पास जंगल होने के कारण अक्सर जानवर बाहर आ जाते हैं। जंगल के आसपास उनका घूमना प्राकृतिक है। ग्रामीण सावधानी बरतें, अकेले जंगल की ओर न जाएं। रात में चार पांच लोगों साथ में जंगल की तरफ ट्रॉर्च लेकर जाएं। रास्ते में बातें करते रहें। तेंदुआ इस तरह किसी पर हमला नहीं करता है। यदि गांव की तरफहोती है, तो जानवर का पता लगाकर पकड़ा जाएगा।
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मारवा खुर्द के किसानों को जंगल के पास खेतों में मंगलवार देर रात करीब साढ़े नौ बजे तेंदुआ दिखाई दिया। तेंदुआ घूमता देख ग्रामीण सहम गए। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पूर्व भी कुछ किसानों को खेतों में तेंदुआ दिखाई दिया था। इसके कारण किसान खेतों की ओर जाने से बच रहे हैं। ग्रामीण सुभाष चंद और हरजिंद्र सिंह ने बताया कि रोज की तरह मंगलवार रात करीब साढ़े नौ बजे वह बाइक से खेत में पानी का नाका देखने के लिए निकले थे। इस दौरान भील छप्पर से बूटगढ़ जाने वाले पुराने मार्ग के पास एक खेत में जानवर चलता दिखाई दिया। उन्होंने फोन पर गांव के अन्य लोगों को सूचित किया। इस दौरान विक्की राणा ट्रैक्टर से घर वापस आ रहा था, वह भी मौके पहुंचा। सूचना मिलते ही गांव के अमर सिंह, प्रेम सिंह, अशोक राणा सहित अन्य ग्रामीण जमा हो गए। उन्होंने ट्रैक्टर की लाइट से जानवर के समीप जाकर देखा तो तेंदुआ दिखाई दिया। ट्रैक्टर की लाइट पड़ते ही तेंदुआ पास के खेत में लगी फसल में भाग गया। ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो माह पूर्व भी गांव के अमर सिंह और विनोद कुमार को रात को उनके खेत में तेंदुआ दिखाई दिया था। लेकिन, टार्च की रोशनी में तेंदुआ खेतों से होते हुए जंगल की ओर निकल गया था। करीब चार माह पहले भी एक व्यक्ति खेत में काम कर रहा था तो अचानक एक जानवर के बच्चे ने निकलकर उस पर हमला किया था। हमले में युवक के हाथ और पैर घायल हो गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि वन्य जीव प्राणी विभाग को जंगली जानवर के बचाव को लेकर समुचित व्यवस्था करनी चाहिए। वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक सुनील कुमार ने कहा कि गांव के पास जंगल होने के कारण अक्सर जानवर बाहर आ जाते हैं। जंगल के आसपास उनका घूमना प्राकृतिक है। ग्रामीण सावधानी बरतें, अकेले जंगल की ओर न जाएं। रात में चार पांच लोगों साथ में जंगल की तरफ ट्रॉर्च लेकर जाएं। रास्ते में बातें करते रहें। तेंदुआ इस तरह किसी पर हमला नहीं करता है। यदि गांव की तरफहोती है, तो जानवर का पता लगाकर पकड़ा जाएगा।
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