{"_id":"cf72ed9dba374fb48b8efc294995646b","slug":"lakkad-mandi-news-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आढ़तियों ने मानकपुर मंडी में शिफ्टिंग से किया इंकार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आढ़तियों ने मानकपुर मंडी में शिफ्टिंग से किया इंकार
ब्यूरो/अमर उजाला/यमुनानगर
Updated Tue, 22 Dec 2015 11:41 PM IST
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जिले के तमाम लक्कड़ कारोबार को मानकपुर में बनी मंडी में शिफ्टिंग को लेकर एक बार फिर पेंच फंस गया है। यमुनानगर के लक्कड़ आढ़तियों ने शिफ्टिंग से इनकार कर प्रशासन से अलग मंडी बनाए जाने की मांग की है। मंगलवार को यमुनानगर आढ़ती एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में मुख्य संसदीय सचिव श्याम सिंह राणा से बातचीत की।
इसके बाद पदाधिकारियों समेत करीब डेढ़ सौ आढ़ती मुख्य संसदीय सचिव के साथ लघु सचिवालय पहुंचे। यहां एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सीपीएस के नेतृत्व में डीसी, एसडीएम व अन्य अधिकारियों से बात की। इस दौरान आढ़तियों ने कहा कि मानकपुर मंडी करीब 15 किलोमीटर दूर है, जिस कारण उन्हें कई तरह की दिक्कतों से दो-चार होना पड़ेगा। यमुनानगर के समस्त आढ़तियों ने शिफ्टिंग से इनकार कर अधिकारियों के समक्ष अलग लक्कड़ मंडी बनाए जाने की मांग रखी।
किंतु अधिकारियों ने इस मामले में असमर्थता जताते हुए इस संबंध में मुख्यमंत्री व लोकायुक्त से बात करने का आग्रह किया। उधर, सीपीएस ने आढ़तियों को जल्द मुख्यमंत्री व लोकायुक्त से बातचीत करने का आश्वासन दिया।
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लोकायुक्त के आदेश पर जिले के तमाम लक्कड़ कारोबार को मानकपुर में शिफ्ट करने को प्रशासनिक कार्रवाई अभी शुरू ही हुई थी कि यमुनानगर के लक्कड़ आढ़तियों ने इस फैसले का बायकॉट करने का मन बना लिया है। मंडी शिफ्टिंग के विरोध में यमुनानगर लक्कड़ मंडी के आढ़तियों ने मंगलवार को यमुनानगर आढ़ती एसोसिएशन के बैनर तले पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में बैठक की।
इसमें मुख्य संसदीय सचिव व रादौर विधायक श्याम सिंह राणा को बुलाया गया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप कर आढ़तियों की समस्याओं को शासन व प्रशासन के समक्ष रखने की मांग की। इसके बाद करीब डेढ़ सौ आढ़ती एसोसिएशन के बैनर तले मुख्य संसदीय सचिव श्याम सिंह राणा के नेतृत्व में डीसी से मिलने लघु सचिवालय पहुंचे। सीपीएस श्याम सिंह राणा की अध्यक्षता में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने डीसी डॉ. एसएस फुलिया, एसडीएम प्रेमचंद व अन्य अधिकारियों से बातचीत की।
इस दौरान आढ़तियों ने बताया कि वह मानकपुर लक्कड़ मंडी में शिफ्ट नहीं होना चाहते हैं। क्योंकि वह मंडी यमुनानगर से करीब 15 किलोमीटर दूर है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ अन्य कई दिक्कतें आएंगी। उन्होंने कहा कि मानकपुर मंडी में जगह कम है और दोनों शहर की लक्कड़ मंडियां एक साथ नहीं चल सकती हैं। चूंकि लकड़ी की आवक बहुत अधिक है, जिसमें यमुनानगर का कारोबार जगाधरी की तुलना में अधिक है। वह कई वर्षों से एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) पर लकड़ी खरीदने का काम कर रहे हैं।
उनकी मांग है कि यमुनानगर में उनके कारोबार के आसपास ही अलग मंडी बनाई जाए। जब तक यमुनानगर में लक्कड़ मंडी नहीं बनती, तब तक मानकपुर में उन्हें शिफ्ट न किया जाए। सीपीएस श्याम सिंह राणा ने डीसी व एसडीएम से बात करने के बाद आढ़तियों से कहा कि मामला कोर्ट का है। फिर भी वह उनकी बात को सीएम के समक्ष रखेंगे। शिफ्टिंग का समय बढ़वाने का हर संभव प्रयास करेंगे। इसके बाद आढ़ती हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष से भी मिले और अपनी मांग रखी।
रोजाना आती हैं 600 ट्रॉलियां
यमुनानगर लक्कड़ मंडी एसोसिएशन के प्रधान अशोक गुर्जर ने बताया कि मंडी में लगभग दो सौ आढ़ती हैं। यहां पर रोजाना 600 के करीब ट्रालियां आती हैं। जिले के साथ-साथ मंडी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व पंजाब राज्यों के किसान भी लकड़ी लेकर आते हैं। सबसे अधिक आवक उत्तर प्रदेश से होती है। नेशनल हाइवे पर मंडी होने से किसी को कोई नुकसान नहीं है। मंडी में आने वाले किसान अपनी ट्रालियों को सिस्टम से खड़ा करते हैं। यहां खड़ी होने वाली ट्रालियां किसी प्रकार से यातायात में बाधा नहीं बनती। इस मार्ग पर कोई शिक्षण संस्थान भी नहीं है। जिससे विद्यार्थियों को दिक्कत हो।
मीटिंग से बाहर आए डीसी को घेरा
सीपीएस श्याम सिंह राणा के साथ चल रही बैठक के दौरान डीसी डॉ. एसएस फुलिया को अचानक कहीं जाना पड़ा। जैसे ही डीसी मीटिंग से बाहर निकले तो लघु सचिवालय में खड़े आढ़तियों ने उन्हें घेर लिया। आढ़तियों की भीड़ को देखकर डीसी खुद भी रुक गए। उन्होंने आढ़तियों को केवल इतना ही कहा कि उनको किसी जरूरी काम से जाना है। सीपीएस की एसडीएम व अन्य अधिकारियों के साथ मीटिंग चल रही है। इसके बारे में सही जानकारी एसडीएम प्रेमचंद ही देंगे।
मांग पूरी नहीं हुई तो कटाई करवाएंगे बंद
यमुनानगर लक्कड़ मंडी एसोसिएशन के प्रधान अशोक गुर्जर ने बताया कि वह लोग कोर्ट के फैसले के खिलाफ नहीं है। कोर्ट का फैसला उनके लिए सर्वोपरि है। वह लोग मानकपुर लक्कड़ मंडी में शिफ्ट नहीं होना चाहते। क्योंकि वह उनसे दूर भी है और वहां अभी पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। प्रशासन की ओर से अभी 24 दिसंबर तक का समय दिया हुआ है। वह चाहते हैं कि शिफ्ट करने के समय को बढ़ाया जाए और यमुनानगर लक्कड़ मंडी अलग से बना कर दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांग की तरफ जल्द ही कोई गौर नहीं की गई तो वह 24 दिसंबर के बाद कोई ठोस निर्णय लेंगे। मांग पूरी न होने पर लक्कड़ की कटाई बंद की जा सकती है।
लोकायुक्त को मिलने गया प्रतिनिधिमंडल
प्रधान अशोक गुर्जर ने बताया कि आढ़तियों की तरफ एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को लोकायुक्त को भी मिलने गया। प्रतिनिधिमंडल में एसोसिएशन के पदाधिकारी संदीप राणा, नरेंद्र गुप्ता, बलदेव, राजेश, विनोद आदि शामिल हैं। लोकायुक्त से मिलकर वे अपनी समस्या रखेंगे।
वर्जन
प्रशासन लोकायुक्त के आदेशों की पालना कर रहा है। फैसले के अनुसार जिले में केवल एक ही मंडी हो सकती है। आढ़ती अगर यमुनानगर में अलग मंडी चाहते हैं तो अपने जन प्रतिनिधि के माध्यम से सीएम से मांग कर सकते हैं। आढ़तियों को लाइसेंस दिया जा रहा है। मंडी में जल्द ही सभी सुविधाएं उपलब्ध करवा दी जाएगी।
प्रेमचंद, एसडीएम, जगाधरी।
वर्जन
लोकायुक्त के आदेश की सरकार पालना करेंगी। यमुनानगर के आढ़ती अलग लक्कड़मंडी की मांग कर रहे है। इसके लिए वे जल्द ही मुख्यमंत्री से टाइम लेकर मिलेंगे। मुख्यमंत्री से बातचीत कर इस समस्या का समाधान निकालेंगे।
श्याम सिंह राणा, मुख्य संसदीय सचिव।
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इसके बाद पदाधिकारियों समेत करीब डेढ़ सौ आढ़ती मुख्य संसदीय सचिव के साथ लघु सचिवालय पहुंचे। यहां एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सीपीएस के नेतृत्व में डीसी, एसडीएम व अन्य अधिकारियों से बात की। इस दौरान आढ़तियों ने कहा कि मानकपुर मंडी करीब 15 किलोमीटर दूर है, जिस कारण उन्हें कई तरह की दिक्कतों से दो-चार होना पड़ेगा। यमुनानगर के समस्त आढ़तियों ने शिफ्टिंग से इनकार कर अधिकारियों के समक्ष अलग लक्कड़ मंडी बनाए जाने की मांग रखी।
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किंतु अधिकारियों ने इस मामले में असमर्थता जताते हुए इस संबंध में मुख्यमंत्री व लोकायुक्त से बात करने का आग्रह किया। उधर, सीपीएस ने आढ़तियों को जल्द मुख्यमंत्री व लोकायुक्त से बातचीत करने का आश्वासन दिया।
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लोकायुक्त के आदेश पर जिले के तमाम लक्कड़ कारोबार को मानकपुर में शिफ्ट करने को प्रशासनिक कार्रवाई अभी शुरू ही हुई थी कि यमुनानगर के लक्कड़ आढ़तियों ने इस फैसले का बायकॉट करने का मन बना लिया है। मंडी शिफ्टिंग के विरोध में यमुनानगर लक्कड़ मंडी के आढ़तियों ने मंगलवार को यमुनानगर आढ़ती एसोसिएशन के बैनर तले पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में बैठक की।
इसमें मुख्य संसदीय सचिव व रादौर विधायक श्याम सिंह राणा को बुलाया गया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप कर आढ़तियों की समस्याओं को शासन व प्रशासन के समक्ष रखने की मांग की। इसके बाद करीब डेढ़ सौ आढ़ती एसोसिएशन के बैनर तले मुख्य संसदीय सचिव श्याम सिंह राणा के नेतृत्व में डीसी से मिलने लघु सचिवालय पहुंचे। सीपीएस श्याम सिंह राणा की अध्यक्षता में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने डीसी डॉ. एसएस फुलिया, एसडीएम प्रेमचंद व अन्य अधिकारियों से बातचीत की।
इस दौरान आढ़तियों ने बताया कि वह मानकपुर लक्कड़ मंडी में शिफ्ट नहीं होना चाहते हैं। क्योंकि वह मंडी यमुनानगर से करीब 15 किलोमीटर दूर है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ अन्य कई दिक्कतें आएंगी। उन्होंने कहा कि मानकपुर मंडी में जगह कम है और दोनों शहर की लक्कड़ मंडियां एक साथ नहीं चल सकती हैं। चूंकि लकड़ी की आवक बहुत अधिक है, जिसमें यमुनानगर का कारोबार जगाधरी की तुलना में अधिक है। वह कई वर्षों से एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) पर लकड़ी खरीदने का काम कर रहे हैं।
उनकी मांग है कि यमुनानगर में उनके कारोबार के आसपास ही अलग मंडी बनाई जाए। जब तक यमुनानगर में लक्कड़ मंडी नहीं बनती, तब तक मानकपुर में उन्हें शिफ्ट न किया जाए। सीपीएस श्याम सिंह राणा ने डीसी व एसडीएम से बात करने के बाद आढ़तियों से कहा कि मामला कोर्ट का है। फिर भी वह उनकी बात को सीएम के समक्ष रखेंगे। शिफ्टिंग का समय बढ़वाने का हर संभव प्रयास करेंगे। इसके बाद आढ़ती हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष से भी मिले और अपनी मांग रखी।
रोजाना आती हैं 600 ट्रॉलियां
यमुनानगर लक्कड़ मंडी एसोसिएशन के प्रधान अशोक गुर्जर ने बताया कि मंडी में लगभग दो सौ आढ़ती हैं। यहां पर रोजाना 600 के करीब ट्रालियां आती हैं। जिले के साथ-साथ मंडी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व पंजाब राज्यों के किसान भी लकड़ी लेकर आते हैं। सबसे अधिक आवक उत्तर प्रदेश से होती है। नेशनल हाइवे पर मंडी होने से किसी को कोई नुकसान नहीं है। मंडी में आने वाले किसान अपनी ट्रालियों को सिस्टम से खड़ा करते हैं। यहां खड़ी होने वाली ट्रालियां किसी प्रकार से यातायात में बाधा नहीं बनती। इस मार्ग पर कोई शिक्षण संस्थान भी नहीं है। जिससे विद्यार्थियों को दिक्कत हो।
मीटिंग से बाहर आए डीसी को घेरा
सीपीएस श्याम सिंह राणा के साथ चल रही बैठक के दौरान डीसी डॉ. एसएस फुलिया को अचानक कहीं जाना पड़ा। जैसे ही डीसी मीटिंग से बाहर निकले तो लघु सचिवालय में खड़े आढ़तियों ने उन्हें घेर लिया। आढ़तियों की भीड़ को देखकर डीसी खुद भी रुक गए। उन्होंने आढ़तियों को केवल इतना ही कहा कि उनको किसी जरूरी काम से जाना है। सीपीएस की एसडीएम व अन्य अधिकारियों के साथ मीटिंग चल रही है। इसके बारे में सही जानकारी एसडीएम प्रेमचंद ही देंगे।
मांग पूरी नहीं हुई तो कटाई करवाएंगे बंद
यमुनानगर लक्कड़ मंडी एसोसिएशन के प्रधान अशोक गुर्जर ने बताया कि वह लोग कोर्ट के फैसले के खिलाफ नहीं है। कोर्ट का फैसला उनके लिए सर्वोपरि है। वह लोग मानकपुर लक्कड़ मंडी में शिफ्ट नहीं होना चाहते। क्योंकि वह उनसे दूर भी है और वहां अभी पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। प्रशासन की ओर से अभी 24 दिसंबर तक का समय दिया हुआ है। वह चाहते हैं कि शिफ्ट करने के समय को बढ़ाया जाए और यमुनानगर लक्कड़ मंडी अलग से बना कर दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांग की तरफ जल्द ही कोई गौर नहीं की गई तो वह 24 दिसंबर के बाद कोई ठोस निर्णय लेंगे। मांग पूरी न होने पर लक्कड़ की कटाई बंद की जा सकती है।
लोकायुक्त को मिलने गया प्रतिनिधिमंडल
प्रधान अशोक गुर्जर ने बताया कि आढ़तियों की तरफ एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को लोकायुक्त को भी मिलने गया। प्रतिनिधिमंडल में एसोसिएशन के पदाधिकारी संदीप राणा, नरेंद्र गुप्ता, बलदेव, राजेश, विनोद आदि शामिल हैं। लोकायुक्त से मिलकर वे अपनी समस्या रखेंगे।
वर्जन
प्रशासन लोकायुक्त के आदेशों की पालना कर रहा है। फैसले के अनुसार जिले में केवल एक ही मंडी हो सकती है। आढ़ती अगर यमुनानगर में अलग मंडी चाहते हैं तो अपने जन प्रतिनिधि के माध्यम से सीएम से मांग कर सकते हैं। आढ़तियों को लाइसेंस दिया जा रहा है। मंडी में जल्द ही सभी सुविधाएं उपलब्ध करवा दी जाएगी।
प्रेमचंद, एसडीएम, जगाधरी।
वर्जन
लोकायुक्त के आदेश की सरकार पालना करेंगी। यमुनानगर के आढ़ती अलग लक्कड़मंडी की मांग कर रहे है। इसके लिए वे जल्द ही मुख्यमंत्री से टाइम लेकर मिलेंगे। मुख्यमंत्री से बातचीत कर इस समस्या का समाधान निकालेंगे।
श्याम सिंह राणा, मुख्य संसदीय सचिव।