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Yamuna Nagar News: नामांकन अभियान में शिक्षकों की कमी रोड़ा
Mon, 15 Apr 2024 03:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 15 Apr 2024 03:55 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए मुख्यालय व आला अधिकारी बेहद गंभीर हैं। इसके लिएजिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी सहित तमाम अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं तबादलों के बाद जिले में हुई शिक्षकों की कमी नामांकन अभियान में रोड़ा बन गई है।
विभाग की ओर से विभिन्न गतिविधियों, रैलियों के अलावा अध्यापक घर घर जाकर लोगों को उनके बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में करवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ट्रांसफर ड्राइव के बाद विभाग का यह अभियान अब हवा हवाई बनकर रह गया है, जिले में पहले ही अध्यापकों का टोटा था। ट्रांसफर ड्राइव के बाद यह कमी और बढ़ गई है।
हालात ऐसे हैं कि कई स्कूल ऐसे हैं, कि वहां एक ही शिक्षक रह गया है। एक ही शिक्षक के बल पर पढ़ाई, नामांकन, जागरुकता कार्यक्रम सहित तमाम काम हो पाना संभव नहीं है। स्टाफ की कमी से जूझ रहे शिक्षक भी दबाव में काम करने को मजबूर हैं।
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शिक्षकों की कमी का असर नामांकन प्रक्रिया पर पड़ रहा है। अध्यापक किसी काम में अपना पूरा सहयोग नहीं दे पा रहे हैं। शिक्षकों की कमी के कारण न पढ़ाई हो पा रही है, न अध्यापक नामांकन अभियान में समय दे पा रहे हैं, न जागरूकता कार्यक्रम हो पा रहे हैं। कमी के कारण अध्यापक लोगों को उनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए प्रेरित नहीं कर पा रहे हैं।
अध्यापकों का कहना है कि वे जाते हैं, तो लोग शिक्षकों की कमी का मुद्दा उनके सामने रख देते हैं, जिसका उनके पास कोई सटीक जवाब नहीं है। अध्यापक इसे लेकर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। परंतु अभी तक इसका समाधान नहीं हो पाया है।
साल 2017 बैच के 1100 शिक्षा तबादला नीति के तहत जिले से चले गए हैं। नीति के अंतर्गत जिले में कुल 450 शिक्षक ही आए हैं। जिले में पहले ही शिक्षकों की कमी थी। ट्रांसफर के बाद 650 शिक्षक और कम हो गए हैं। तबादले के बाद चले जाने से कई स्कूलों में शिक्षक ही नहीं बचे हैं। राजकीय विद्यालय अध्यापक संघ के प्रधान महेंद्र सिंह कलेर ने कहा कि शिक्षकों की कमी के कारण नामांकन अभियान का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। इसके लिए शिक्षकों व्यवस्था करना जरूरी है।
ये हैं विद्यालयों के हालात
जिले में सबसे ज्यादा शिक्षकों की कमी बिलासपुर, छछरौली व प्रतापनगर खंड में हैं। इन खंडों में शिक्षकों की कमी के कारण क्षेत्रवासी प्रदर्शन तक कर चुके हैं। इसके अलावा कई स्कूल ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या तो अच्छी है, लेकिन शिक्षक एक या दो ही रह गए हैं। जीपीएस टोडरपुर में कुल 80 बच्चे हैं, लेकिन शिक्षक एक भी नहीं हैं। जीपीएस हमीदा में 583 बच्चों पर तीन शिक्षक रह गए हैं। जीपीएस नंबर पांच में 610 बच्चे हैं और शिक्षक सिर्फ दो हैं। रायपुर में 469 विद्यार्थी हैं और शिक्षक तीन हैं। जीपीएस दड़वा में 325 बच्चों पर तीन, जीपीएस गढ़ीमुंडो में 402 पर नौ, जीपीएस पांसरा में 250 पर दो, जीपीएस नंबर चार में 490 बच्चों पर दो शिक्षक हैं।
शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए काम किया जा रहा है। जहां शिक्षक नहीं हैं, वहां सबसे पहले व्यवस्था की जा रही है, इसके बाद अन्य में भी व्यवस्था की जाएगी। जल्द ही शिक्षकों की कमी दूर कर दी जाएगी। - शिव कुमार धीमान, उप जिला शिक्षा अधिकारी।
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जगाधरी। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए मुख्यालय व आला अधिकारी बेहद गंभीर हैं। इसके लिएजिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी सहित तमाम अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं तबादलों के बाद जिले में हुई शिक्षकों की कमी नामांकन अभियान में रोड़ा बन गई है।
विभाग की ओर से विभिन्न गतिविधियों, रैलियों के अलावा अध्यापक घर घर जाकर लोगों को उनके बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में करवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ट्रांसफर ड्राइव के बाद विभाग का यह अभियान अब हवा हवाई बनकर रह गया है, जिले में पहले ही अध्यापकों का टोटा था। ट्रांसफर ड्राइव के बाद यह कमी और बढ़ गई है।
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हालात ऐसे हैं कि कई स्कूल ऐसे हैं, कि वहां एक ही शिक्षक रह गया है। एक ही शिक्षक के बल पर पढ़ाई, नामांकन, जागरुकता कार्यक्रम सहित तमाम काम हो पाना संभव नहीं है। स्टाफ की कमी से जूझ रहे शिक्षक भी दबाव में काम करने को मजबूर हैं।
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शिक्षकों की कमी का असर नामांकन प्रक्रिया पर पड़ रहा है। अध्यापक किसी काम में अपना पूरा सहयोग नहीं दे पा रहे हैं। शिक्षकों की कमी के कारण न पढ़ाई हो पा रही है, न अध्यापक नामांकन अभियान में समय दे पा रहे हैं, न जागरूकता कार्यक्रम हो पा रहे हैं। कमी के कारण अध्यापक लोगों को उनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए प्रेरित नहीं कर पा रहे हैं।
अध्यापकों का कहना है कि वे जाते हैं, तो लोग शिक्षकों की कमी का मुद्दा उनके सामने रख देते हैं, जिसका उनके पास कोई सटीक जवाब नहीं है। अध्यापक इसे लेकर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। परंतु अभी तक इसका समाधान नहीं हो पाया है।
साल 2017 बैच के 1100 शिक्षा तबादला नीति के तहत जिले से चले गए हैं। नीति के अंतर्गत जिले में कुल 450 शिक्षक ही आए हैं। जिले में पहले ही शिक्षकों की कमी थी। ट्रांसफर के बाद 650 शिक्षक और कम हो गए हैं। तबादले के बाद चले जाने से कई स्कूलों में शिक्षक ही नहीं बचे हैं। राजकीय विद्यालय अध्यापक संघ के प्रधान महेंद्र सिंह कलेर ने कहा कि शिक्षकों की कमी के कारण नामांकन अभियान का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। इसके लिए शिक्षकों व्यवस्था करना जरूरी है।
ये हैं विद्यालयों के हालात
जिले में सबसे ज्यादा शिक्षकों की कमी बिलासपुर, छछरौली व प्रतापनगर खंड में हैं। इन खंडों में शिक्षकों की कमी के कारण क्षेत्रवासी प्रदर्शन तक कर चुके हैं। इसके अलावा कई स्कूल ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या तो अच्छी है, लेकिन शिक्षक एक या दो ही रह गए हैं। जीपीएस टोडरपुर में कुल 80 बच्चे हैं, लेकिन शिक्षक एक भी नहीं हैं। जीपीएस हमीदा में 583 बच्चों पर तीन शिक्षक रह गए हैं। जीपीएस नंबर पांच में 610 बच्चे हैं और शिक्षक सिर्फ दो हैं। रायपुर में 469 विद्यार्थी हैं और शिक्षक तीन हैं। जीपीएस दड़वा में 325 बच्चों पर तीन, जीपीएस गढ़ीमुंडो में 402 पर नौ, जीपीएस पांसरा में 250 पर दो, जीपीएस नंबर चार में 490 बच्चों पर दो शिक्षक हैं।
शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए काम किया जा रहा है। जहां शिक्षक नहीं हैं, वहां सबसे पहले व्यवस्था की जा रही है, इसके बाद अन्य में भी व्यवस्था की जाएगी। जल्द ही शिक्षकों की कमी दूर कर दी जाएगी। - शिव कुमार धीमान, उप जिला शिक्षा अधिकारी।