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खोदाई के दौरान मिले कुषाण काल के सिक्के व मिट्टी के बर्तन
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गांव संधाए में सरस्वती नदी के किनारे खोदाई के दौरान प्राचीन काल के सिक्के से भरी दो हांडियों के साथ मिट्टी के बर्तन, मृदा भांड सहित अन्य सामान मिला है। ग्रामीणों ने सामान मिलने की सूचना पुरातत्व विभाग को दी। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सामान को अपने कब्जे में ले लिया। इस दौरान हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच भी वहां पहुंचे। पुरातत्व विभाग अब गांव सहित विलुप्त नदी के आसपास की भूमि का निरीक्षण कर रहा है। खोदाई के दौरान मिला सामान करीब तीन हजार साल पुराना बताया जा रहा है। अनुमान है कि ये कुषाण काल की सामग्री हो सकती है।
बता दें कि करीब दस दिन पूर्व यहीं पर प्राचीन काल के सिक्के मिले थे, जो पुरातत्व विभाग को सौंप दिए गए थे। अब यहां सैकड़ों साल पुराना सामान मिलने से विभाग के अधिकारी व कर्मचारी क्षेत्र की जांच में लग गए हैं। जांच के दौरान यहां और भी दुर्लभ वस्तुएं मिल सकती हैं। पुरातत्व विभाग की टीम यहां उपनिदेशिका बनानी भट्टाचार्य के नेतृत्व में क्षेत्र की जांच कर रही है।
खोदाई के दौरान मिली हांडियां
करीब दस दिन पहले गांव निवासी बलविंद्र सरस्वती नदी किनारे किले के पास टहल रहा था। इस दौरान उसे कुछ सिक्के मिले। देखने पर यह बेहद प्राचीन दुर्लभ प्रतीत हो रहे थे। बलविंद्र ने मिले सिक्के विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच को दे दिए। इसके बाद गांव का जरनैल सिंह खेत का रास्ता बनाने के लिए जेसीबी लगाकर खोदाई करवा रहा था। खोदाई के दौरान वहां से दो छोटी मटकिया निकली। मटकियों की जांच करने पर पता चला कि वह पुराने सिक्कों से भरी थी। खोदाई के दौरान मिट्टी के छोटे बर्तन, सहित अन्य घरेलू सामान मिला है। इसके बाद उन्होंने सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष को सूचना दी। जिसके बाद धुम्मन सिंह किरमिच ने पुरात्तव विभाग के उपनिदेशक व विभागीय टीम के साथ दौरा किया। क्षेत्र की जांच के दौरान टीम को कुषाण काल के मृद भांड, प्राचीन मूर्तियां, घरेलु उपयोग का सामान, बर्तन व सिक्के मिले। बलविंद्र सिंह, जरनैल सिंह सहित गांव के लोगों ने प्राचीन किले से मिले सिक्कों व अन्य सामान पुरातत्व विभाग को सौंपा दिया है। बलविंद्र सिंह ने बताया कि किले से पहले भी कई तरह का प्राचीन सामान मिला है।
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वर्जन
गांव में बहुत ही प्रचीन सामान व सिक्के मिले हैं। यह सामान कुषाण काल के प्रतीत होते हैं, जो करीब तीन हजार साल पुराने होंगे। यह गुर्जर प्रतिहार से संबंधित होगा। सामान की जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि वह किस काल का है। वहीं क्षेत्र का निरीक्षण कर खोज की जाएगी।
बनानी भट्टाचार्य, उपनिदेशिक, पुरातत्व विभाग।
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बता दें कि करीब दस दिन पूर्व यहीं पर प्राचीन काल के सिक्के मिले थे, जो पुरातत्व विभाग को सौंप दिए गए थे। अब यहां सैकड़ों साल पुराना सामान मिलने से विभाग के अधिकारी व कर्मचारी क्षेत्र की जांच में लग गए हैं। जांच के दौरान यहां और भी दुर्लभ वस्तुएं मिल सकती हैं। पुरातत्व विभाग की टीम यहां उपनिदेशिका बनानी भट्टाचार्य के नेतृत्व में क्षेत्र की जांच कर रही है।
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खोदाई के दौरान मिली हांडियां
करीब दस दिन पहले गांव निवासी बलविंद्र सरस्वती नदी किनारे किले के पास टहल रहा था। इस दौरान उसे कुछ सिक्के मिले। देखने पर यह बेहद प्राचीन दुर्लभ प्रतीत हो रहे थे। बलविंद्र ने मिले सिक्के विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच को दे दिए। इसके बाद गांव का जरनैल सिंह खेत का रास्ता बनाने के लिए जेसीबी लगाकर खोदाई करवा रहा था। खोदाई के दौरान वहां से दो छोटी मटकिया निकली। मटकियों की जांच करने पर पता चला कि वह पुराने सिक्कों से भरी थी। खोदाई के दौरान मिट्टी के छोटे बर्तन, सहित अन्य घरेलू सामान मिला है। इसके बाद उन्होंने सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष को सूचना दी। जिसके बाद धुम्मन सिंह किरमिच ने पुरात्तव विभाग के उपनिदेशक व विभागीय टीम के साथ दौरा किया। क्षेत्र की जांच के दौरान टीम को कुषाण काल के मृद भांड, प्राचीन मूर्तियां, घरेलु उपयोग का सामान, बर्तन व सिक्के मिले। बलविंद्र सिंह, जरनैल सिंह सहित गांव के लोगों ने प्राचीन किले से मिले सिक्कों व अन्य सामान पुरातत्व विभाग को सौंपा दिया है। बलविंद्र सिंह ने बताया कि किले से पहले भी कई तरह का प्राचीन सामान मिला है।
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गांव में बहुत ही प्रचीन सामान व सिक्के मिले हैं। यह सामान कुषाण काल के प्रतीत होते हैं, जो करीब तीन हजार साल पुराने होंगे। यह गुर्जर प्रतिहार से संबंधित होगा। सामान की जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि वह किस काल का है। वहीं क्षेत्र का निरीक्षण कर खोज की जाएगी।
बनानी भट्टाचार्य, उपनिदेशिक, पुरातत्व विभाग।