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कलेसर नेशनल पार्क में फिर लगेंगे कैमरे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:29 AM IST
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कैमरा
- फोटो : ब्यूरो
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खिजराबाद। कलेसर नेशनल पार्क में सुरक्षा की दृष्टि और जंगली जानवरों की गतिविधियों व गिनती जानने के लिए वन्य प्राणी विभाग की ओर से एक बार फिर नेशनल पार्क में कैमरे लगवाए जा रहे हैं। इससे यह जानने में मदद मिलेगी कि पार्क में कितने और कितनी तरह के जंगली जानवर हैं। खासतौर पर तेंदुए की गिनती के लिए विभाग की ओर से इस प्रकार का प्रयोग किया जा रहा है।
जंगल में लगाए गए कै मरों में जंगली जानवर जैसे पैंथर, सांभर, हाथी और हिरणों के फोटो मिलने से वन्य प्राणी विभाग में खुशी का माहौल है। इससे विभाग को जंगली जानवरों की गतिविधियों और संख्या के बारे में सटीक जानकारी मिलेगी। पहले ही दिन कैमरों में तेंदुए हाथी, हिरण और सांभर जैसे जानवरों की गतिविधियां कैद हुई हैं। जंगल में बनाए गए गजलरों के पास भी तेंदुए होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। कैमरे में उनकी वीडियो फुटेज भी सामने आई है। जंगल में हाथी के होने के भी निशान पाए गए हैं। पार्क में कुल अस्सी रेंज कैमरे लगाए जा रहे हैं, जोकि एक दूसरे के सामने होंगे।
कलेसर नेशनल पार्क में कैमरे लगाने का काम कर रहे शालदव्य ने बताया कि ये कैमरे सीधे सैटेलाइट से जुड़े हुए हैं। किसी भी जानवर के सामने आने पर इनमें से किरणें निकलती हैं, जिससे वो जानवर कैमरे की वीडियो फुटेज में आ जाता है। सैटेलाइट से जुड़े होने के कारण इसकी जानकारी पंचकूला व देहरादून स्थित रिसर्च सेंटर में पहुंच जाती है।
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लकड़ी चोरी और शिकार पर भी लगेगा अंकुश :
पार्क में लकड़ी चोरी और जंगली जानवरों के शिकार की घटनाएं हो चुकी हैं। कैमरे लगाए जाने से इस प्रकार की घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। देहरादून वन्य प्राणी विभाग से आए शालदव्य, उमर, पूर्णेंदू, अमल, मौ.रफी व शराफत ने बताया कि वे एक महीने से पार्क में कैमरे लगाने का काम कर रहे हैं और पूरे जंगल में 35 जगह पर 70 कैमरे लगाए जा चुके हैं। इससे इन कैमरों के सामने आने वाले जीव की फोटो क्लिक हो जाएगी, जिसको देहरादून रिसर्च सेंटर में अपलोड किया जाएगा।
कर्मचारियों की गतिविधियों पर भी रहेगी नजर :
कैमरे लगे होने से कर्मचारियों की गतिविधियों पर भी कैमरे की सटीक नजर रहेगा और कौन कर्मचारी कितने समय गश्त करता है और किस समय गश्त करता है, इस प्रकार की सारी जानकारी विभाग के पास रहेगी। अधिकारियों का भी यही मानना है कि इस प्रकार के प्रयोग से जंगली जानवरों की गतिविधियों पर नजर आसानी से रखी जा सकेगी।
पहले भी लगे थे कैमरे, जिन्हें जानवरों ने तोड़ दिया था:
जंगल में कैमरे लगाने का प्रयास पहले भी हो चुका है। करीब डेढ़ साल पहले भी पार्क में विभाग की ओर से कैमरे लगाए गए थे। इससे जानवरों की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली थी। हालांकि कई कैमरों को जंगल में विचरने वाले हाथी ने तोड़ दिया था।
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जंगल में लगाए गए कै मरों में जंगली जानवर जैसे पैंथर, सांभर, हाथी और हिरणों के फोटो मिलने से वन्य प्राणी विभाग में खुशी का माहौल है। इससे विभाग को जंगली जानवरों की गतिविधियों और संख्या के बारे में सटीक जानकारी मिलेगी। पहले ही दिन कैमरों में तेंदुए हाथी, हिरण और सांभर जैसे जानवरों की गतिविधियां कैद हुई हैं। जंगल में बनाए गए गजलरों के पास भी तेंदुए होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। कैमरे में उनकी वीडियो फुटेज भी सामने आई है। जंगल में हाथी के होने के भी निशान पाए गए हैं। पार्क में कुल अस्सी रेंज कैमरे लगाए जा रहे हैं, जोकि एक दूसरे के सामने होंगे।
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कलेसर नेशनल पार्क में कैमरे लगाने का काम कर रहे शालदव्य ने बताया कि ये कैमरे सीधे सैटेलाइट से जुड़े हुए हैं। किसी भी जानवर के सामने आने पर इनमें से किरणें निकलती हैं, जिससे वो जानवर कैमरे की वीडियो फुटेज में आ जाता है। सैटेलाइट से जुड़े होने के कारण इसकी जानकारी पंचकूला व देहरादून स्थित रिसर्च सेंटर में पहुंच जाती है।
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लकड़ी चोरी और शिकार पर भी लगेगा अंकुश :
पार्क में लकड़ी चोरी और जंगली जानवरों के शिकार की घटनाएं हो चुकी हैं। कैमरे लगाए जाने से इस प्रकार की घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। देहरादून वन्य प्राणी विभाग से आए शालदव्य, उमर, पूर्णेंदू, अमल, मौ.रफी व शराफत ने बताया कि वे एक महीने से पार्क में कैमरे लगाने का काम कर रहे हैं और पूरे जंगल में 35 जगह पर 70 कैमरे लगाए जा चुके हैं। इससे इन कैमरों के सामने आने वाले जीव की फोटो क्लिक हो जाएगी, जिसको देहरादून रिसर्च सेंटर में अपलोड किया जाएगा।
कर्मचारियों की गतिविधियों पर भी रहेगी नजर :
कैमरे लगे होने से कर्मचारियों की गतिविधियों पर भी कैमरे की सटीक नजर रहेगा और कौन कर्मचारी कितने समय गश्त करता है और किस समय गश्त करता है, इस प्रकार की सारी जानकारी विभाग के पास रहेगी। अधिकारियों का भी यही मानना है कि इस प्रकार के प्रयोग से जंगली जानवरों की गतिविधियों पर नजर आसानी से रखी जा सकेगी।
पहले भी लगे थे कैमरे, जिन्हें जानवरों ने तोड़ दिया था:
जंगल में कैमरे लगाने का प्रयास पहले भी हो चुका है। करीब डेढ़ साल पहले भी पार्क में विभाग की ओर से कैमरे लगाए गए थे। इससे जानवरों की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली थी। हालांकि कई कैमरों को जंगल में विचरने वाले हाथी ने तोड़ दिया था।