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जानू हत्याकांड: हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, यूपी से आए दलित संगठनों के लोगों ने दो घंटे रखे रोड जाम तो डीसी ने नीचे बैठ मनाया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2022 02:00 AM IST
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Janu massacre: People of Dalit organizations kept road jam for two hours
जानू के हत्यारोपियों की गिरफ्तारी न होने पर शहीद भगत सिंह चौक पर जाम लगाते दलित समाज के लोग - फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। जानू वाल्मीकि हत्याकांड में 10 दिन बाद भी तीन नामजद सहित 20 आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से नाराज दलित समाज के लोग सोमवार को फिर सड़कों पर उतर आए। हरियाणा सहित दिल्ली, पंजाब, यूपी के जिलों से आए दलित संगठनों के लोगों ने शहर में रोष मार्च निकालकर दो घंटे जाम लगाया।
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पहले आधे घंटे शहर के बीच शहीद भगत सिंह चौक पर और फिर डेढ़ घंटे तक पुराने एनएच-73 स्थित महाराणा प्रताप चौक को जाम रखा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही एसपी को निलंबित करने की मांग उठाई। जाम खुलवाने के प्रयास में ड्यूटी मजिस्ट्रेट जगाधरी एसडीएम सुनील कुमार के साथ तीन डीएसपी व कई थाना-चौकी इंचार्ज पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारी मौके पर डीसी को बुलाने की मांग पर अड़े रहे। यही नहीं डीसी पार्थ गुप्ता के पहुंचने पर भी प्रदर्शनकारी सड़क से नहीं उठे। ऐसे में डीसी ने सड़क पर प्रदर्शनकारियों के बीच बैठ उनकी मांग सुनीं और कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। इससे पहले साढ़े तीन बजे से लेकर साढ़े पांच बजे तक एनएच-73 पर वाहनों की कतार लगी रही।
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दरअसल, सोमवार को जानू वाल्मीकि की रस्म क्रिया थी। शहर के सिटी सेंटर रोड पर सत्यनारायण धर्मशाला में रखे गए कार्यक्रम में हरियाणा सहित दिल्ली, पंजाब, यूपी के जिलों से दलित संगठनों के लोग पहुंचे थे। यहां पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह भी पहुंचे। यहीं से माइक पर दलित नेताओं ने ऐलान कर दिया कि सभी लोग रोष मार्च निकालकर सचिवालय पहुंचे, ताकि जानू के हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के लिए डीसी को ज्ञापन सौंपा जा सके। फिर दोपहर दो बजे रस्म क्रिया संपन्न होने पर संगठनों के लोग हाथों में जानू और उसके भाई रमन के फोटो लेकर शहर में रोष मार्च के लिए निकल पड़े। पहले शहीद भगत सिंह चौक पर आधा घंटे और फिर महाराणा प्रताप चौक पर चारों ओर अपने वाहन खड़े कर जाम लगा दिया। साथ ही दरियां बिछाकर बैठ गए और पुलिस, प्रशासन व सरकार विरोधी नारेबाजी की। जाम के दौरान वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई वाहन चालकों ने जाम के बीच से निकलने का प्रयास किया, जिनकी प्रदर्शनकारियों से बहस भी हुई।
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जब पुलिस ने बाइक सवार को जड़ा तमाचा
बताया जा रहा है कि जब प्रदर्शनकारियों ने जाम लगा रखा था तो एक बाइकसवार वहां से जबरन निकलने की जिद पर अड़ गया। इसे लेकर पहले प्रदर्शनकारियों से उसकी बहस हुई, फिर मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे समझाने का प्रयास किया। इसके बाद भी जब वह नहीं माना तो पुलिस ने उसे तमाचा जड़ दिया। साथ ही उसकी बाइक जब्त कर ली। आरोपी युवक ने बाइक पर पुलिस लिखवा रखा था, लेकिन वह कोई कागजात नहीं दिखा सका। प्रदर्शनकारियों में जानू के पिता एवं दलित नेता राजिंद्र वाल्मीकि के साथ भारतीय वाल्मीकि धर्म सभा के राष्ट्रीय महामंत्री ओपी कल्याण, सहारनपुर से जिलाध्यक्ष बृजमोहन सूद, सरसावा से नवीन, अंबाला से सुरेंद्र लोहट, नीलोखेड़ी से राजिंद्र, करनाल से दीपू, दिल्ली से बिरजू पहलवान व अन्य दलित संगठनों के लोग व महिलाएं मौजूद रहे।
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जानू की पत्नी को सरकारी नौकरी और परिवार को सुरक्षा देने की मांग
जाम खुलवाने पहुंचे डीसी के सामने समाज के नेता दलीप कंडारा ने मांग रखी कि जानू की हत्या के मुख्य आरोपी समेत सभी आरोपियों की 10 दिन में गिरफ्तारी हो। साथ ही जानू की पत्नी को सरकारी नौकरी और परिजनों को सुरक्षा दी जाए। यही नहीं दिसंबर में जानू पर हुए हमले के मामले में कार्रवाई न करने वाले पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई हो। डीसी ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई और सुरक्षा का भरोसा दिलाया।

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15 अप्रैल को हुई थी जानू की हत्या, गृहमंत्री से भी मिले थे परिजन
चूना भट्ठी निवासी राजिंद्र वाल्मीकि का बेटा जानू वाल्मीकि 15 अप्रैल की रात जगाधरी के विंटेज पैलेस में आयोजित शादी समारोह से लौट रहा था। तभी कार में चढ़ते समय गोलियां मारकर उसकी हत्या कर दी गई थी। फायरिंग में उसके तीन साथी भी घायल हो गए थे। हत्या के मामले में पुलिस ने सचिन, सुमित और मनोज उर्फ शंटी को नामजद करते हुए अन्य 22 पर केस दर्ज किया था। अभी तक मामले में पुलिस दो आरोपियों को गिरफ्तार कर पाई है। इससे पहले गिरफ्तारी के लिए परिवार के लोग गृह मंत्री से भी मिल चुके हैं। मंत्री की ओर से मामले की जांच एसटीएफ से भी कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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