{"_id":"69d1901deca7599a7a036634","slug":"jaiveer-overcame-physical-disability-to-win-bronze-medal-at-national-level-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1020-153852-2026-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: शारीरिक विकलांगता को मात दे जयवीर ने राष्ट्रीय स्तर पर जीता कांस्य पदक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: शारीरिक विकलांगता को मात दे जयवीर ने राष्ट्रीय स्तर पर जीता कांस्य पदक
Sun, 05 Apr 2026 03:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 05 Apr 2026 03:56 AM IST
विज्ञापन
प्रतियोगिता में जीता पदक दिखाता जयवीर। स्वयं
जगाधरी। हादसे में पैर गंवाने वाले जयवीर ने शारीरिक विकलांग को मात दे खेलों में अपने नाम एक और कीर्तिमान कर लिया है। उन्होंने बेंगलुरु में हुई पैरा ताइक्वांडो राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है। ये राष्ट्रीय प्रतियोगिता 29 से 30 मार्च तक बेंगलुरु के कोरमंगलम स्टेडियम में करवाई गई थी। इस दौरान जयवीर ने पुमसे इवेंट प्रतिस्पर्धा में देशभर में तीसरा स्थान पाया।
जयवीर जगाधरी रेलवे वर्कशॉप में कार्यरत हैं। प्रतियोगिता के बाद लौटे जयवीर का यहां पर जोरदार स्वागत किया गया। जगाधरी वर्कशॉप के मुख्य कारखाना प्रबंधक जयप्रकाश और मंडल खेल अधिकारी देव ऋषि ने जयवीर का स्वागत किया और बधाई दी। प्रबंधक जय प्रकाश ने कहा कि जयवीर ने कारखाना का देशभर में नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि अपने दृढ़ संकल्प और परिश्रम से जयवीर ने साबित कर दिया है कि कोई भी चुनौती असंभव नहीं है। इससे सभी खिलाड़ियों और कर्मचारियों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
हादसे में कट गई थी टांग
सड़क हादसे में टांग कट जाने के बाद जयवीर के सामने ऐसी परिस्थिति थी कि वह इसे किस्मत मान ले या संघर्ष कर स्वयं मिसाल बन जाए। जयवीर ने दूसरा रास्ता चुका और आज सभी के लिए मिसाल बनकर उभरे हैं। 30 वर्षीय जयवीर कुमार मूल रूप से चरखी दादरी के रहने वाले हैं और रेलवे कारखाना में कार्यरत हैं। जयवीर ने 27 से 29 दिसंबर 2025 में पंचकूला के सेक्टर-3 स्थित ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में दूसरी हरियाणा ओपन स्टेट पैरा ताइक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा जयवीर ने पैरा फुटबॉल, भाला फेंक, योगासन में भी कई पदक जीते हैं। इससे पहले जयवीर दौड़ के राज्यस्तरीय खिलाड़ी थे लेकिन हादसे के बाद उसकी दुनिया ही बदल गई। जयवीर ने बताया कि 2013 में उसका चयन भारतीय सेना हुआ था और इससे वह बेहद खुश था। वह राज्यस्तरीय धावक था और 400 मीटर में जिलास्तर पर स्वर्ण पदक भी जीता चुका है। 2013 में वह सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के कारण वह सेना में नहीं जा सके। उसकी टांग हादसे में कुचली जा चुकी थी। अस्पताल पहुंचा तो जान बचाने के लिए चिकित्सकों को उसकी दाहिनी टांग काटनी पड़ी। टांग कटने के बाद उसके सभी सपने कभी पूरे नहीं होने वाले बन कर रह गए। वह कई महीने बिस्तर पर रहा और अपनी दशा देखकर तनाव में चला गया। तीन साल तनाव ग्रस्त रहा और मायूस व निराश होकर बैठ गया। इस बीच एक दोस्त ने उसका साथ दिया और उसे संघर्ष के लिए प्रेरित किया। उसने इसके बाद जानकारी ली और फिर पैरा ओलंपिक को अपना लक्ष्य बनाकर संघर्ष शुरू कर दिया। इसके बाद से जयवीर आठ पदक जीत चुका है।
विज्ञापन
-- -- -- -
विज्ञापन
जयवीर जगाधरी रेलवे वर्कशॉप में कार्यरत हैं। प्रतियोगिता के बाद लौटे जयवीर का यहां पर जोरदार स्वागत किया गया। जगाधरी वर्कशॉप के मुख्य कारखाना प्रबंधक जयप्रकाश और मंडल खेल अधिकारी देव ऋषि ने जयवीर का स्वागत किया और बधाई दी। प्रबंधक जय प्रकाश ने कहा कि जयवीर ने कारखाना का देशभर में नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि अपने दृढ़ संकल्प और परिश्रम से जयवीर ने साबित कर दिया है कि कोई भी चुनौती असंभव नहीं है। इससे सभी खिलाड़ियों और कर्मचारियों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
विज्ञापन
हादसे में कट गई थी टांग
सड़क हादसे में टांग कट जाने के बाद जयवीर के सामने ऐसी परिस्थिति थी कि वह इसे किस्मत मान ले या संघर्ष कर स्वयं मिसाल बन जाए। जयवीर ने दूसरा रास्ता चुका और आज सभी के लिए मिसाल बनकर उभरे हैं। 30 वर्षीय जयवीर कुमार मूल रूप से चरखी दादरी के रहने वाले हैं और रेलवे कारखाना में कार्यरत हैं। जयवीर ने 27 से 29 दिसंबर 2025 में पंचकूला के सेक्टर-3 स्थित ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में दूसरी हरियाणा ओपन स्टेट पैरा ताइक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा जयवीर ने पैरा फुटबॉल, भाला फेंक, योगासन में भी कई पदक जीते हैं। इससे पहले जयवीर दौड़ के राज्यस्तरीय खिलाड़ी थे लेकिन हादसे के बाद उसकी दुनिया ही बदल गई। जयवीर ने बताया कि 2013 में उसका चयन भारतीय सेना हुआ था और इससे वह बेहद खुश था। वह राज्यस्तरीय धावक था और 400 मीटर में जिलास्तर पर स्वर्ण पदक भी जीता चुका है। 2013 में वह सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के कारण वह सेना में नहीं जा सके। उसकी टांग हादसे में कुचली जा चुकी थी। अस्पताल पहुंचा तो जान बचाने के लिए चिकित्सकों को उसकी दाहिनी टांग काटनी पड़ी। टांग कटने के बाद उसके सभी सपने कभी पूरे नहीं होने वाले बन कर रह गए। वह कई महीने बिस्तर पर रहा और अपनी दशा देखकर तनाव में चला गया। तीन साल तनाव ग्रस्त रहा और मायूस व निराश होकर बैठ गया। इस बीच एक दोस्त ने उसका साथ दिया और उसे संघर्ष के लिए प्रेरित किया। उसने इसके बाद जानकारी ली और फिर पैरा ओलंपिक को अपना लक्ष्य बनाकर संघर्ष शुरू कर दिया। इसके बाद से जयवीर आठ पदक जीत चुका है।
विज्ञापन