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Yamuna Nagar News: अपार आईडी बनाने में जगाधरी खंड सबसे पीछे
Thu, 16 Jan 2025 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 16 Jan 2025 02:10 AM IST
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जगाधरी। शिक्षा विभाग के अधिकारी अपार आईडी बनाने के लिए अन्य खंडों के अधिकारियों को प्रेरित कर रहे हैं लेकिन जहां विभाग के तमाम अधिकारी बैठते हैं। वही, ब्लॉक आईडी बनाने में सबसे पीछे है। जगाधरी खंड में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक, जिला परियोजना सह समन्वयक, उपजिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य अधिकारी बैठते हैं।
इसके बाद भी जगाधरी खंड में अभी तक 50 प्रतिशत आईडी ही बन पाई हैं। अधिकारी अपने ही क्षेत्र के सभी स्कूलों में काम नहीं करवा पा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण स्कूलों का प्रदर्शन इसमें ज्यादा अच्छा है। जबकि शहरी स्कूलों में ग्रामीणों की अपेक्षा ज्यादा स्टाफ, अधिक सुविधा है। बावजूद इसके शहर के स्कूलों का प्रदर्शन बेहद खराब है। जिले में सबसे कम अपार आईडी बनाने वाले खंडों में जगाधरी सबसे शीर्ष पर है। बता दें कि जिले में अभी तक 56 प्रतिशत ही अपार आईडी बन पाई हैं। जबकि जगाधरी में कुल 48 प्रतिशत आईडी बनी और 52 प्रतिशत काम अभी लंबित है।
जानकारी के अनुसार जिले में सभी सरकारी व निजी स्कूलों में कुल 244238 विद्यार्थी पढ़ते हैं। सभी स्कूलों के विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाई जानी है। इस दौरान जगाधरी खंड सबसे पीछे है। जगाधरी खंड में कुल 125188 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। जिसमें से मात्र 60962 विद्यार्थियों की ही आईडी बन पाई है।
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इसके अलावा सरस्वतीनगर व बिलासपुर (अब व्यासपुर) का काम सबसे कम है। इन खंडों में अभी 50 प्रतिशत आईडी तक नहीं बन पाई है। जबकि रादौर, साढौरा और छछरौली में अन्य तीन खंडों से ज्यादा काम हुआ है। इन तीन खंडों में कुल 69 प्रतिशत विद्यार्थियों की आईडी जनरेट हो गई है।
क्या है अपार आई डी : शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के लिए ऑटोमेटिक परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्टर (अपार) आईडी बना रहा है। इस आईडी में विद्यार्थी की पहली से 12वीं कक्षा तक की सभी शैक्षणिक गतिविधियों व प्रमाणपत्र की जानकारी मिलेगी। इसके लिए विद्यार्थियों को 12 अंक का यूनिक नंबर दिया जाएगा।
अपार आई बनने के बाद एक क्लिक पर देशभर में कहीं भी विद्यार्थी की शैक्षणिक योग्यता सत्यापित की जा सकती है। वहीं, इससे फर्जी प्रमाणपत्र बनने की संभावनाओं को भी कम किया जा सकता है। इसके अलावा मार्कशीट व अन्य दस्तावेज खो जाने पर चिंता नहीं होगी। सभी दस्तावेज डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रहेंगे। अपार आईडी बनाने के लिए विद्यार्थी के अभिभावकों की अनुमति आवश्यक है। ऐसे में अध्यापक विद्यार्थियों को नोट लिखकर अभिभावकों से अनुमति लाने को कह रहे हैं। जबकि अधिकांश अभिभावक इस अपार आईडी योजना से अनभिज्ञ हैं।
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इसके बाद भी जगाधरी खंड में अभी तक 50 प्रतिशत आईडी ही बन पाई हैं। अधिकारी अपने ही क्षेत्र के सभी स्कूलों में काम नहीं करवा पा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण स्कूलों का प्रदर्शन इसमें ज्यादा अच्छा है। जबकि शहरी स्कूलों में ग्रामीणों की अपेक्षा ज्यादा स्टाफ, अधिक सुविधा है। बावजूद इसके शहर के स्कूलों का प्रदर्शन बेहद खराब है। जिले में सबसे कम अपार आईडी बनाने वाले खंडों में जगाधरी सबसे शीर्ष पर है। बता दें कि जिले में अभी तक 56 प्रतिशत ही अपार आईडी बन पाई हैं। जबकि जगाधरी में कुल 48 प्रतिशत आईडी बनी और 52 प्रतिशत काम अभी लंबित है।
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जानकारी के अनुसार जिले में सभी सरकारी व निजी स्कूलों में कुल 244238 विद्यार्थी पढ़ते हैं। सभी स्कूलों के विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाई जानी है। इस दौरान जगाधरी खंड सबसे पीछे है। जगाधरी खंड में कुल 125188 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। जिसमें से मात्र 60962 विद्यार्थियों की ही आईडी बन पाई है।
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इसके अलावा सरस्वतीनगर व बिलासपुर (अब व्यासपुर) का काम सबसे कम है। इन खंडों में अभी 50 प्रतिशत आईडी तक नहीं बन पाई है। जबकि रादौर, साढौरा और छछरौली में अन्य तीन खंडों से ज्यादा काम हुआ है। इन तीन खंडों में कुल 69 प्रतिशत विद्यार्थियों की आईडी जनरेट हो गई है।
क्या है अपार आई डी : शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के लिए ऑटोमेटिक परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्टर (अपार) आईडी बना रहा है। इस आईडी में विद्यार्थी की पहली से 12वीं कक्षा तक की सभी शैक्षणिक गतिविधियों व प्रमाणपत्र की जानकारी मिलेगी। इसके लिए विद्यार्थियों को 12 अंक का यूनिक नंबर दिया जाएगा।
अपार आई बनने के बाद एक क्लिक पर देशभर में कहीं भी विद्यार्थी की शैक्षणिक योग्यता सत्यापित की जा सकती है। वहीं, इससे फर्जी प्रमाणपत्र बनने की संभावनाओं को भी कम किया जा सकता है। इसके अलावा मार्कशीट व अन्य दस्तावेज खो जाने पर चिंता नहीं होगी। सभी दस्तावेज डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रहेंगे। अपार आईडी बनाने के लिए विद्यार्थी के अभिभावकों की अनुमति आवश्यक है। ऐसे में अध्यापक विद्यार्थियों को नोट लिखकर अभिभावकों से अनुमति लाने को कह रहे हैं। जबकि अधिकांश अभिभावक इस अपार आईडी योजना से अनभिज्ञ हैं।