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भगवान की भक्ति नहीं करना गलत : गोपाल दास
Fri, 27 Dec 2024 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 27 Dec 2024 12:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। इस्कॉन प्रचार समिति यमुनानगर जगाधरी की ओर से शीशमहल पैलेस में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। इसमें कथा व्यास इस्कॉन कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष साक्षी गोपाल दास प्रभु ने कहा कि जो लोग मनुष्य जीवन प्राप्त करके भगवान की भक्ति नहीं करते यमराज की दूत उनको बड़ी यातनाएं देते हैं।
जैसे अगर किसी व्यक्ति को एक हजार बिच्छू के साथ कट जाए उसे जितना दर्द होता है यमराज के दूत उसे उससे भी ज्यादा दर्द देते हैं। वेदांत कहता है कि भगवान ने यह मनुष्य योनि अपने आप को जानने के लिए दी है कि मैं कौन हूं, मैं कहां से आया हूं, मुझे जाना कहां है, जो मनुष्य इस योनि में इन प्रश्नों का उत्तर नहीं जान पाया उसका जीवन पशु के समान है। अपने आप को जानने के लिए प्रयास करना चाहिए।
यह भौतिक संसार जन्म, मृत्यु, जरा, व्याधि का भव सागर है। जो इस संसार में आया है उसे जन्म का कष्ट , मरण का कष्ट, व्याधि का कष्ट और जरा का कष्ट उठाना ही पड़ेगा। यह जीव आत्मा इस भवसागर में पड़ी एक योनि के बाद एक योनि में भटक रही है किसी भाग्यवान को ही मनुष्य योनि मिलती है। उन्होंने बताया कि यह मनुष्य योनि भगवान की कृपा योनि है।
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इसी मनुष्य योनि में हमें गुरु की प्राप्ति होती है केवल मनुष्य योनि में आप गुरु स्वीकार कर सकते हैं। जब तक मनुष्य योनि पा कर भगवान कृष्ण के शुद्ध भक्तों की शरणागति नहीं लेंगे उनके चरणों की धुली अपने मस्तक पर स्वीकार नहीं कर लेंगे तब तक उनको भक्ति मिलने वाली नहीं है।
उन्होंने कहा कि भगवान कहते है कि मुझे केवल भक्ति के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। भक्ति उसे मिलेगी जो श्रद्धा और प्रेम से भगवान की सेवा करेगा भगवान के शुद्ध भक्तों के साथ बैठ कर भगवान के गुण, रूप, लीलाओं की कथा का श्रवण करेगा। भक्ति के माध्यम से हमारे दुखों का अंत हो सकता है।
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यमुनानगर। इस्कॉन प्रचार समिति यमुनानगर जगाधरी की ओर से शीशमहल पैलेस में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। इसमें कथा व्यास इस्कॉन कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष साक्षी गोपाल दास प्रभु ने कहा कि जो लोग मनुष्य जीवन प्राप्त करके भगवान की भक्ति नहीं करते यमराज की दूत उनको बड़ी यातनाएं देते हैं।
जैसे अगर किसी व्यक्ति को एक हजार बिच्छू के साथ कट जाए उसे जितना दर्द होता है यमराज के दूत उसे उससे भी ज्यादा दर्द देते हैं। वेदांत कहता है कि भगवान ने यह मनुष्य योनि अपने आप को जानने के लिए दी है कि मैं कौन हूं, मैं कहां से आया हूं, मुझे जाना कहां है, जो मनुष्य इस योनि में इन प्रश्नों का उत्तर नहीं जान पाया उसका जीवन पशु के समान है। अपने आप को जानने के लिए प्रयास करना चाहिए।
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यह भौतिक संसार जन्म, मृत्यु, जरा, व्याधि का भव सागर है। जो इस संसार में आया है उसे जन्म का कष्ट , मरण का कष्ट, व्याधि का कष्ट और जरा का कष्ट उठाना ही पड़ेगा। यह जीव आत्मा इस भवसागर में पड़ी एक योनि के बाद एक योनि में भटक रही है किसी भाग्यवान को ही मनुष्य योनि मिलती है। उन्होंने बताया कि यह मनुष्य योनि भगवान की कृपा योनि है।
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इसी मनुष्य योनि में हमें गुरु की प्राप्ति होती है केवल मनुष्य योनि में आप गुरु स्वीकार कर सकते हैं। जब तक मनुष्य योनि पा कर भगवान कृष्ण के शुद्ध भक्तों की शरणागति नहीं लेंगे उनके चरणों की धुली अपने मस्तक पर स्वीकार नहीं कर लेंगे तब तक उनको भक्ति मिलने वाली नहीं है।
उन्होंने कहा कि भगवान कहते है कि मुझे केवल भक्ति के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। भक्ति उसे मिलेगी जो श्रद्धा और प्रेम से भगवान की सेवा करेगा भगवान के शुद्ध भक्तों के साथ बैठ कर भगवान के गुण, रूप, लीलाओं की कथा का श्रवण करेगा। भक्ति के माध्यम से हमारे दुखों का अंत हो सकता है।