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Yamuna Nagar News: रेडीमेड कपड़ों के दौर में खादी की बढ़ रही मांग, युवाओं में भी बढ़ा रुझान
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खादी के कपड़े से बने कपड़ों की खरीदारी करती महिला। संवाद
अशोक कुमार
यमुनानगर। बाजार में जींस, टी-शर्ट और नए-नए डिजाइन के रेडीमेड कपड़ों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच खादी के प्रति लोगों का रुझान भी बढ़ने लगा है। कभी पारंपरिक परिधानों तक सीमित मानी जाने वाली खादी अब युवाओं को भी आकर्षित कर रही है। खादी के कपड़ों में पसंद के अनुसार डिजाइन और परिधान तैयार करवाने की सुविधा मिलने से ग्राहक इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार, खादी की मांग में सुधार हुआ है और लोग पहले के मुकाबले अधिक पसंद कर रहे हैं।
जिले में स्वदेशी खादी प्रोडक्ट के नाम से खादी के स्टोर संचालित किए जा रहे हैं। स्टोर संचालक मीतू सलूजा के अनुसार, जिले में खादी के दो स्टोर हैं, जबकि जगाधरी में एक स्टोर संचालित है। इन केंद्रों पर अलग-अलग राज्यों से खादी का कपड़ा मंगवाया जाता है। इससे ग्राहकों को विभिन्न प्रकार के कपड़ों और विकल्पों का लाभ मिलता है।
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पसंद के अनुसार तैयार करवाते हैं परिधान
खादी की खासियत यह है कि ग्राहक केवल तैयार कपड़ों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार परिधान भी तैयार करवा सकते हैं। स्टोर पर ग्राहकों की मांग के मुताबिक डिजाइन तैयार करवाए जाते हैं। इसके बाद कपड़े की पसंद, डिजाइन और नाप के अनुसार कुर्ता, शर्ट या अन्य परिधान सिलवाए जा सकते हैं। इससे उन ग्राहकों को भी विकल्प मिलता है, जिन्हें रेडीमेड कपड़ों में अपनी पसंद का डिजाइन या सही फिटिंग नहीं मिल पाती।
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युवाओं में भी बढ़ रहा रुझान
मीतू सलूजा ने बताया कि खादी को लेकर अब केवल बुजुर्गों या पारंपरिक कपड़े पसंद करने वाले लोगों तक ही रुचि सीमित नहीं है। युवा भी खादी के कपड़ों को पसंद करने लगे हैं। बदलती पसंद के साथ खादी के कपड़ों को नए डिजाइन और आधुनिक परिधानों के रूप में तैयार करवाने का चलन भी बढ़ रहा है। कारोबारियों के अनुसार, कीमतों में भी पहले के मुकाबले सुधार हुआ है, जिससे ग्राहकों के लिए खादी के कपड़े खरीदना सुविधाजनक हुआ है।
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स्वदेशी कपड़ों की ओर बढ़ रही रुचि
रेडीमेड कपड़ों में जहां ग्राहकों को तुरंत पहनने के लिए कई विकल्प मिल जाते हैं, वहीं खादी में अपनी पसंद के अनुसार कपड़ा चुनने और परिधान तैयार करवाने की सुविधा अलग पहचान देती है। खादी कारोबारियों को उम्मीद है कि लोगों में स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ती रुचि से इस क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा। खादी की मांग बढ़ने से इससे जुड़े कारोबारियों, बुनकरों और सिलाई के काम में लगे लोगों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
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यमुनानगर। बाजार में जींस, टी-शर्ट और नए-नए डिजाइन के रेडीमेड कपड़ों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच खादी के प्रति लोगों का रुझान भी बढ़ने लगा है। कभी पारंपरिक परिधानों तक सीमित मानी जाने वाली खादी अब युवाओं को भी आकर्षित कर रही है। खादी के कपड़ों में पसंद के अनुसार डिजाइन और परिधान तैयार करवाने की सुविधा मिलने से ग्राहक इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार, खादी की मांग में सुधार हुआ है और लोग पहले के मुकाबले अधिक पसंद कर रहे हैं।
जिले में स्वदेशी खादी प्रोडक्ट के नाम से खादी के स्टोर संचालित किए जा रहे हैं। स्टोर संचालक मीतू सलूजा के अनुसार, जिले में खादी के दो स्टोर हैं, जबकि जगाधरी में एक स्टोर संचालित है। इन केंद्रों पर अलग-अलग राज्यों से खादी का कपड़ा मंगवाया जाता है। इससे ग्राहकों को विभिन्न प्रकार के कपड़ों और विकल्पों का लाभ मिलता है।
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पसंद के अनुसार तैयार करवाते हैं परिधान
खादी की खासियत यह है कि ग्राहक केवल तैयार कपड़ों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार परिधान भी तैयार करवा सकते हैं। स्टोर पर ग्राहकों की मांग के मुताबिक डिजाइन तैयार करवाए जाते हैं। इसके बाद कपड़े की पसंद, डिजाइन और नाप के अनुसार कुर्ता, शर्ट या अन्य परिधान सिलवाए जा सकते हैं। इससे उन ग्राहकों को भी विकल्प मिलता है, जिन्हें रेडीमेड कपड़ों में अपनी पसंद का डिजाइन या सही फिटिंग नहीं मिल पाती।
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युवाओं में भी बढ़ रहा रुझान
मीतू सलूजा ने बताया कि खादी को लेकर अब केवल बुजुर्गों या पारंपरिक कपड़े पसंद करने वाले लोगों तक ही रुचि सीमित नहीं है। युवा भी खादी के कपड़ों को पसंद करने लगे हैं। बदलती पसंद के साथ खादी के कपड़ों को नए डिजाइन और आधुनिक परिधानों के रूप में तैयार करवाने का चलन भी बढ़ रहा है। कारोबारियों के अनुसार, कीमतों में भी पहले के मुकाबले सुधार हुआ है, जिससे ग्राहकों के लिए खादी के कपड़े खरीदना सुविधाजनक हुआ है।
स्वदेशी कपड़ों की ओर बढ़ रही रुचि
रेडीमेड कपड़ों में जहां ग्राहकों को तुरंत पहनने के लिए कई विकल्प मिल जाते हैं, वहीं खादी में अपनी पसंद के अनुसार कपड़ा चुनने और परिधान तैयार करवाने की सुविधा अलग पहचान देती है। खादी कारोबारियों को उम्मीद है कि लोगों में स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ती रुचि से इस क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा। खादी की मांग बढ़ने से इससे जुड़े कारोबारियों, बुनकरों और सिलाई के काम में लगे लोगों को भी लाभ मिलने की संभावना है।