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Yamuna Nagar News: सास-ससुर ने घर में घुसने नही दिया तो महिला ने ग्रामीणों के सहयोग से घर में किया प्रवेश
Wed, 24 Dec 2025 03:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 24 Dec 2025 03:09 AM IST
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काजल के समर्थन में पहुंचे भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी के पदाधिकारी। संवाद
साढौरा। गांव महमदपुर में कड़ाके की ठंड में अपनी सुसराल के मेन गेट के बाहर टेंट लगाकर डेरा डाले बैठी पीडि़ता काजल के सब्र का बांध उस समय टूट गया, जब 10वें दिन भी कोई प्रशासनिक अधिकारी व ससुराल पक्ष के लोग सुध लेने नही पहुंचे। काजल को ग्रामीणों का सहयोग मिला तो वह मंगलवार को घर के मेन गेट को फांदकर अंदर घुस गई।
काजल पिछले 10 दिन से अपनी मां व भाई के साथ अपने ससुराल के घर के बाहर कड़ाके की ठंड में बैठी हुई है। जहां उसे 7 वर्ष पहले पूरे रीति-रिवाजों के साथ ब्याह कर लाया गया था। टीबी की बीमारी पता चलने पर उसके साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है। काजल अब खुद को बिल्कुल स्वस्थ बता रही है और किसी भी मेडिकल जांच के लिए तैयार है। उसे ससुरालियों की बजाए ग्रामीणों का सहयोग मिला। ग्रामीणों की मौजूदगी में वह मंगलवार दोपहर को अपने घर में घुस गई। काजल का कहना है कि उसे अपने सास-ससुर व पति से अब भी कोई गिला शिकवा नहीं है। अगर अब भी वह उसे स्वीकार करते हैं तो वह अपने बुजुर्ग सास-ससुर व पति का सहारा बनकर रहेगी।
काजल की मां राजकुमारी ने बताया कि 30 मार्च 2018 को उसकी बेटी की शादी भारतीय सेना में तैनात अमित कुमार के साथ हिन्दू रिति रिवाज के अनुसार हुई थी। शादी के 20 दिन के बाद काजल की अचानक तबीयत बिगड़ गई। चिकित्सक जांच करवाने पर उसे टीबी की शिकायत बताई। अमित की छुट्टी खत्म होने के कारण उसने उसे मायके में उपचार करवाने के लिए छोड़ दिया और स्वस्थ होने पर उसे वापिस जाने की बात कही। स्वस्थ होने पर अमित उसे वापस ले जाने की बजाए अदालत से तलाक का नोटिस भिजवा दिया। जिससे काजल मानसिक रूप से परेशान हो गई और पूरा परिवार नोटिस देखकर अचंभित रह गए। काजल ने ससुराल आने की बात अपने मन में ठान ली और 14 दिसंबर को गांव महमदपुर पहुंच गई। इसकी भनक पाकर उसके सास-ससुर घर को ताला लगाकर फरार हो गए। लेकिन काजल ने वापस जाने की बजाए अपने स्वजनों के साथ ससुराल के गेट के बाहर टेंट लगाकर धरना डाल दिया। ससुराल पक्ष का इंतजार करने के बाद जब कोई हल नहीं निकला तो 10वें दिन महिला के पक्ष में भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी काफी संख्या में धरनास्थल पर पंहुचे। इसी हौंसले को देखकर महिला ने बाहर से कुर्सी का सहारा लेकर गेट की दीवार फांदकर अंदर घुस गई। ताला तोडऩे के बाद धरनास्थल पर रखे सामान को भी अंदर ले गई।
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मौके पर पहुंचे आजाद समाज पार्टी के नेता सोहिल साढौरा ने कहा कि बड़ी विडंबना की बात है कि समाज की बेटी को सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ शादी करके लाया जाता है और अब उसे इस तरह कड़ाके की ठंड में घर के बाहर बैठने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अगर अपने परिवार का कोई सदस्य बीमार हो जाएं तो उसे घर से बाहर निकालने का व्यवहार निंदनीय है। काजल के साथ पूरा समाज हर संभव मदद के लिए तैयार खड़ा है।
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काजल पिछले 10 दिन से अपनी मां व भाई के साथ अपने ससुराल के घर के बाहर कड़ाके की ठंड में बैठी हुई है। जहां उसे 7 वर्ष पहले पूरे रीति-रिवाजों के साथ ब्याह कर लाया गया था। टीबी की बीमारी पता चलने पर उसके साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है। काजल अब खुद को बिल्कुल स्वस्थ बता रही है और किसी भी मेडिकल जांच के लिए तैयार है। उसे ससुरालियों की बजाए ग्रामीणों का सहयोग मिला। ग्रामीणों की मौजूदगी में वह मंगलवार दोपहर को अपने घर में घुस गई। काजल का कहना है कि उसे अपने सास-ससुर व पति से अब भी कोई गिला शिकवा नहीं है। अगर अब भी वह उसे स्वीकार करते हैं तो वह अपने बुजुर्ग सास-ससुर व पति का सहारा बनकर रहेगी।
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काजल की मां राजकुमारी ने बताया कि 30 मार्च 2018 को उसकी बेटी की शादी भारतीय सेना में तैनात अमित कुमार के साथ हिन्दू रिति रिवाज के अनुसार हुई थी। शादी के 20 दिन के बाद काजल की अचानक तबीयत बिगड़ गई। चिकित्सक जांच करवाने पर उसे टीबी की शिकायत बताई। अमित की छुट्टी खत्म होने के कारण उसने उसे मायके में उपचार करवाने के लिए छोड़ दिया और स्वस्थ होने पर उसे वापिस जाने की बात कही। स्वस्थ होने पर अमित उसे वापस ले जाने की बजाए अदालत से तलाक का नोटिस भिजवा दिया। जिससे काजल मानसिक रूप से परेशान हो गई और पूरा परिवार नोटिस देखकर अचंभित रह गए। काजल ने ससुराल आने की बात अपने मन में ठान ली और 14 दिसंबर को गांव महमदपुर पहुंच गई। इसकी भनक पाकर उसके सास-ससुर घर को ताला लगाकर फरार हो गए। लेकिन काजल ने वापस जाने की बजाए अपने स्वजनों के साथ ससुराल के गेट के बाहर टेंट लगाकर धरना डाल दिया। ससुराल पक्ष का इंतजार करने के बाद जब कोई हल नहीं निकला तो 10वें दिन महिला के पक्ष में भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी काफी संख्या में धरनास्थल पर पंहुचे। इसी हौंसले को देखकर महिला ने बाहर से कुर्सी का सहारा लेकर गेट की दीवार फांदकर अंदर घुस गई। ताला तोडऩे के बाद धरनास्थल पर रखे सामान को भी अंदर ले गई।
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मौके पर पहुंचे आजाद समाज पार्टी के नेता सोहिल साढौरा ने कहा कि बड़ी विडंबना की बात है कि समाज की बेटी को सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ शादी करके लाया जाता है और अब उसे इस तरह कड़ाके की ठंड में घर के बाहर बैठने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अगर अपने परिवार का कोई सदस्य बीमार हो जाएं तो उसे घर से बाहर निकालने का व्यवहार निंदनीय है। काजल के साथ पूरा समाज हर संभव मदद के लिए तैयार खड़ा है।