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अध्यापक न आए तो स्कूल में जड़ देंगे ताला
यमुनानगर
Updated Sat, 17 May 2014 11:49 PM IST
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हाफिजपुर गांव के सरकारी स्कूल में बच्चे सुबह स्कूल आते हैं और दिन भर खाली बैठकर वापस लौट जाते हैं। बच्चों का पढ़ने का मन करता है, लेकिन यहां उन्हें पढ़ाने वाला कोई नहीं है।
इस स्कूल को प्राइमरी से मिडिल अपग्रेड हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक स्कूल में मिडिल के बच्चों को पढ़ाने वाले अध्यापक की नियुक्ति नहीं की गई। इसका खामियाजा स्कूल के 45 बच्चे भुगत रहे हैं। अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल में अध्यापक नहीं भेजे गए तो वे स्कूल को ताला जड़ देंगे।
हाफिजपुर के प्राइमरी स्कूल को करीब तीन साल पहले अपग्रेड कर मिडिल स्कूल बनाया गया था। इससे गांव के लोग काफी खुश हुए थे। आसपास मिडिल स्तर का स्कूल नहीं होने के कारण गांव के बच्चे को कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता था।
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अपग्रेड होने के काफी समय तक स्कूल में अध्यापक की नियुक्ति नहीं हुई तो ग्रामीण प्राइमरी स्कूल की हेड आने की बात कही। इस इंतजार मेें तीन वर्ष बीत चुके हैं। शिक्षा विभाग ने अभी तक स्कूल में मिडिल स्तर के किसी अध्यापक को तैनात नहीं किया है। बच्चे भी बेसब्री से स्कूल में अध्यापकों के आने का इंतजार कर रहे हैं।
कभी-कभार पढ़ा देते हैं पीटीआई
हाफिजपुर में रहने वाले जाकिर, अजरूदीन, इस्लाम, सुलेमान, सलीम, पवन और असलम ने बताया कि स्कूल में छठीं, सातवीं और आठवीं कक्षा में करीब 45 बच्चे हैं। जबकि प्राइमरी स्कूल में 150 बच्चे हैं। प्राइमरी में दो अध्यापक और एक पीटीआई है, जो प्राइमरी के बच्चों के लिए भी पर्याप्त नहीं है। स्कूल आने वाले मिडिल के बच्चों को पीटीआई कभी-कभार पढ़ा देते हैं। लेकिन अधिकतर समय बच्चे खाली बैठे रहते हैं। ये बच्चे हर सुबह घर से पढ़ाई की उम्मीद लेकर स्कूल आते हैं, लेकिन यहां उन्हें मायूसी की हाथ लगती है। ग्रामीणों का कहना कि गांव में ज्यादातर मजदूर तबका है। अन्य सरकारी मिडिल कई किलोमीटर दूर है। ग्रामीण अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने में असमर्थ हैं। ऐसे में अध्यापकों की कमी के कारण इन बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार चाहे तो मिड डे मील स्कीम बंद कर दे। लेकिन स्कूल में अध्यापक लगा दे जिससे हमारे बच्चे पढ़-लिखकर कुछ बन सके। तीन साल से अध्यापक के आने का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने धमकी दी है कि यदि शिक्षा विभाग ने जल्द ही स्कूल में मिडिल के अध्यापक नियुक्त नहीं किए तो वे स्कूल में ताला जड़ देंगे।
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इस स्कूल को प्राइमरी से मिडिल अपग्रेड हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक स्कूल में मिडिल के बच्चों को पढ़ाने वाले अध्यापक की नियुक्ति नहीं की गई। इसका खामियाजा स्कूल के 45 बच्चे भुगत रहे हैं। अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल में अध्यापक नहीं भेजे गए तो वे स्कूल को ताला जड़ देंगे।
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हाफिजपुर के प्राइमरी स्कूल को करीब तीन साल पहले अपग्रेड कर मिडिल स्कूल बनाया गया था। इससे गांव के लोग काफी खुश हुए थे। आसपास मिडिल स्तर का स्कूल नहीं होने के कारण गांव के बच्चे को कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता था।
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अपग्रेड होने के काफी समय तक स्कूल में अध्यापक की नियुक्ति नहीं हुई तो ग्रामीण प्राइमरी स्कूल की हेड आने की बात कही। इस इंतजार मेें तीन वर्ष बीत चुके हैं। शिक्षा विभाग ने अभी तक स्कूल में मिडिल स्तर के किसी अध्यापक को तैनात नहीं किया है। बच्चे भी बेसब्री से स्कूल में अध्यापकों के आने का इंतजार कर रहे हैं।
कभी-कभार पढ़ा देते हैं पीटीआई
हाफिजपुर में रहने वाले जाकिर, अजरूदीन, इस्लाम, सुलेमान, सलीम, पवन और असलम ने बताया कि स्कूल में छठीं, सातवीं और आठवीं कक्षा में करीब 45 बच्चे हैं। जबकि प्राइमरी स्कूल में 150 बच्चे हैं। प्राइमरी में दो अध्यापक और एक पीटीआई है, जो प्राइमरी के बच्चों के लिए भी पर्याप्त नहीं है। स्कूल आने वाले मिडिल के बच्चों को पीटीआई कभी-कभार पढ़ा देते हैं। लेकिन अधिकतर समय बच्चे खाली बैठे रहते हैं। ये बच्चे हर सुबह घर से पढ़ाई की उम्मीद लेकर स्कूल आते हैं, लेकिन यहां उन्हें मायूसी की हाथ लगती है। ग्रामीणों का कहना कि गांव में ज्यादातर मजदूर तबका है। अन्य सरकारी मिडिल कई किलोमीटर दूर है। ग्रामीण अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने में असमर्थ हैं। ऐसे में अध्यापकों की कमी के कारण इन बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार चाहे तो मिड डे मील स्कीम बंद कर दे। लेकिन स्कूल में अध्यापक लगा दे जिससे हमारे बच्चे पढ़-लिखकर कुछ बन सके। तीन साल से अध्यापक के आने का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने धमकी दी है कि यदि शिक्षा विभाग ने जल्द ही स्कूल में मिडिल के अध्यापक नियुक्त नहीं किए तो वे स्कूल में ताला जड़ देंगे।