यमुनानगर। मॉडल टाउन के एसएस जैन सभा में चल रहे चातुर्मास के प्रवचनों में महासाध्वी सुचेता महाराज ने भजन के माध्यम से समझाया अरिहंत सिद्ध साहू पार लगाओ मैं नाम जपु तेरा तू काट संकट मेरा। वहीं उन्होंने इसका वर्णन करते हुए बताया कि कोहम का अर्थ है आत्म चिंतन करना कि मैं कौन हूं, मेरे जीवन का मकसद क्या है, मेरी 84 करोड़ योनियों में पैदा होने और मरने का अंत कब होगा? मुझे मुक्ति कब मिलेगी। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति आत्म चिंतन करें और गहराई से समझने की कोशिश करें कि मैं कौन हूं तो उसका जीने का नजरिया पूरी तरह से बदल जाएगा और वह परमात्मा की प्राप्ति के लिए अपने आप को समर्पित कर देगा।
वहीं, महासाध्वी ने संक्रांति के अवसर पर संक्रांति का मंगल पाठ सुनाया और एक दृष्टांत के द्वारा संक्रांति का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि गुरु नानक देव जी एक गांव में गए, उस गांव के जमींदार ने गुरु नानक देव जी की भक्ति में ना ना प्रकार के व्यंजन बनाए जबकि इसी गांव के एक गरीब आदमी ने सूखी रोटी और साग बनाया। गुरु महाराज जब खाना खाने बैठे तो उन्होंने जमींदार की रोटी निचोड़ी तो उसमें से खून निकलने लगा और जब उन्होंने उस गरीब आदमी की रोटी निचोड़ी तो उसमें से दूध की धारा बहने लगी। उनके समझने का भाव यह था कि जमींदार का जो खाना था वह गरीबों की कमाई पर डाका डालकर कमाए हुए पैसे से था, जबकि उस गरीब आदमी ने पूरी श्रद्धा निष्ठा और सच्ची भावना के साथ अपने गुरु की सेवा में भोजन बनाया था।