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काम चलेगा कछुआ चाल तो समय पर कैसे बनेगा अस्पताल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 May 2022 02:09 AM IST
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How to Spoil the Kama Transition Turtle
सकिविल अस्पताल यमुनानगर में अधूरा पड़ा सड़क का निर्माण। - फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। दो सौ बेड के निर्माणाधीन अस्पताल भवन का काम पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को 13 करोड़ रुपये का बजट मिला था। यह बजट अस्पताल के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं। बजट मिलने के बाद भी अस्पताल में निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है। अस्पताल में अभी काफी काम होना बाकी है। यदि इसी गति से निर्माण कार्य चलता रहा तो यह साल के आखिर में भी इसका पूरा होना मुश्किल है। जबकि अस्पताल का निर्माण दो से तीन माह में पूरा हो जाना चाहिए ताकि मरीजों को जल्द से जल्द स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।
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सिविल अस्पताल के इस भवन के निर्माण का बजट पांच माह से जारी नहीं हो सका था। नवनियुक्त सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह ने इसके लिए भागदौड़ की तो वह इस निर्माणाधीन भवन के लिए 13 करोड़ रुपये का बजट मंजूर कराने में सफल हुए। बजट मिलने के बाद निर्माण शुरू तो हुआ लेकिन रफ्तार नहीं पकड़ी। एजेंसी ने निर्माण में मजदूर न के बराबर लगा रखे हैं। अस्पताल के डाक्टरों की माने तो जिस एजेंसी ने निर्माण का ठेका लिया है उसका काम दूसरी जगह भी चल रहा है। नए भवन में छह लैब बनी हैं। इनमें पुरानी लैब से सामान शिफ्ट होगा तभी पुरानी लैब को तोड़ कर नए भवन का हिस्सा बनेगा।
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ट्रॉमा सेंटर के सामने जमा हो रहा पानी
अस्पताल की सड़कों का काम भी अधर में लटका है। कई सड़कें ऊंची हैं, जिन पर अब तक टाइल तक नहीं लगाई। आधा हिस्सा नीचा होने की वजह से बारिश होने पर सारा गंदा पानी ट्रॉमा सेंटर के सामने जमा हो जाता है। पानी इतना जमा हो जाता है कि मरीजों व उनके तीरमारदारों को उपचार के लिए डाक्टर के पास जाना मुश्किल हो जाता है।
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लागत में हुआ 40 करोड़ का इजाफा
सिविल अस्पताल यमुनानगर में दो सौ बेड के नए भवन का निर्माण वर्ष 2020 में शुरू हुआ था। तब इसकी लागत 80 करोड़ रुपये थी। काम शुरू होते ही कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन से निर्माण रुक गया। काम ने रफ्तार पकड़ी तो बजट के कारण काम रूक गया। जैसे-जैसे काम आगे बढ़ा तो इसकी लागत भी बढ़ गई। अब इसकी लागत करीब 120 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। नए भवन में अस्पताल के तीन ब्लॉक बनाए जा रहे हैं। इनमें एक प्रशासनिक खंड, जबकि दो ब्लॉक मरीजों के लिए होंगे। इन्हीं में से एक ब्लॉक में ब्लड बैंक, लैब भी शिफ्ट होगी। प्रशासनिक खंड को तो डाक्टरों ने अपने बैठने के लिए तैयार करवा लिया था। मरीजों के लिए बन रहे ब्लॉक का कार्य अभी अधर में है।
भवन न होने से भटक रहे मरीज
अस्पताल का निर्माण पूरा न होने से मरीज व उनके तीमारदार काफी परेशान हैं। मरीजों की ओपीडी भी किसी तरह ट्रॉमा सेंटर के कमरों में हो रही है। भवन के अभाव में गर्भवती महिलाओं की ओपीडी व डिलीवरी सिविल अस्पताल जगाधरी में हो रही है। जबकि उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने के लिए यमुनानगर आना पड़ता है। जिसके लिए उन्हें आने जाने में 10 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है।

ठेकेदार को काम में तेजी लाने को कहेंगे : डॉ. मंजीत सिंह
सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि अस्पताल निर्माण के लिए बजट मिलने से काम शुरू हो गया था। यदि काम धीमी गति से चल रहा है तो इसके बारे में एजेंसी व पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से बात करेंगे।
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