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Yamuna Nagar News: प्रतिबंध के बाद भी घर पर कराए जा रहे प्रसव
Mon, 21 Sep 2026 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 21 Sep 2026 01:28 AM IST
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जिला नागरिक अस्पताल। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के दावे स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। वहीं प्रतिबंध होने के बाद भी घर पर प्रसव हो रहे हैं। इस वर्ष जुलाई तक चार महिलाओं ने घर पर बच्चों को जन्म दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में जिले में कुल 19,597 गर्भवतियों की डिलीवरी हुई। इनमें 26 महिलाओं ने घर पर ही बच्चों को जन्म दिया। यह कुल डिलीवरी का करीब 0.13 प्रतिशत है। वहीं इस वर्ष जुलाई तक जिले में 5,690 गर्भवतियों की डिलीवरी हो चुकी है। इनमें चार महिलाओं की डिलीवरी घर पर हुई।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक साल में तीन गर्भवतियों ने एंबुलेंस में भी बच्चों को जन्म दिया। महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस घर पहुंची थी। रास्ते में ही प्रसव पीड़ा बढ़ने के कारण एंबुलेंस में मौजूद ईएमटी ने प्रसव कराया।
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घर में प्रसव से हो सकती परेशानी : डाॅ. दिव्या मंगला
कार्यवाहक सिविल सर्जन डाॅ. दिव्या मंगला का कहना है कि घर पर प्रसव के दौरान अचानक अधिक रक्तस्राव, प्रसव संबंधी जटिलता या नवजात को सांस लेने में परेशानी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। अस्पताल में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, दवाएं और आवश्यक उपकरण उपलब्ध रहते हैं। आपात स्थिति में तत्काल उपचार और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन की सुविधा भी मिल सकती है। इसी वजह से जच्चा-बच्चा की सुरक्षा को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग गर्भवतियों को संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक करता है।
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यमुनानगर। जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के दावे स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। वहीं प्रतिबंध होने के बाद भी घर पर प्रसव हो रहे हैं। इस वर्ष जुलाई तक चार महिलाओं ने घर पर बच्चों को जन्म दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में जिले में कुल 19,597 गर्भवतियों की डिलीवरी हुई। इनमें 26 महिलाओं ने घर पर ही बच्चों को जन्म दिया। यह कुल डिलीवरी का करीब 0.13 प्रतिशत है। वहीं इस वर्ष जुलाई तक जिले में 5,690 गर्भवतियों की डिलीवरी हो चुकी है। इनमें चार महिलाओं की डिलीवरी घर पर हुई।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक साल में तीन गर्भवतियों ने एंबुलेंस में भी बच्चों को जन्म दिया। महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस घर पहुंची थी। रास्ते में ही प्रसव पीड़ा बढ़ने के कारण एंबुलेंस में मौजूद ईएमटी ने प्रसव कराया।
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घर में प्रसव से हो सकती परेशानी : डाॅ. दिव्या मंगला
कार्यवाहक सिविल सर्जन डाॅ. दिव्या मंगला का कहना है कि घर पर प्रसव के दौरान अचानक अधिक रक्तस्राव, प्रसव संबंधी जटिलता या नवजात को सांस लेने में परेशानी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। अस्पताल में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, दवाएं और आवश्यक उपकरण उपलब्ध रहते हैं। आपात स्थिति में तत्काल उपचार और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन की सुविधा भी मिल सकती है। इसी वजह से जच्चा-बच्चा की सुरक्षा को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग गर्भवतियों को संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक करता है।