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Yamuna Nagar News: आज शाम 6.34 बजे होगा होलिका दहन
Sun, 24 Mar 2024 04:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 24 Mar 2024 04:30 AM IST
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यमुनानगर। जिले में रविवार को सैकड़ों स्थानों पर होलिका पूजन व शाम 6.34 बजे दहन होगा। शहर में होलिका दहन का सबसे बड़ा आयोजन रेलवे स्टेशन यमुनानगर के पास अग्रसेन चौक के नजदीक होता है। यहां पर सुबह से ही श्रद्धालु होलिका की पूजा करने के लिए पहुंचते हैं। सुबह से लेकर रात तक यहां 15 हजार से अधिक श्रद्धालु ने पूजा करते है।
शहर में सबसे पुराना होलिका दहन महाराजा अग्रसेन (स्टेशन) चौक समीप होता है। इसकी शुरुआत सन् 1948 में लाला जाधूराम ने की थी। शुरुआत के एक दशक तक होलिका दहन जमना गली के सामने हुआ। इसके बाद यहां दोनों ओर दुकानें लगने और रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही होने से रास्ता तंग होता देख होलिका दहन का स्थान बदला गया। होलिका दहन की तैयारी में रेलवे स्टेशन समीप देवी मंदिर गली निवासी 77 वर्षीय भगतराम शर्मा व उनका परिवार लगा हैं। भगतराम शर्मा के मुताबिक इस बार रविवार शाम 6.34 बजे होलिका दहन होगा। उनका परिवार 76 वर्षों से परिवार होलिका दहन की परंपरा को कायम रखे हैं, जिसमें परिवार की लगातार तीसरी पीढ़ी सेवा में लगी है। उन्होंने बताया कि जमना गली समीप लाला जाधूराम को आटा चक्की होती थी। लाला जाधूराम से उनके ताऊ हरिराम शर्मा की दोस्ती थी। देश की आजादी के एक वर्ष बाद दोनों ने कुछ साथियों संग मिलकर पहली बार होलिका दहन करने की शुरुआत की। इस तरह पहली बार सन् 1948 में जमना गली के सामने होलिका दहन हुआ। जहां करीब दस वर्षों तक होलिका दहन किया, पर बाद में यहां दोनों ओर दुकानें लगने व रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्री बढ़ने पर रास्ता तंग हो गया।
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भगतराम ने बताया कि होलिका दहन की तैयारी 40 दिन पहले शुरू कर देते हैं। वसंत पंचमी के दिन झंडे की रस्म अदा कर कढ़ी चावल का प्रसाद वितरित किया जाता है। होलिका दहन से दो दिन पहले से दहन स्थल पर सामग्री जुटाने लगते हैं। करीब 30 क्विंटल लकड़, 7 क्विंटल उपले लगते हैं। कई क्यों से लकड़ी पुरानी सब्जी मंडी के मदन गोपाल भेंट करते हैं। दहन के दिन अलसुबह चार बजे से पूजा शुरू हो जाती है। कई वर्षों से ही दो ढोल बुला पूजन यमुना मंदिर के पंडित हरिमनी करते आ रहे हैं। सुबह से लिए जाते हैं, जो दहन के समय तक बजाए जाते हैं। पूरे दिन बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे व हर वर्ग के लोग होलिका की परिक्रमा करने व कच्चा सूत बांधने आते हैं। होलिका दहन पर करीब डेढ़ क्विंटल बूंदी के लड्डू श्रद्धालुओं में वितरित किए जाते हैं।
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