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Yamuna Nagar News: शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का बताया महत्व
Tue, 27 Oct 2026 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 27 Oct 2026 01:51 AM IST
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व्यासपुर में शरद पूर्णिमा पर प्रसाद वितरित करते आयोजक। प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। व्यासपुर स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में शरद पूर्णिमा के उपलक्ष्य में मेडिकल कैंप और सत्संग-प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सत्संग के माध्यम से श्रद्धालुओं को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का महत्व बताया गया।
स्वामी गुरु ज्ञानानंद ने प्रवचन में कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए केवल शरीर का स्वस्थ होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मन का शांत और सकारात्मक होना भी जरूरी है। संतुलित दिनचर्या, संयमित खानपान, नियमित योग और व्यायाम से शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है। सत्संग, सद्विचार और ध्यान-साधना मन को तनाव, क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से मुक्त रखने में सहायक हैं।
उन्होनें कहा कि ब्रह्मज्ञान के माध्यम से मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान कर आंतरिक शांति, धैर्य और सकारात्मकता विकसित कर सकता है। शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन से जीवन को सुखी और सार्थक बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में शरद पूर्णिमा की परंपरा के अनुसार चंद्रमा की चांदनी में रखी खीर का प्रसाद वितरित किया गया।
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इसके साथ पारंपरिक औषधि भी दी गई। हालांकि, औषधियों के चिकित्सकीय लाभ के लिए चिकित्सक की सलाह जरूरी है। मंचासीन साध्वी दीक्षा भारती ने भी आध्यात्मिक विचार प्रस्तुत किए। साध्वी अनुपमा भारती, साध्वी मीना भारती और साध्वी वंशिका भारती ने भजनों का गायन किया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
मेडिकल कैंप में नूरमहल से आए आयुर्वेदिक चिकित्सकों की टीम ने सेवाएं दीं। कैंप में नजला-जुकाम, अस्थमा और पुरानी खांसी से संबंधित पारंपरिक औषधि वितरित की गई। कार्यक्रम के अंत में विश्व कल्याण, मानवता के उत्थान और संपूर्ण सृष्टि में शांति की कामना के लिए सामूहिक ध्यान-साधना की गई।
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व्यासपुर। व्यासपुर स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में शरद पूर्णिमा के उपलक्ष्य में मेडिकल कैंप और सत्संग-प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सत्संग के माध्यम से श्रद्धालुओं को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का महत्व बताया गया।
स्वामी गुरु ज्ञानानंद ने प्रवचन में कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए केवल शरीर का स्वस्थ होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मन का शांत और सकारात्मक होना भी जरूरी है। संतुलित दिनचर्या, संयमित खानपान, नियमित योग और व्यायाम से शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है। सत्संग, सद्विचार और ध्यान-साधना मन को तनाव, क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से मुक्त रखने में सहायक हैं।
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उन्होनें कहा कि ब्रह्मज्ञान के माध्यम से मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान कर आंतरिक शांति, धैर्य और सकारात्मकता विकसित कर सकता है। शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन से जीवन को सुखी और सार्थक बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में शरद पूर्णिमा की परंपरा के अनुसार चंद्रमा की चांदनी में रखी खीर का प्रसाद वितरित किया गया।
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इसके साथ पारंपरिक औषधि भी दी गई। हालांकि, औषधियों के चिकित्सकीय लाभ के लिए चिकित्सक की सलाह जरूरी है। मंचासीन साध्वी दीक्षा भारती ने भी आध्यात्मिक विचार प्रस्तुत किए। साध्वी अनुपमा भारती, साध्वी मीना भारती और साध्वी वंशिका भारती ने भजनों का गायन किया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
मेडिकल कैंप में नूरमहल से आए आयुर्वेदिक चिकित्सकों की टीम ने सेवाएं दीं। कैंप में नजला-जुकाम, अस्थमा और पुरानी खांसी से संबंधित पारंपरिक औषधि वितरित की गई। कार्यक्रम के अंत में विश्व कल्याण, मानवता के उत्थान और संपूर्ण सृष्टि में शांति की कामना के लिए सामूहिक ध्यान-साधना की गई।