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जीपीएस से नियंत्रित होगी स्कूल बसों की रफ्तार

Wed, 14 May 2014 12:06 AM IST
यमुनानगर
यमुनानगर Updated Wed, 14 May 2014 12:06 AM IST
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GPS will be controlled by the speed of school buses
अब स्कूल प्रबंधक और आरटीए विभाग के अधिकारी ऑफिस में बैठे ही यह जान जाएंगे कि स्कूल बस किस रूट पर कितनी रफ्तार से चल रही है।
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सरकार की सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी-2014 के तहत स्कूल वाहनों के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। इसके तहत एक अप्रैल के बाद से सभी नई स्कूल बसों पर जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) लगाना अनिवार्य है। इसे लगाए बिना बस का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा।

बता दें कि इससे पूर्व स्कूली वाहनों के हादसों पर अंकुश लगाने के लिए स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर लगाने के निर्देश दिए गए थे। सूत्रों की मानें तो अधिकांश स्कूल बसों में निर्देशों के बाद भी स्पीड गवर्नर नहीं लग पाए। साथ ही स्पीड गवर्नर की एक खामी यह भी थी कि इसकी मदद से स्कूली बसों की रफ्तार जानने के लिए बसों को चौक-चौराहों पर रोककर जांच करनी पड़ती थी।
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इन्हीं बातों को मद्देनजर रख इस बार सरकार ने सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी-2014 के तहत स्कूली वाहनों के लिए कुछ नए नियमों को लागू किए हैं, जिनमें एक अप्रैल के बाद से सभी नई स्कूली बसों में जीपीएस को लगाना शामिल है।
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यूं करेगा जीपीएस काम
जीपीएस सेटेलाइट अधारित एक ऐसी प्रणाली है, जो इंटरनेट की मदद से काम करती है। इस पर लगी स्क्रीन पृथ्वी पर आपके आसपास के रास्तों के रेखांकित कर आप किस जगह हो यह दर्शाती है। स्कूली बसों में इस सिस्टम के लगने के बाद स्कूल प्रबंधक न केवल यह जान पाएंगे कि उनकी बसें किस जगह पर हैं, बल्कि संबंधित विभागीय अधिकारी भी दफ्तर में बैठे हुए ही बसों की रफ्तार जान सकेंगे। अगर किसी बस की रफ्तार अधिक पाई जाती है तो उसके चालक के खिलाफ आसानी से कार्रवाई हो सकेगी।


बसों में लगानी होगी चालक व कंडक्टर की फोटो
सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी-2014 के तहत नए नियमों में एक और नया नियम शामिल किया गया है। इसके तहत सभी पुरानी और नई बसों में चालक और कंडक्टर का पासपोर्ट साइज फोटो लगाना अनिवार्य किया गया है। सूत्रों के मुताबिक यह निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि कई बार हादसे के बाद बस चला रहे अनट्रेंड चालक के स्थान पर प्रशिक्षित चालक को आगे कर कार्रवाई से बचने का प्रयास किया जाता है।
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